कांग्रेस नेताओं की नाराजगी को आचार्य प्रमोद ने बताया ‘डेमोक्रेसी’, संबित पात्रा ने कसा तंज, बोले- ये लोग ‘प्रॉब्लम’ को अलग नाम से पुकारते हैं

पंजाब कांग्रेस में मचे सियासी घमासान के बीच दिल्ली में बैठे पुराने नेताओं की नाराजगी के बाहर आने से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।

Sambit Patra, Acharya Pramod Krishnam
संबित पात्रा (बांए), आचार्य प्रमोद कृष्णम (दाएं)। फाइल/ इंडियन एक्सप्रेस

पंजाब कांग्रेस में मचे सियासी घमासान के बीच दिल्ली में बैठे पुराने नेताओं की नाराजगी के बाहर आने से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। राजनीतिक गलियारों के साथ साथ टीवी डिबेट में भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। समाचार चैनल आजतक के कार्यक्रम हल्ला बोल में कांग्रेस और बीजेपी प्रवक्ताओं के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपने नेताओं की बयानबाजी का बचाव करते हुए कहा कि हमारी पार्टी में लोकतंत्र है इसलिए हर कार्यकर्ता और नेता बेझिझक अपनी बात रख सकता है। जबकि बीजेपी में बोलने की आजादी नहीं है, पार्टी के नेता आंसू बहाते हुए भी कहते हैं कि वह पार्टी के साथ हैं।

चर्चा में उनके साथ बैठे संबित पात्रा की मुस्कुराहट पर आचार्य ने कहा कि पड़ोसियों के घर अशांति होती है तो आपके जैसे विरोधियों को मजा तो आता ही है। इसके जवाब में बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने तंजात्मक लहजे ने कहा कि पहले तो आप स्वीकार नहीं करते हैं कि आपके घर में अशांति है और अगर हम मुस्कुराते हैं तो आपको पीड़ा का अहसास होने लगता है। उन्होंने कांग्रेस नेता के डेमोक्रेसी वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि आप लोग प्रॉब्लम को डेमोक्रेसी के नाम से पुकारते हैं।

संबित पात्रा के अनुसार, कांग्रेस पार्टी के अंदर की कलह इसलिए नहीं सुलझ पा रही है क्योंकि कि वह इसको निपटाने के बजाय बीजेपी पर इसका ठीकरा फोड़ते हैं। उन्होंने दावा किया कि गुरुवार 6 बजे का कार्यक्रम छत्तीसगढ़ के सियासी बवाल पर होगा। उन्होंने कहा कि इनकी डिक्शनरी में कुछ गड़बड़ है, ये प्रॉब्लम को भी डेमोक्रेसी का नाम देते हैं। संबित पात्रा ने कहा कि पिछले दिनों सुष्मिता देव पार्टी छोड़कर गईं थीं, वह तो बीजेपी में नहीं आईं, गोवा के पूर्व सीएम लुईजिन्हो फलेरियो गए तो उन्हें क्यों नहीं रोका गया। आचार्य प्रमोद ने कहा कि बीजेपी के अंदर दहशतगर्दी है और कांग्रेस के अंदर डेमोक्रेसी है।

बताते चलें कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने पार्टी की पंजाब इकाई में मचे घमासान और कांग्रेस की मौजूदा स्थिति को लेकर पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े किए और कहा कि CWC की बैठक बुलाकर इस स्थिति पर चर्चा होनी चाहिए और संगठनात्मक चुनाव कराये जाने चाहिए। उन्होंने कई नेताओं के पार्टी छोड़ने का उल्लेख करते हुए गांधी परिवार पर इशारों-इशारों में कटाक्ष किया कि ‘‘जो लोग इनके खासमखास थे वो छोड़कर चले गए, लेकिन जिन्हें वे खासमखास नहीं मानते वे आज भी इनके साथ खड़े हैं।’’

पूर्व केंद्रीय मंत्री कापिल सिब्बल ने कहा कि मैं निजी तौर पर बात कर रहा रहा हूं और उन साथियों की तरफ बोल रहा हूं जिन्होंने पिछले साल अगस्त में पत्र लिखा था। हम अपने नेतत्व की ओर से अध्यक्ष का चुनाव, CWC और केंद्रीय चुनाव समिति के चुनाव कराने से जुड़े कदम उठाए जाने का इंतजार कर रहे हैं। पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे के बाद पैदा हुई स्थिति को लेकर सिब्बल ने कहा कि इस सीमावर्ती राज्य में ऐसी कोई भी स्थिति नहीं होनी चाहिए जिसका पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और सीमापार के दूसरे तत्व फायदा उठा सकें।

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