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आडवाणी से मिले यशवंत सिन्‍हा, मोदी के खिलाफ असंतोष और बढ़ने का खतरा

इसे इस बात के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि कई महीनों से हाशिये पर डाल दिए गए ये नेता अब और मुखर हो सकते हैं।

Author नई दिल्ली | November 11, 2015 15:27 pm
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (पीटीआई फाइल फोटो)

भाजपा में निर्विवाद नेता के तौर पर उभरने और मई में सरकार बनने के बाद मोदी को पहले बड़े असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को यशवंत सिन्‍हा ने लालकृष्‍ण आडवाणी के घर जाकर उनसे मुलाकात की। इसे इस बात के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि कई महीनों से हाशिये पर डाल दिए गए ये नेता अब और मुखर हो सकते हैं। हालांकि,  बुधवार को नितिन गडकरी मोदी-शाह की जोड़ी का बचाव करने के लिए उतरे। उन्‍होंने कहा कि बिहार की हार के लिए इन दोनों को जिम्‍मेदार ठहराना गलत है। मंगलवार को आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, शांता कुमार और यशवंत सिन्हा ने संक्षिप्त लेकिन कड़े शब्दों में एक बयान जारी कर बिहार की हार की संपूर्ण समीक्षा की मांग उठाई थी। बयान के अनुसार, सबसे हालिया हार का मुख्य कारण पिछले एक साल में पार्टी का कमजोर होना है। वरिष्ठ नेताओं के बयान के अनुसार, हार के कारणों की पूरी तरह समीक्षा की जानी चाहिए और इस बात का भी अध्ययन होना चाहिए कि पार्टी कुछ मुट्ठीभर लोगों के अनुसार चलने पर मजबूर क्यों हो रही है और उसका आम-सहमति वाला चरित्र नष्ट कैसे हो गया।

बिहार विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद भाजपा में लगातार बागी सुर उभर रहे हैं। मंगलवार को बुजुर्ग नेता और भाजपा के दिग्गज लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के साथ दो अन्य वरिष्ठ नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के खिलाफ असंतोष का बिगुल बजाया। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में पार्टी कमजोर हुई है और उसे कुछ मुट्ठीभर लोगों के अनुसार चलने पर मजबूर किया जा रहा है। उधर बिहार से भाजपा सांसद भोला सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर निशाना साधा और कहा इन नेताओं का अभियान राज्य के विकास पर केंद्रित होना चाहिए था, पर ये भटक गए और इसका नुकसान झेलना पड़ा।

हालांकि पार्टी के मोदी समर्थक नेताओं केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली, राजनाथ सिंह ने मोदी का बचाव किया और कहा कि महागठबंधन की जीत विपक्षी एकजुटता की वजह से हुई और इसका असर मोदी ब्रांड पर नहीं पड़ने वाला। उधर कांग्रेस ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि भाजपा और मोदी ने बिहार में चुनावी पराजय से कोई सबक नहीं सीखा है क्योंकि वे थोड़ी-सी भी कार्रवाई करने में असफल रहे हैं, यहां तक कि असंयमित बातचीत करने वाले किसी भी व्यक्ति का उन्होंने एक घंटे के लिए भी निलंबन नहीं किया।

भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जोशी के आवास से बयान जारी किए जाने से पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व विचारक और पूर्व भाजपा नेता गोविंदाचार्य ने जोशी से बंद कमरे में गुफ्तगू की। बयान के अनुसार बिहार के चुनाव परिणाम दिखाते हैं कि दिल्ली की हार से पार्टी ने कोई सबक नहीं सीखा है जिसमें आम आदमी पार्टी ने 70 विधानसभा सीटों में से 67 पर जीत हासिल कर भाजपा को जबरदस्त पटखनी दी थी।

बयान के मुताबिक, ‘बिहार में हार के लिए सभी को इसलिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है ताकि किसी एक को जिम्मेदार नहीं ठहराना पड़े। यह दिखाता है कि पार्टी के जीतने की स्थिति में श्रेय लेने वाले लोग बिहार में निराशाजनक प्रदर्शन के लिए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।’ इस बयान को सोमवार को संसदीय बोर्ड में की गई समीक्षा के संदर्भ में वित्त मंत्री अरुण जेटली की ओर से किए गए पार्टी नेतृत्व के बचाव पर निशाने के तौर पर देखा जा रहा है। जेटली ने कहा था, जहां तक जवाबदेही की बात है तो पार्टी सामूहिक रूप से जीतती है और सामूहिक रूप से हारती है। राजग की पराजय के बारे में पूछने पर राजनाथ ने यहां दिवाली मिलन में संवाददाताओं से कहा, ‘महागठबंधन का सामाजिक समीकरण हमारे ऊपर भारी पड़ा।

उधर शत्रुघ्न सिन्हा और दो अन्य सांसद हुक्मदेव नारायण यादव और आरके सिंह द्वारा बिहार की हार के लिए पार्टी पर हमला करने के बाद अब बेगूसराय से दो बार के सांसद भोला सिंह ने भी उनके सुर में सुर मिलाते हुए मोदी पर असंयमित भाषा का उपयोग करने का आरोप लगाया। भोला सिंह ने कहा, लोग मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में देखने गए किंतु उनके भीतर लालू दिखायी दिया। यह पूछने पर कि क्या मोदी और शाह ने मुसलिमों के आरक्षण और पाकिस्तान जैसे मुद्दों को हवा देकर प्रचार को सांप्रदायिक रंग दिया, भाजपा सांसद ने कहा, ‘निश्चित तौर पर।’ उन्होंने कहा, आपने गाय या पाकिस्तान का मुद्दा और क्यों उठाया। प्रचार बिहार के पिछड़ेपन और उसके विकास पर होना चाहिए था लेकिन हम भटक गए और गड्ढे में गिर पड़े।

वयोवृद्ध नेता ने कहा कि मोदी राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के जाल में फंस गए और उनके मानक तक गिर गए जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मर्यादित रहे और उन्होंने विभिन्न समुदायों का वोट अपनी ओर खींचा। सांसद ने कहा कि लोग प्रधानमंत्री को देखने जाते थे लेकिन उन्हें उनमें लालू नजर आया। बिहार चुनाव में भाजपा की हार के बाद मोदी पर किसी पार्टी सांसद का यह पहला सीधा प्रहार है।

भाजपा ने भोला सिंह द्वारा मोदी समेत पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की आलोचनाओं को खारिज करते हुए नेताओं को संयम बरतने की सलाह दी। भाजपा के सचिव श्रीकांत शर्मा ने यहां कहा, पार्टी सिंह की आलोचना को खारिज करती है। हम सभी पार्टी नेताओं से संयम बरतने की अपील करते हैं। सिंह के आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा ने कहा कि वह देश के अधिकतर राज्यों में सरकार चला रही है और आज मोदी वा शाह के नेतृत्व में किसी अन्य पार्टी से अधिक विधायक भाजपा के हैं। शर्मा ने कहा कि भाजपा बिहार में इसलिए हारी ंकि नीतीश कुमार और लालू प्रसाद के नेतृत्व में महागठबंधन के पक्ष में सामाजिक अंकगणित राजग के मुकाबले लाभकारी रहा। भोला सिंह के अलावा भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, आरके सिंह और हुकुमदेव नारायण यादव भी पार्टी की रणनीति की आलोचना कर चुके हैं।

इधर कांग्रेस ने कहा कि भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में चुनावी पराजय से कोई सबक नहीं सीखा है क्योंकि वे थोड़ी सी भी कार्रवाई करने में असफल रहे हैं यहां तक कि असंयमित बातचीत करने वाले किसी भी व्यक्ति का उन्होंने एक घंटे के लिये भी निलंबन नहीं किया। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा, यह सब जनता को मूर्ख बनाने की राजनीति है। प्रधानमंत्री शीर्ष नेतृत्व हैं, लेकिन किसी के भी खिलाफ थोड़ी सी भी कार्रवाई नहीं । उन्होंने कहा, कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं । कोई प्रतिरोधात्मक कार्रवाई नहीं । कोई निष्कासन नहीं, यहां तक कि कोई निलंबन भी नहीं । किसी बड़बोले के लिए एक घंटे का भी निलंबन नहीं … बिहार से कोई सबक नहीं सीखा।

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