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अमित शाह ने गांधीनगर से किया नामांकन, एक तरफ बैठे थे अरुण जेटली और एक तरफ राजनाथ सिंह

भाजपा के वरिष्ठ नेता एल के आडवाणी 6 बार से गांधीनगर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। अब एल के आडवाणी का टिकट काटकर अमित शाह को गांधीनगर से टिकट दिया गया है।

Amit Shahअमित शाह गांधीनगर में रोडशो के दौरान। (AP Photo/Ajit Solanki)

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार को गांधीनगर लोकसभा सीट से नामांकन पत्र दाखिल किया। केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी इस दौरान मौजूद थे। भाजपा प्रमुख ने गांधीनगर जिला कलेक्टर और रिर्टिनंग अधिकारी एस के लंगा को अपना नामांकन पत्र सौंपा । इससे पहले दिन में शाह ने अहमदाबाद में राजग नेताओं के साथ विजय संकल्प सभा को संबोधित किया और एक रोड शो भी किया। यह रोड शो करीब 5-6 किलोमीटर लंबा था और लगभग 2 घंटे तक चला। अमित शाह के रोड शो के दौरान ढोल-नगाड़ों के साथ भारी भीड़ जुटी। गौरतलब है कि छह बार से भाजपा के वरिष्ठ नेता एल के आडवाणी गांधीनगर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। अब एलके आडवाणी का टिकट काटकर अमित शाह को गांधीनगर से टिकट दिया गया है।

ठाकरे बोले ‘हिंदुत्व हमें बांधता है’: विजय संकल्प सभा के दौरान शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि भाजपा और उनकी पार्टी के बीच मतभेद थे लेकिन अब वे हल हो गए हैं। ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि विपक्ष के पास कोई ऐसा चेहरा नहीं है जो उनकी बराबरी कर सके। ठाकरे ने कहा, ” इस पर कई लोग सवाल करेंगे कि मैं यहां क्यों हूं…कई लोग खुश हैं कि मैं यहा हूं लेकिन कुछ लोगों को इससे तकलीफ जरूर होगी ।” उन्होंने कहा, ‘‘ कई लोग इस बात की खुशी मना रहे थे कि एक जैसी विचारधारा वाली पार्टियां आपस में लड़ रही हैं। हमारे बीच कुछ मनमुटाव और मतभिन्नता थी। लेकिन जब अमित शाह मेरे घर आए और हमने बैठकर बातचीत की, सब हल हो गया।” ठाकरे ने कहा, “हमारे समान लक्ष्य हैं। हमारी विचारधारा और दिल एक साथ बंधे है। हम एकसाथ इसलिए आए हैं क्योंकि ‘हिन्दुत्व’ ही है जो हमें बांधता है।”

भाजपा का गढ़ रही है गांधीनगर सीटः गुजरात की गांधीनगर सीट पिछले करीब 30 सालों से भाजपा का गढ़ रही है। साल 1989 में भाजपा नेता शंकर सिंह वाघेला यहां से सांसद चुने गए थे। उसके बाद साल 1991 में हुए आम चुनावों में आडवाणी इस सीट से चुनाव लड़े और जीत हासिल की। 1996 के लोकसभा चुनावों में अटल बिहारी वाजपेयी भी यहां से चुनाव लड़े और जीते। 1998 में एक बार फिर आडवाणी इस सीट से चुनाव लड़े और जीते और 2014 के लोकसभा चुनावों तक वहीं इस सीट से जीतते आ रहे थे। यही वजह है कि गांधीनगर को भाजपा का गढ़ माना जाता है। अब अमित शाह के लिए भी यह सुरक्षित सीट मानी जा रही है। एलके आडवाणी ने जब गांधीनगर से नामांकन किया था, तब अमित शाह ही उनके चुनाव प्रभारी थे।

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