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NRC ड्राफ्ट से गायब हिंदुओं को बसाने की तैयारी में है भाजपा!

भाजपा उन हिंदुओं को सहायता उपलब्ध करवाने की तैयारी कर रही हैं, जिनका नाम एनआरसी ड्राफ्ट की फाइनल सूची में नहीं आ पाएगा।

असम के मोरीगांव में एनआरसी के अंतिम ड्राफ्ट में अपना नाम चेक करने के लिए कतार में खड़े लोग (फोटो-पीटीआई)

एनआरसी ड्राफ्ट के बाद असम के 40 लाख लोगों की नागरिकता पर सवाल खड़ा हो गया है। वहीं, इस मामले में भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनकी पार्टी उन हिंदुओं को सहायता उपलब्ध करवाने की तैयारी कर रही हैं, जिनका नाम एनआरसी ड्राफ्ट की फाइनल सूची में नहीं आ पाएगा। हफपोस्ट के अनुसार, भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता ने बताया कि, “हम स्पष्ट कर रहे हैं कि हिंदू अप्रवासियों को पहले आश्रय शिविरों में रखा जाएगा और फिर बुनियादी ढ़ाचा तैयार कर उनका पुर्नवास किया जाएगा। यदि आसाम के लोग किसी तरह का मुद्दा बनाते हैं तो उन्हें दूसरे राज्यों में भेजा जाएगा।” एक अन्य भाजपा कार्यकर्ता ने बतया कि, “सरकार एनआरसी को लेकर जिसमें तीन चरण हैं, पहला पहचान करना, दूसरा मतदाता सूची से नाम हटाना और तीसरा निर्वासन है, को लेकर जल्दबाजी में नहीं है। अभी पहला चरण ही हुआ है, जिसमें लोगों की पहचान की गई है। यह सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि है क्योंकि पूर्ववर्ती कांग्रेस और असम गण परिषद की सरकार ने ऐसा नहीं किया।”

वहीं, दूसरी ओर भाजपा के महासचिव राम माधव पार्टी के संदेश को हर घर तक पहुंचाने के लिए टेलीविजन चैनलों पर इंटरव्यू दिया। माधव ने कहा, “कोई देश अपनी सीमाओं में अवैध घुसपैठ की अनुमति नहीं देता है। हम तीन दशकों से अधिक समय से इस समस्या को झेल रहे हैं। अब भारत इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता है, इस प्रकार का अवैध घुसपैठ अब आगे नहीं होना चाहिए।” साथ ही इस मौके पर माधव ने इस आरोप को खारिज कर दिया कि बीजेपी सांप्रदायिक है। उन्होंने कहा कि, “यह हिंदुओं या मुस्लिमों के बारे में नहीं है। यह उन बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर है जो यहां के बड़े भू-भाग पर कब्जा कर रहे हैं।”

वहीं, तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस पूरे मामले का विरोध कर रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस प्रक्रिया से “रक्तपात और गृहयुद्ध” हो जाएगा। बनर्जी ने कहा कि बीजेपी हिंदू-मुस्लिम आधार पर बंगाली भाषी लोगों के बीच विभाजन कर रही है। बीजेपी का लंबे समय से यह स्टैंड रहा है कि हिंदू आप्रवासियों को “शरणार्थियों” के रूप में दर्जा दिया जाना चाहिए, जो धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए कथित रूप से भारत चले गए थे। वहीं, जबकि मुस्लिम “घुसपैठिए” थे जिन्हें निष्कासित किया जाना चाहिए। भाजपा सरकार की नीति बांटो और और करो की है।

बता दें कि एनआरसी की सूची जारी होने के बाद संसद में भी हंगामा हुआ। हालांकि, इस मुद्दे पर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह ड्राफ्ट सूची है, अंतिम सूची नहीं है। अगर किसी का नाम फाइनल लिस्ट में नहीं आता है वे भी वह विदेशी न्यायाधिकरण में जा सकता है। किसी के विरूद्ध बलपूर्वक कार्रवाई नहीं की जाएगी। कुछ लोग डर का माहौल पैदा कर रहे हैं। गलत सूचना नहीं फैलानी चाहिए।

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