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भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह को पहली बार लग रहा बगावत का खतरा, कर रहे निपटने की तैयारी

भाजपा की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी में 105 सदस्‍य हैं। लेकिन इसकी बैठक में 80 और सदस्‍यों को बुलाए जाने का अनुमान है। ये सभी आमंत्रित सदस्‍य के तौर पर बुलाए जाएंगे। शाह के इस कदम को आडवाणी, यशवंत सिन्‍हा, मुरली मनोहर जोशी और शांता कुमार जैसे नेताओं द्वारा उठाए गए बगावती सुर से निपटने के उपाय के तौर पर देखा जा रहा है।

Author नई दिल्‍ली | December 4, 2015 12:35 PM
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भाजपा का अध्‍यक्ष बनने के बाद से पहली बार अमित शाह को अपने खिलाफ बगावती तेवर दिखने का खतरा लग रहा है। इस खतरे को भांपते हुए उन्‍होंने इससे निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। उन्‍हें आशंका है कि लालकृष्‍ण आडवाणी सहित पार्टी के वरिष्‍ठ नेता दिल्‍ली और बिहार में भाजपा की हार और गुजरात के ग्रामीण इलाकों में पार्टी की जमीन खिसकने को लेकर बगावती तेवर दिखा सकते हैं। ऐसे में अमित शाह अगले साल दूसरी बार अध्‍यक्ष बनने के लिए अपनी स्थिति मजबूत करने में जुट गए हैं। पार्टी के बड़े ओहदों पर बैठे सूत्र बताते हैं कि इसी कवायद के तहत राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में 80 नेताओं को आमंत्रित सदस्‍य के तौर पर बुलाए जाने की तैयारी है।

भाजपा की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक इसी महीने कोलकाता में बुलाई जा सकती है। अमित शाह इस बैठक की तैयारियों में आजकल व्‍यस्‍त हैं। इससे जुड़े भाजपाइयों को डर है कि बैठक में दिल्‍ली और बिहार की हार के साथ-साथ हाल में गुजरात निकाय चुनावों के नतीजों पर भी चर्चा होगी। गुजरात में अाए नतीजों के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा की पैठ कम हुई है। सूत्र बताते हैं कि बैठक के एजेंडे में ‘कोर्स करेक्‍शन’ को शामिल नहीं किया गया है।

भाजपा की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी में 105 सदस्‍य हैं। लेकिन इसकी बैठक में 80 और सदस्‍यों को बुलाए जाने का अनुमान है। ये सभी आमंत्रित सदस्‍य के तौर पर बुलाए जाएंगे। शाह के इस कदम को आडवाणी, यशवंत सिन्‍हा, मुरली मनोहर जोशी और शांता कुमार जैसे नेताओं द्वारा उठाए गए बगावती सुर से निपटने के उपाय के तौर पर देखा जा रहा है। इन चार नेताओं ने पिछले महीने लिखित बयान जारी कर मांग की थी कि बिहार में भाजपा की हार के लिए जिम्‍मेदारी तय की जाए। बता दें कि बिहार में चुनाव प्रचार का जिम्‍मा खुद अमित शाह ने संभाल रखा था।

पार्टी के सूत्र बताते हैं कि अमित शाह की सबसे बड़ी शक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उनमें जताया गया विश्‍वास है। एक सूत्र ने कहा, ‘जब तक प्रधानमंत्री अमित शाह के खिलाफ नहीं जाते हैं तब तक वरिष्‍ठ नेताओं की मांग पर कोई सुनवाई नहीं होगी।’ इसके अलावा शाह ने आरएसएस नेताओं को भी विश्‍वास में ले रखा है। सूत्र बताते हैं कि शाह ने इस बारे में कई तर्क दिए हैं कि जब भाजपा विपक्ष में थी तो पार्टी ने इन वरिष्‍ठ नेताओं की कई नाकामियों को पचाया है। सूत्र बताते हैं कि शाह दूसरी बार भी भाजपा अध्‍यक्ष बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओड़‍िशा विधानसभा चुनावों की तैयारी भी कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि निजी बातचीत में शाह बिहार में भारी हार की बात मानते हैं, लेकिन जिन राज्‍यों में भाजपा का कोई आधार नहीं है, वहां पार्टी की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की उनकी मुहिम में जरा भी सुस्‍ती दिखाई नहीं देती है।

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