बिहार की बांकीपुर और मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीटों पर मिली हार ने बीजेपी की दो कमजोरियों को सामने ला दिया है और यह पार्टी के लिए चिंता का विषय हो सकती हैं। पहली यह कि बीजेपी के समर्थक आधार वोट बैंक में दरार दिखाई दी है और दूसरा- पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव की उसकी कोशिशों को विरोध का सामना करना पड़ा है।
इसके अलावा एनडीए के सहयोगी दलों ने भी कहा है कि मतदाताओं को और बीजेपी के गढ़ को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता और सत्ता के अहंकार का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
बीजेपी के सहयोगी दल जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि बांकीपुर का नतीजा बीजेपी और एनडीए दोनों के लिए बड़ा संदेश हैं। उन्होंने कहा, “बिहार में भारी जीत हासिल करने के ठीक आठ महीने बाद और नीतीश कुमार की जगह सम्राट चौधरी के सत्ता में आने के चार महीने बाद हम यह चुनाव हार गए हैं।” उन्होंने कहा कि बीजेपी के बिहार में सत्ता में आने के बाद एनडीए का यह पहला चुनाव था।
बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व पदाधिकारी ने कहा, “दतिया और बांकीपुर दोनों ने साफ संदेश दिया है कि हमारे कट्टर समर्थक भी हमारी बातों और प्रस्तावों को आंख बंद करके नहीं मानेंगे। वे हमारे गुलाम नहीं हैं। यह पार्टी के लिए गंभीर संदेश है, न केवल बिहार और मध्य प्रदेश में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी। मतदाता यह चाहते थे कि पार्टी को करारा जवाब मिले।”
बीजेपी के एक सूत्र ने कहा कि बांकीपुर और दतिया में मिली हार से उन नेताओं की साख को भी झटका लगा है जिन्हें अपने इलाकों में बहुत प्रभावशाली माना जाता था।
नरोत्तम मिश्रा को नहीं दिया टिकट
दतिया में नरोत्तम मिश्रा पार्टी के मजबूत नेता थे लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया। मिश्रा को 2023 के विधानसभा चुनाव में हार मिली थी और इस उपचुनाव में भी वह टिकट मांग रहे थे। टिकट कटने के बाद उन्होंने अपनी नाराजगी को सार्वजनिक किया। बीजेपी के उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की हार में उनकी नाराजगी का भी रोल रहा है।
1995 से बीजेपी के पास थी बांकीपुर सीट
बांकीपुर में मिली हार बीजेपी के लिए बड़ा झटका है क्योंकि यह सीट 1995 से उसके पास थी और पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई थी। 2005 से अब तक पार्टी यहां पर लगातार पांच बार जीती थी और 1995 से 2005 के बीच नितिन नवीन के पिता किशोर प्रसाद सिन्हा यहां से विधायक रहे थे। तब इस सीट को पटना पश्चिम कहा जाता था।
इस मामले में बीजेपी को अहंकार भी भारी पड़ा है। बीजेपी के एक सांसद ने कहा था कि बांकीपुर में बीजेपी की टिकट पर कुत्ता या बिल्ली भी चुनाव लड़ गए तो भी पार्टी जीत जाएगी। हार के बाद एनडीए की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के एक सांसद ने इस बयान की आलोचना की और कहा कि कोई सीनियर नेता ऐसा बयान कैसे दे सकता है।
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपना चुनाव अभियान पहले ही शुरू कर दिया था। बीजेपी के एक सीनियर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कहते हैं कि जब भी पीढ़ीगत बदलाव होता है तो चुनौतियां सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि जेपी नड्डा के बाद जब पार्टी को अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना था तो कई मजबूत दावेदारों को पीछे छोड़कर नितिन नवीन को अध्यक्ष बना दिया गया। उन्होंने कहा कि इससे पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को धक्का लगा।
बीजेपी के एक सांसद ने कहा, “यह सोचना गलत है कि देश हमारे हर कदम का समर्थन करेगा क्योंकि कोई भरोसेमंद विकल्प नहीं है।” उन्होंने कहा कि नतीजों से पता चलता है कि युवा और आपका मूल समर्थक वर्ग भी सवाल उठा रहा है। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन का भी जिक्र किया।
बीजेपी के एक और वरिष्ठ नेता ने कहा कि प्रशांत किशोर बीजेपी या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकल्प नहीं हैं लेकिन जनता ने बीजेपी के मजबूत गढ़ में उनका समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि बीजेपी के विरोधी मजबूत हुए हैं बल्कि यह संकेत है कि बीजेपी के कोर वोट बैंक में सेंध लग रही है।
बीजेपी ने बदल दिया था उम्मीदवार
बीजेपी के कम से कम तीन सांसदों ने इस बात को माना कि यह एक बड़ा संदेश है लेकिन उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता गिरी है। जेडीयू के एक सांसद ने कहा कि बांकीपुर में अंतिम वक्त में उम्मीदवार बदला गया और यह भी बीजेपी की हार का एक कारण है। पहले बीजेपी ने अभिषेक कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया लेकिन बाद में नीरज कुमार सिन्हा को टिकट दे दिया। इसके पीछे कोई वजह नहीं बताई गई और इससे मतदाताओं में कन्फ्यूजन पैदा हुआ।
50 हजार से ज्यादा वोटों से जीते थे नितिन नवीन
बांकीपुर में पिछले विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन को 50 हजार से ज्यादा वोटों से जीत मिली थी। बांकीपुर में उम्मीदवार का चयन उन्होंने ही किया था इसलिए हार की पूरी जिम्मेदारी उन पर भी आएगी।
बांकीपुर के नतीजे सम्राट चौधरी के लिए भी झटका हैं क्योंकि मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली चुनावी परीक्षा थी। प्रशांत किशोर ने उपचुनाव को सम्राट चौधरी के खिलाफ जनमत संग्रह के रूप में सामने रखा है और चुनाव प्रचार के दौरान लोगों से कहा कि अगर आप सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद से हटाना चाहते हैं तो बीजेपी को हराएं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संदेश दें।
सम्राट चौधरी पर हमलावर रहे थे प्रशांत किशोर
बिहार बीजेपी के एक सांसद ने कहा कि अब प्रशांत किशोर दावा कर सकते हैं कि यह साबित हो गया है कि नीतीश की जगह मुख्यमंत्री पद के लिए बीजेपी नेतृत्व द्वारा किया गया चुनाव गलत था। चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी पर लगातार आरोप लगाए थे।
बीजेपी सांसद ने कहा कि पार्टी ने इस चुनाव में कई वरिष्ठ नेताओं को प्रचार करने के लिए भेजा इसलिए यह हार पार्टी को ज्यादा भारी पड़ेगी।
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बिहार की बांकीपुर सीट का रिजल्ट बहुत बड़ा राजनीतिक उलटफेर है। नितिन नवीन इस सीट से 5 बार विधायक रह चुके हैं। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
