बीजेपी शासित सूबों में विरोध के स्वर, यूपी भाजपा उपाध्यक्ष बोले- चुनाव जीतने के लिए मोदी का नाम ही काफ़ी

यूपी में जो माहौल है वो जगजाहिर है। सीएम योगी आदित्यनाथ दिल्ली में आकर पीएम और गृह मंत्री से मुलाकात कर चुके हैं। केंद्र की टीम लखनऊ में डेरा जमाकर बैठी है लेकिन फिर भी बीच का रास्ता नहीं निकल पा रहा है। मोदी-शाह की सबसे बड़ी मुश्किल है कि योगी उनके लिए एक चुनौती बनते जा रहे हैं।

PM MODI, DISSENT IN BJP, UP CM
बीजेपी शासित सूबों में विरोध के स्वर (Photo-I.P.Singh/Twitter)

बंगाल चुनाव में मिली हार के बाद पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी को सूबों से चुनौती मिलने लगी है। बीजेपी शासित सूबों में जो विरोध के स्वर देखने के मिल रहे हैं वो दिल्ली दरबार की चिंता बढ़ाने के लिए काफी हैं। सबसे मुश्किल ये है कि विरोध केवल हिंदी भाषी राज्यों में नहीं है बल्कि दक्षिण तक पहुंच चुका है।

यूपी में जो माहौल है वो जगजाहिर है। सीएम योगी आदित्यनाथ दिल्ली में आकर पीएम और गृह मंत्री से मुलाकात कर चुके हैं। केंद्र की टीम लखनऊ में डेरा जमाकर बैठी है लेकिन फिर भी बीच का रास्ता नहीं निकल पा रहा है। मोदी-शाह की सबसे बड़ी मुश्किल है कि योगी उनके लिए एक चुनौती बनते जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है करि अगर योगी फिर से जीते तो मोदी के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। क्योंकि हिंदू नेता के तौर पर योगी इस समय भाजपा का सबसे लोकप्रिय चेहरा माने जाते हैं। केंद्रीय नेतृत्व की यूपी में पैठ जमाने की तमाम कोशिशों को वो धता बता रहे हैं।

चिंता का सबब केवल इतना ही नहीं है। कर्नाटक में भी सीएम येदियुरप्पा केंद्रीय नेतृत्व को आंखें दिखा रहे हैं। वहां एक धड़ा उनकी खिलाफात में सामने आ चुका है। केंद्रीय नेतृत्व चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा, क्योंकि सीएम लिंगायत समुदाय के बड़े नेता हैं। उन्हें नाराज करने का मतलब होगा इस समुदाय को नाराज करना। कर्नाटक बीजेपी के लिए अहम इस वजह से भी है क्योंकि दक्षिण में ये अकेला राज्य है जहां बीजेपी अपने दम पर खड़ी है।

पीएम के गृह जिले गुजरात के हालाकत भी ठीक नहीं हैं। वहां सीएम विजय रूपाणी और पार्टी अध्यक्ष सीआर पाटिल के बीच सिर फुटौव्वल चल रही है। पाटिल को मोदी का नजदीकी माना जाता है। कोरोना मामले पर सीएम के साथ उनकी तनातनी अब जगजाहिर हो चुकी है। केंद्रीय नेतृत्व के लिए ये बड़ी चिंता का सबब है। दोनों की तनातनी में गुजरात के डिप्टी सीएम नितिन पटेल अपने लिए मौका तलाश रहे हैं। वो सीएम बनने के लिए गुणाभाग कर रहे हैं।

उधर, गोवा में बीजेपी के नेता और सीएम प्रमोद सावंत के खिलाफ उनकी ही कैबिनेट ने मोर्चा खोल रखा है। गोवा में भी उत्तर प्रदेश के साथ अगले साल चुनाव होना है। केंद्र ने वहां के हालात सुधारने का जिम्मा बीएल संतोष को दिया है। नतीजा देखना रोचक होगा।

बंगाल में हार के बाद किस तरह की भगदड़ बीजेपी में मची है, ये बात जगजाहिर हो चुकी है। बीजेपी चाहकर भी अपने लोगों को रोकने में नाकाम साबित हो रही है। त्रिपुरा में भी हालात काबू से बाहर होते जा रहे हैं। मध्य प्रदेश में भी हालात ठीक नहीं हैं। बंगाल से मात खाकर लौटे कैलाश विजय वर्गीय के बारे में कहा जा रहा है कि वो शिवराज को हटाकर खुद सीएम बनने के जुगाड़ में हैं। हालांकि बीजेपी के एक राष्ट्रीय उपाध्य़क्ष का दावा है कि असंतोष से कोई फर्क नहीं पड़ता। चुनाव जीतने के लिए पीएम का नाम ही काफी है।

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