बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी नई टीम का ऐलान कर दिया है। नई टीम में आम आदमी पार्टी से आए राज्यसभा सांसद संदीप पाठक को भी जगह मिली है। जब अप्रैल में आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसद बीजेपी में शामिल हुए, तो इसे अरविंद केजरीवाल की पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना गया। संदीप पाठक AAP के 7 राज्यसभा सांसदों के साथ बीजेपी में आए थे। संदीप पाठक को राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है, जिससे AAP के पुराने रणनीतिकार को फिर से संगठन में लाया गया है।

यह नियुक्ति खास तौर पर इसलिए ज़रूरी है क्योंकि पंजाब, जहां संदीप पाठक ने AAP के शानदार 2022 चुनाव प्रचार को बनाने में मदद की थी, वहां फिर विधानसभा चुनाव नजदीक है। बीजेपी अब शहरी इलाकों से आगे बढ़ना चाह रही है जहां वह पारंपरिक रूप मज़बूत रही है। ऐसे में उसे संदीप पाठक की समझ काम आ सकती है।

कौन हैं संदीप पाठक?

संदीप पाठक भारतीय राजनीति में एक अनोखी हस्ती हैं। फुल-टाइम राजनीति में आने से पहले, वह एक एकेडमिक और रिसर्चर थे। छत्तीसगढ़ में जन्मे संदीप पाठक ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से PhD समेत हायर रिसर्च करने से पहले साइंस की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने ऑक्सफ़ोर्ड और MIT में रिसर्च एसोसिएट के तौर पर काम किया और बाद में IIT दिल्ली में फैकल्टी मेंबर के तौर पर शामिल हुए, जहां उनकी रिसर्च फोटोवोल्टिक टेक्नोलॉजी पर फोकस थी।

हालांकि, उनकी राजनीतिक तरक्की काफी हद तक लाइमलाइट से दूर काम करने से हुई। संदीप पाठक AAP के मुख्य बैकरूम स्ट्रैटेजिस्ट में से एक के तौर पर उभरे, जिन्होंने डेटा, सर्वे, बूथ-लेवल की जानकारी और ग्राउंड फीडबैक पर बहुत ज़्यादा भरोसा करने के लिए नाम कमाया। वह अरविंद केजरीवाल और दिल्ली से बाहर पार्टी का संगठन बनाने की पार्टी की कोशिशों से करीब से जुड़ गए। उन्हें सबसे बड़ी कामयाबी पंजाब में मिली।

AAP की पंजाब जीत में निभाई बड़ी भूमिका

2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव ने AAP को एक बड़ी चुनौती से राज्य की रूलिंग पार्टी में बदल दिया। पार्टी ने 117 असेंबली सीटों में से 92 सीटें जीतीं और भगवंत मान को मुख्यमंत्री बनाया। संदीप पाठक को उस कैंपेन में पर्दे के पीछे अहम रोल निभाने का क्रेडिट दिया गया। उनका तरीका एक आम मास पॉलिटिशियन से अलग था। वह वोटर्स की चिंताओं को पहचानने और पार्टी के कैंपेन को तेज़ करने के लिए सर्वे, चुनाव क्षेत्र-लेवल के असेसमेंट और संगठनात्मक फीडबैक का इस्तेमाल करने के लिए जाने जाते थे। उस समय की रिपोर्ट्स में उन्हें AAP की पंजाब जीत के पीछे के मुख्य रणनीतिकार में से एक बताया गया था।

इस सफलता ने AAP में उनकी हैसियत को तेज़ी से बढ़ा दिया। 2022 में उन्हें पंजाब से राज्यसभा भेजा गया। बाद में उन्हें गुजरात की ज़िम्मेदारी दी गई और वे हिमाचल प्रदेश में पार्टी के संगठन काम में भी शामिल थे। दिसंबर 2022 तक AAP ने उन्हें अपना राष्ट्रीय संगठन मंत्री बना दिया था। यह एक ऐसा पद था जो दिखाता था कि पार्टी उनकी काबिलियत पर कितना ज़्यादा निर्भर थी। यही इतिहास उनकी नई BJP भूमिका को खास बनाता है।

BJP ने संदीप पाठक को क्यों चुना?

बीजेपी संदीप पाठक जैसे किसी को लाकर सिर्फ़ राज्यसभा का नंबर हासिल नहीं कर लेती। उसे एक ऐसा पॉलिटिशियन मिलता है जिसने सालों तक यह स्टडी की है कि कैसे एक काफ़ी नई राजनीतिक पार्टी ने एक ऐसे राज्य में एक मज़बूत ज़मीनी मशीन बनाई, जहां दशकों से पुरानी पार्टियां हावी थीं।

यह जानकारी अब खास तौर पर काम की है। अप्रैल में बीजेपी में शामिल हुए AAP के सात राज्यसभा सांसदों में राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, अशोक मित्तल, विक्रमजीत सिंह साहनी, राजिंदर गुप्ता और पाठक शामिल थे। उनका क्रॉसओवर उस समय AAP की राज्यसभा ताकत का दो-तिहाई हिस्सा था और पार्टी के लिए एक बड़ा झटका था।

फिर भी दलबदल के बाद नितिन नवीन की पहली राष्ट्रीय टीम ने सिर्फ़ संदीप पाठक को ही संगठन में पद दिया है। यह फ़र्क मायने रखता है। उदाहरण के लिए राघव चड्ढा एक ज़्यादा जाने-माने पॉलिटिकल कम्युनिकेटर और संसदीय चेहरा हैं। संदीप पाठक की वैल्यू पारंपरिक रूप से अलग रही है। संगठन, रणनीति और इलेक्शन मैनेजमेंट में वह माहिर हैं। इसलिए, उनका अपॉइंटमेंट दलबदल के इनाम से ज़्यादा एक खास पॉलिटिकल स्किल सेट का इस्तेमाल करने की कोशिश जैसा लगता है।

क्या पंजाब बड़ी वजह है?

पंजाब में 2027 में फिर से वोटिंग होनी है और BJP राज्य में एक ज़्यादा मज़बूत स्वतंत्र संगठन बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने हाल ही में अपनी पंजाब यूनिट को नया रूप दिया है, जिसमें कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और AAP से आए कई नेताओं को संगठन में पद मिले हैं।

इससे भी ज़रूरी बात यह है कि बीजेपी ने कहा है कि वह शिरोमणि अकाली दल के साथ अपने पुराने गठबन्धन पर निर्भर रहने के बजाय, सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। इससे यह चुनौती पिछले चुनावों से काफ़ी अलग हो जाती है।

बीजेपी पारंपरिक रूप से पंजाब के शहरी और हिंदू-बहुल इलाकों में ज़्यादा मज़बूत रही है, जबकि अकालियों ने अपने गठबंधन के दौरान एक बड़ा ग्रामीण और सिख राजनीतिक आधार दिया। अगर बीजेपी सभी 117 सीटों पर अकेले लड़ने का इरादा रखती है, तो उसे बूथ-लेवल पर मज़बूत संगठन, लोकल इंटेलिजेंस और राज्य के बिखरे हुए चुनावी माहौल की साफ़ समझ की ज़रूरत है।

बीजेपी इस्तेमाल करेगी संदीप पाठक का अनुभव

यहीं पर AAP के साथ संदीप पाठक का अनुभव काम आता है। उन्होंने अंदर से देखा है कि AAP ने अपना पंजाब नेटवर्क कैसे बनाया, एंटी-इनकंबेंसी और वोटर की नाराज़गी को कैंपेन नैरेटिव में कैसे बदला, और कैंपेन स्ट्रेटेजी को ज़बरदस्त सीटों की गिनती में कैसे बदला।

बीजेपी सिर्फ़ AAP के 2022 के फ़ॉर्मूले को नहीं दोहरा सकती। तब से पंजाब का राजनीतिक माहौल काफ़ी बदल गया है। लेकिन यह समझना कि उस जीत को कैसे अंजाम दिया गया, BJP को अपने मुख्य विरोधी के बारे में जानकारी दे सकता है।

संदीप पाठक का AAP से जाना एक और दलबदल से कहीं ज़्यादा है। AAP के लिए उन्हें खोने का मतलब है अपनी सबसे बड़ी राज्य-स्तरीय चुनावी जीत के पीछे के संगठनात्मक ढांचे से जुड़े लोगों में से एक को खोना। संदीप पाठक, राघव चड्ढा के साथ गए, ऐसे में पार्टी से दो ऐसे लोग चले गए जो पार्टी की 2022 पंजाब रणनीति से करीब से जुड़े थे।

बीजेपी क्या संदेश दे रही?

इस बीच बीजेपी के लिए, उनके अपॉइंटमेंट से एक साफ़ सिग्नल जाता है कि पार्टी रणनीतिकारों का इस्तेमाल करने को तैयार है, भले ही वह उसके पारंपरिक संगठन इकोसिस्टम के बाहर से आए। नितिन नवीन की 65 सदस्यीय वाली टीम में खुद अनुभवी लीडर्स और नए चेहरे हैं, जिसमें 65 में से 51 ऑफिस-बेयरर्स नेशनल टीम में नए हैं। नई टीम को 2029 तक के इलेक्शन साइकिल के लिए BJP की तैयारियों के हिस्से के तौर पर पेश किया गया है।

इस बैकग्राउंड में संदीप पाठक का शामिल होना अलग दिखता है। वह नई टीम में सबसे बड़ा राजनीतिक नाम नहीं हैं। हो सकता है कि वह राष्ट्रीय राजनीति में सबसे ज़्यादा दिखने वाले पुराने AAP लीडर भी न हों। लेकिन वह रणनीतिक रूप से ज़्यादा काम के लोगों में से एक हो सकते हैं। जिस आदमी ने कभी AAP को पंजाब को समझने में मदद की थी, अब उससे उम्मीद की जाएगी कि वह बीजेपी को उसी बैटलफील्ड को समझने में मदद करेगा। 2027 के पंजाब इलेक्शन में एक साल से भी कम समय बचा है। इसलिए संदीप पाठक की नई BJP भूमिका उनके राष्ट्रीय मंत्री के तौर पर उनके पद से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हो सकती है।

यह भी पढ़ें: अमित मालवीय से अलग क्या करेंगे? बीजेपी के नए सोशल मीडिया प्रमुख दीपक म्हास्के ने दिया जवाब

भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को अमित मालवीय की जगह दीपक म्हास्के को पार्टी का नया राष्ट्रीय सोशल मीडिया संयोजक नियुक्त किया। इंडियन एक्सप्रेस के साथ एक इंटरव्यू में म्हास्के ने अपनी भूमिका और पार्टी के लिए अपनी योजनाओं के साथ-साथ अन्य मुद्दों पर भी बात की। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…