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एक्‍सेल शीट में अम‍ित शाह और नरेंद्र मोदी को सौंपी गई थी मंत्र‍ियों की अप्रेजल ग्रेड‍िंग, उसी के आधार पर हुआ हटाने का फैसला

मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के दौरान मंत्रालयों के कामकाज के अलावा पार्टी और सरकार द्वारा चलाई गई मुहिम में मंत्रियों की सक्रियता को भी देखा गया है।
अमित शाह ने सभी मंत्रियों के काम के आधार पर उनके नाम के आगे बने कॉलम में ‘पॉजिटिव’ और ‘निगेटिव’ रिमार्क्स की ग्रेडिंग दी थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (3 सितंबर) को अपने मंत्रिपरिषद में फेरबदल करने जा रहे हैं। इस फेरबदल में पीएम मोदी जहां कुछ नए चेहरों को अपनी टीम में शामिल करेंगे, वहीं कुछ मंत्रियों की छुट्टी भी की जा रही है। अभी तक चार मंत्री इस्तीफा दे चुके हैं। माना जा रहा है कि कुल नौ लोगों को मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है लेकिन मंत्रियों की छुट्टी से पहले कॉरपोरेट स्टाइल में काम करते हुए सभी मंत्रियों की अप्रेजल रिपोर्ट एक्सेल शीट में बनाई गई थी। एनडीटीवी के मुताबिक इस एक्सेल शीट पर सभी मंत्रियों के काम के आधार पर उनके नाम के आगे बने कॉलम में ‘पॉजिटिव’ और ‘निगेटिव’ रिमार्क्स की ग्रेडिंग दी गई थी।

सभी मंत्रियों के नाम और उसके काम की ग्रेडिंग वाली एक्सेल शीट बाद में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपी गई थी। इसके आधार पर ही कैबिनेट में फेरबदल की योजना को मूर्तरूप दिया जा रहा है। इस एक्सेल शीट में भाजपा कोटे के अलावा एनडीए के सहयोगी दलों के मंत्रियों की भी ग्रेडिंग की गई है। बता दें कि इसकी शुरुआत अमित शाह ने 21 अगस्त को की थी, जब उन्होंने चेन्नई दौरा टाल दिया था और पार्टी मुख्यालय में सबसे पहले कौशल विकास मंत्री राजीव प्रताप रूढी और मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री उपेन्द्र कुशवाहा से मुलाकात की थी और उनके कामकाज की समीक्षा की थी।

मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के दौरान मंत्रालयों के कामकाज के अलावा पार्टी और सरकार द्वारा चलाई गई मुहिम में मंत्रियों की सक्रियता को भी देखा गया है। मसलन इस बात पर भी चर्चा हुई कि कोई भी मंत्री संकल्प यात्रा, तिरंगा यात्रा, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्मशती समारोह या तीन साल बेमिसाल जैसे कार्यकर्मों में कितना अधिक सक्रिय दिखा और कितनी तत्परता से जनता के बीच सरकार की उपलब्धियों का लेखा-जोखा पेश किया।

सूत्रों के मुताबिक, अधिकांश मंत्रियों ने अपनी समीक्षा नहीं की थी, उनके नाम के आगे पार्टी अध्यक्ष ने पिंक स्लिप चिपकाया था। इनमें से कुछ मंत्रियों को सरकार से हटाकर संगठन के काम में लगाने की बात हो रही है। ताकि मिशन 2019 और आगामी विधान सभा चुनावों की तैयारियां की जा सके। समीक्षा रिपोर्ट में फेल होनेवालों में सबसे पहला नाम राजीव प्रताप रूढी का है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट कौशल विकास और स्किल इंडिया निर्धारित लक्ष्य और सफलता नहीं पा सका। रूढी को इसकी कमान सौंपी गई थी। रूढी बिहार के छपरा लोकसभा सीट से सांसद हैं। सूत्रों का कहना है कि बिहार के ही नवादा संसदीय सीट से आनेवाले राज्यमंत्री गिरिराज सिंह के काम से भी अमित शाह खुश नहीं हैं। सिंह फायरब्रांड नेता हैं और अपने बयानों से अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। हालांकि, वो सरकार में रहेंगे या बाहर जाएंगे, अभी तक इसका फैसला नहीं हो सका है। सुरेश प्रभु हाल की रेल घटनाओं से दुखी होकर नैतिक आधार पर खुद इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं।

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