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2019 फतह के लिए क्या है अमित शाह का मिशन 22 करोड़, विरोधियों को चित करने के लिए नई मुहिम

पार्टी के एक नेता ने कहा, "22 करोड़ परिवार मतलब एक बड़ा वोटर वर्ग होता है, यदि हम इसके आधे परिवार के सदस्यों को भी वोट में बदलने में कामयाब होते हैं, तो हमारा काम समझिए हो गया, और हमलोग इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, आप जानते हैं अमित भाई कैसे काम करते हैं।"

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह 31 जुलाई को दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए (फोटो- पीटीआई)

2019 लोकसभा चुनाव से पहले अमित शाह एक नये डेटा के साथ तैयार बैठे हैं। ये डेटा है 22 करोड़ का। 22 करोड़ का ये अंक बीजेपी के लिए वोटों की उम्मीद है। दरअसल ये 22 करोड़ का आंकड़ा देश के वो परिवार हैं जिनके बारे में बीजेपी का दावा है कि उन्हें नरेंद्र मोदी सरकार की किसी ना किसी योजनाओं का फायदा मिला है। अब आगामी चुनाव में पार्टी इस आंकड़े को वोट में बदलना चाहती है। अमित शाह ने पार्टी को कहा है कि वे इन सभी 22 करोड़ परिवार तक पहुंचे, अमित शाह के मुताबिक चुनाव के दौरान ये परिवार सरकार के समर्थक साबित हो सकते हैं। 2019 के चुनाव उस जमाने में हो रहा है, जहां डाटा को ‘तेल’ का नया अवतार माना जाता है। बीजेपी इन सभी 22 करोड़ परिवार के आंकड़ों को खंगाल रही है और उसका अध्ययन कर रही है। इस डाटा को ब्रेक डाउन कर पोलिंग बूथ लेवल पर लाया जा रहा है। टेलिग्राफ इंडिया डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक हर राज्य में एक मॉनिटरिंग सेल बनाया जाएगा, इसके बाद पार्टी कैडर को इन परिवारों से लगातार संपर्क में रहने को कहा जाएगा।

एक सूत्र ने कहा कि केंद्र की योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों का आंकड़ा कितना महत्वपूर्ण है इस बात का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि 28 अगस्त को बीजेपी के मुख्यमंत्रियों की एक बैठक दिल्ली में बुलाई गई है। एक मीटिंग में मुख्यमंत्रियों में केन्द्र की योजना के लाभार्थियों की सूची एक पेन ड्राइव में लेकर आने को कहा गया है। बता दें कि बीजेपी का 15 राज्यों में प्रत्यक्ष रूप से शासन है, जबकि चार राज्यों में उसके डिप्टी सीएम हैं, या फिर सत्ता में उसकी भागीदारी है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि इस मीटिंग में केन्द्र की योजना के कार्यान्वयन में राज्य कितना सफल रहे इस पर मैराथन चर्चा होगी।

इन योजना के लाभार्थियों तक पहुंचने की जिम्मेदारी बीजेपी के सहयोगी संगठनों को दी गई है। पार्टी ने एक नया नारा तैयार किया है, ‘हर बूथ, 20 यूथ’। इसके तहत हर पोलिंग स्टेशन के लिए 20 युवा तैयार किये जाएंगे जिनका काम केन्द्र की योजना के लाभार्थियों से लगातार संपर्क बनाये रखना होगा। पार्टी के एक नेता ने कहा, “22 करोड़ परिवार मतलब एक बड़ा वोटर वर्ग होता है, यदि हम इसके आधे परिवार के सदस्यों को भी वोट में बदलने में कामयाब होते हैं, तो हमारा काम समझिए हो गया, और हमलोग इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, आप जानते हैं अमित भाई कैसे काम करते हैं।”

2019 के चुनाव में 2014 से भी बड़ी जीत के अमित शाह के दावे और बुलंद आत्मविश्वास पर पार्टी के नेता कहते हैं कि इसके पीछे 22 करोड़ परिवारों का गणित और बीजेपी के 11 करोड़ कार्यकर्ताओं का समर्थन है। बता दें कि बीजेपी दावा करती है कि 11 करोड़ सदस्यों के साथ वह दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है। बीजेपी के नेता कहते हैं कि बीजेपी ने पहली बार 282 सीट अपने दम पर जीते जब पार्टी 17 करोड़ वोट हासिल किये। ये आंकड़ा 2014 में भारत में कुल पड़े 55 करोड़ वोटों का लगभग 31 फीसदी है। बीजेपी नेता कहते हैं, “इस अंकगणित के अलावा शाह का मानना है कि पीएम मोदी की निजी लोकप्रियता, मतदाताओं के साथ उनका जुड़ाव, अगर इन सब चीजों का को जोड़ दिया जाए तो बीजेपी को कुल वोटों का 50 फीसदी मत तो मिल ही जाएगा।”

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