भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 15वीं सदी के संत-कवि संत रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर देशभर में एक विशेष अभियान चलाएगी। इसके तहत वाराणसी स्थित संत रविदास की जन्मस्थली की पवित्र मिट्टी को 131 कलशों में भरकर देश के विभिन्न हिस्सों में ले जाया जाएगा। इस दौरान पंजाब के जालंधर से उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक ‘समरसता यात्रा’ निकाली जाएगी। भाजपा इस अभियान के जरिए विशेष रूप से दलित समाज तक अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
उत्तर प्रदेश में दलित समुदाय राज्य की कुल आबादी का करीब 21 प्रतिशत है। राज्य की 403 विधानसभा सीटों में से 84 सीटें अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और उसकी सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) ने मिलकर 84 में से 63 आरक्षित सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि उस समय समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 20 सीटें मिली थीं।
वहीं पंजाब में दलित आबादी करीब 32 प्रतिशत है जो देश में सबसे अधिक दलित आबादी वाले राज्यों में से एक है। राज्य की 117 सदस्यीय विधानसभा में 34 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा इन 34 में से एक भी आरक्षित सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी।
रविदासिया समुदाय दलित समुदाय का प्रमुख वर्ग
संत रविदास के अनुयायियों को रविदासिया समुदाय के नाम से जाना जाता है और ये दलित समुदाय का एक प्रमुख वर्ग हैं। इस समुदाय की सबसे बड़ी आबादी पंजाब के दोआबा क्षेत्र में रहती है। अनुमान के अनुसार, 12 लाख से अधिक रविदासिया पंजाब के कपूरथला, होशियारपुर, नवांशहर (शहीद भगत सिंह नगर) और जालंधर जिलों में रहा करते हैं।
रविदासिया समुदाय की संत रविदास के प्रति गहरी आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव की मतदान की तारीख भी बदलनी पड़ी थी। पहले मतदान 14 फरवरी को होना था लेकिन विभिन्न राजनीतिक दलों के अनुरोध के बाद इसे 20 फरवरी कर दिया गया। दलों का कहना था कि गुरु रविदास जयंती के अवसर पर बड़ी संख्या में रविदासिया श्रद्धालु उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित संत रविदास की जन्मस्थली के दर्शन के लिए जाते हैं। ऐसे में यदि मतदान और जयंती एक ही दिन होती तो बड़ी संख्या में मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाते।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा ने 20 फरवरी को पड़ने वाली गुरु रविदास जयंती के लिए विशेष अभियान की तैयारी की है। दलित राजनीति में संत रविदास के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी का सबसे बड़ा फोकस उत्तर प्रदेश पर है।
इस अभियान के तहत वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास की जन्मस्थली से पवित्र मिट्टी से भरे 104 कलश उत्तर प्रदेश के हर गांव तक पहुंचाए जाएंगे। वहीं 27 अन्य कलश देश के अलग-अलग राज्यों में भेजे जाएंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार, 27 जुलाई को सीर गोवर्धनपुर में ‘माटी पूजन’ किया जाएगा। इसके बाद 28 जुलाई को देशभर से भाजपा के 131 समूहों के प्रतिनिधि वाराणसी पहुंचेंगे और कलशों में पवित्र मिट्टी भरेंगे।
29 जुलाई को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीर गोवर्धनपुर से सात महीने तक चलने वाले ‘श्री गुरु रविदास महाराज समरसता संकल्प अभियान’ की शुरुआत करेंगे। इस अवसर पर ‘समरसता संकल्प सभा’ का आयोजन किया जाएगा जिसमें पार्टी ने करीब 25 हजार लोगों की मौजूदगी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है।
इस अभियान के दौरान देशभर में स्थित संत रविदास मंदिरों में दीपोत्सव, गुरुवाणी का पाठ, भजन संध्या और समरसता संकल्प कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इसके बाद 30 जुलाई से 10 सितंबर के बीच ‘कलश वंदन’ कार्यक्रम के तहत इन कलशों को उत्तर प्रदेश के 98 संगठनात्मक जिला इकाइयों, 6 क्षेत्रीय इकाइयों और 27 अन्य राज्यों के भाजपा प्रतिनिधियों को सौंपा जाएगा। ये प्रतिनिधि पवित्र मिट्टी वाले कलशों को विभिन्न संत रविदास मंदिरों और संत सम्मेलनों तक लेकर जाएंगे।
इसके अलावा, 29 जुलाई से 31 अगस्त तक भाजपा देशभर के संतों, महात्माओं, गुरुओं और महंतों से संपर्क करेगी। पार्टी उनसे आशीर्वाद लेने के साथ-साथ सात महीने तक चलने वाले ‘श्री गुरु रविदास महाराज समरसता संकल्प अभियान’ के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने की अपील करेगी। इस पूरे अभियान का सबसे प्रमुख आकर्षण ‘श्री गुरु रविदास महाराज समरसता यात्रा’ होगी। यह यात्रा 5 अक्टूबर को पंजाब के जालंधर से शुरू होगी और 5 नवंबर को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में समाप्त होगी।
18 राज्यों में हो चुकी है वर्कशॉप
भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य ने बताया कि इस अभियान की तैयारियों के लिए पार्टी अब तक 18 राज्यों में वर्कशॉप आयोजित कर चुकी है।
उन्होंने कहा, ”संत रविदास ने मानव कल्याण, समानता और सामाजिक समरसता के लिए कार्य किया। वे धर्मांतरण के विरोधी थे। उनकी 650वीं जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के जरिए उनके संदेश और विचारों को देशभर के लोगों तक पहुंचाया जाएगा।” आर्य ने यह भी कहा कि समरसता यात्रा का विस्तृत मार्ग (रूट) जल्द घोषित किया जाएगा।
वहीं उत्तर प्रदेश भाजपा के महामंत्री और राज्य में यात्रा के प्रभारी राम प्रताप सिंह चौहान ने कहा कि इस कार्यक्रम का चुनावों से कोई संबंध नहीं है। भाजपा पहले भी संत रविदास जयंती मनाती रही है। लेकिन इस बार इसे बड़े पैमाने पर आयोजित किया जा रहा है।
गौर करने वाली बात है कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले 23 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में संत गुरु रविदास की 647वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने सीर गोवर्धनपुर स्थित संत गुरु रविदास जन्मस्थली मंदिर परिसर से सटे पार्क में संत रविदास की प्रतिमा का अनावरण किया था। इसके साथ ही संत रविदास संग्रहालय (म्यूजियम) की आधारशिला भी रखी थी।
यात्रा के दौरान पंजाब से उत्तर प्रदेश तक के मार्ग में आने वाले गांवों, कस्बों और विशेष रूप से दलित बहुल क्षेत्रों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भाजपा का उद्देश्य इस यात्रा के जरिए संत रविदास के सामाजिक समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना और दलित समाज के बीच अपनी पहुंच को मजबूत करना है।
