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बीजेपी पर हमलावर संजय राउत की आक्रामक शैली के कायल थे बालासाहेब ठाकरे, 29 साल में ही बना दिया था सामना का संपादक

शिवसेना संस्थापक 'बालासाहब ठाकरे' भी संजय राउत की आक्रामक लेखन शैली से प्रभावित थे और यही वजह थी कि अशोक पदबिदरी के निधन के बाद बालासाहब ठाकरे ने संजय राउत को 'सामना' का कार्यकारी संपादक बना दिया था।

sanjay rautशिवसेना नेता संजय राउत। (ani image)

महाराष्ट्र में नई सरकार को लेकर अभी भी पसोपेस बना हुआ है। दरअसल भाजपा और शिवसेना के बीच अभी तक सीएम पद के लिए 50-50 शेयरिंग फार्मूले पर सहमति नहीं बन पायी है। इसके चलते शिवसेना सांसद संजय राउत काफी मुखर होकर बयानबाजी कर रहे हैं और पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में भी अपने संपादकीय के जरिए भाजपा पर जमकर निशाना साध रहे हैं। इतना ही नहीं संजय राउत ने हाल के दिनों में एनसीपी मुखिया शरद पवार से भी दो बार मुलाकात की है। महाराष्ट्र की राजनीति में मौजूदा समय में संजय राउत की सक्रियता देखकर कहा जा सकता है कि वह राजनीति की पिच पर फिलहाल फ्रंटफुट पर बल्लेबाजी कर रहे हैं।

कौन हैं संजय राउतः बता दें कि संजय राउत शिवसेना के राज्यसभा सांसद और पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के कार्यकारी संपादक भी हैं और अपने आक्रामक और मुखर बयानों के लिए जाने जाते हैं। सामना के लिए काम करने से पहले संजय राउत मराठी साप्ताहिक ‘लोकप्रभा’ के लिए काम करते थे। उन्होंने बतौर क्राइम रिपोर्टर अपने करियर की शुरुआत की थी। साल 1980 के दशक में गैंगस्टर रामा नाईक पर की गई उनकी कवर स्टोरी ने उन्हें एक जाना पहचाना नाम बना दिया था।

शिवसेना संस्थापक ‘बालासाहब ठाकरे’ भी संजय राउत की आक्रामक लेखन शैली से प्रभावित थे और यही वजह थी कि अशोक पदबिदरी के निधन के बाद बालासाहब ठाकरे ने संजय राउत को ‘सामना’ का कार्यकारी संपादक बना दिया था। बाद में संजय राउत बालासाहब ठाकरे के काफी करीबी हो गए। राउत के काम से ठाकरे इतने खुश हुए कि उन्होंने 29 साल की उम्र में ही राउत को सामना का संपादक बना दिया था।

हालांकि अपने बेबाक और आक्रामक लेखन के चलते संजय राउत ने कई बार पार्टी लाइन को भी क्रॉस किया है, जिसके चलते पार्टी को शर्मिंदगी भी उठानी पड़ी है। साल 2014 में भी संजय राउत ने अपने एक संपादकीय में महाराष्ट्र के गुजराती समुदाय पर निशाना साधा था और उन पर धन कमाने के लिए मुंबई का दोहन करने का आरोप लगा दिया था। महाराष्ट्र में शिवसेना और भाजपा के गठबंधन वाली सरकार को भी संजय राउत कई बार निशाने पर ले चुके थे। इसी साल संजय राउत ने अपने एक संपादकीय में बुर्के पर बैन लगाने की भी मांग कर डाली थी। हालांकि इससे पार्टी नेतृत्व काफी नाराज हुआ था।

संजय राउत शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के सच्चे समर्थकों में शुमार किए जाते हैं। इसी साल राउत ने ठाकरे के जीवन पर बनी एक फिल्म को प्रोड्यूस भी किया। इसके साथ 2015 में एक शिवसैनिक के जीवन पर बनी फिल्म को भी राउत प्रोड्यूस कर चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर भी महाराष्ट्र में सरकार बना सकती है। संजय राउत की एनसीपी चीफ शरद पवार से मुलाकात को इसी नजर से देखा जा रहा है। हालांकि कुछ लोग इसे शिवसेना की भाजपा पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर भी देख रहे हैं। बहरहाल संजय राउत तो मुखर होकर बयानबाजी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शिवसेना के अन्य नेता फिलहाल इस मसले पर चुप्पी साधे हुए हैं। संजय राउत मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी भाजपा को निशाने पर ले रहे हैं।

शनिवार को ही अपने एक बयान में संजय राउत ने कहा है कि यदि भाजपा सरकार बनाने में असफल रहती है तो उनकी पार्टी (शिवसेना) सरकार बनाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि “शिवसेना 145 के जादुई आंकड़े को छू सकती है। पार्टी सरकार बनाने में सक्षम है। हम तैयार हैं। हमारे पास उन लोगों का समर्थन पत्र भी है, जो हमारी मदद के लिए तैयार हैं।”

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