असम में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के बीच मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा ने राज्य के बंगाली मूल के मुसलमानों के खिलाफ अपनी बयानबाजी तेज कर दी है। उन्होंने कहा कि मियां समुदाय के लिए कठिनाई पैदा करना उनका काम है। सीएम ने यह भी कहा कि अगर हम जीना चाहते हैं तो अगले तीस सालों तक हमें ध्रुवीकरण की राजनीति करनी होगी।

असम के मुख्यमंत्री ने बुधवार को कहा कि राज्य में बांग्लादेशी मियां रहते हैं और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान ऐसे विदेशियों के खिलाफ पांच लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज कराई हैं। शिवसागर जिले के डेमो में एक आधिकारिक समारोह से इतर संवाददाताओं से बातचीत में सीएम ने कहा कि अज्ञात लोग अब यहां से चले गए हैं और अपर असम के विभिन्न जिलों में रह रहे हैं, जहां पांच साल पहले तक ऐसा एक भी संदिग्ध व्यक्ति नहीं रहता था।

सीएम बोले- ऐसे विदेशियों के खिलाफ पांच लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज कराई

सीएम ने कहा, “जो भी शिकायतें आई हैं, वो मेरे आदेश पर आई हैं। मैंने खुद भाजपा के लोगों से कहा है कि वे मियां परिवार के खिलाफ शिकायतें देते रहें। इसमें छिपाने जैसा कुछ नहीं है। मैंने बैठकें की हैं, वीडियो कॉन्फ्रेंस की हैं और लोगों से कहा है कि जहां भी संभव हो, वे फॉर्म 7 भरें। ताकि उन्हें थोड़ी भागदौड़ करनी पड़े, थोड़ी परेशानी हो ताकि वे समझ सकें कि असम के लोग अभी भी जीवित हैं। अगर कांग्रेस को कोई आपत्ति है तो ठीक है।”

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‘असम में बांग्लादेशी मियां आकर रहने लगे’

हिमंता बिस्वा ने कहा, “असम में हम सभी जानते हैं कि बांग्लादेशी मियां यहां आकर रहने लगे हैं। अगर उनमें से किसी को भी एसआर से जुड़ा नोटिस नहीं मिलता है तो इसका मतलब यह होगा कि असम में एक भी विदेशी नहीं है।” मुख्यमंत्री ने कहा, ” भाजपा कार्यकर्ताओं ने किसी के विदेशी होने का संदेह होने पर शिकायत दर्ज कराई है और सरकार या निर्वाचन आयोग इसकी जांच करेगा। अगर हम कोई शिकायत दर्ज नहीं कराते हैं तो कल लोग सवाल उठाएंगे कि विदेशियों के खिलाफ एक भी शिकायत क्यों नहीं दर्ज की गई।”

‘मियां’ मूल रूप से असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक अपमानजनक शब्द है और गैर-बांग्ला भाषी लोग आमतौर पर उन्हें बांग्लादेशी प्रवासी के रूप में पहचानते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईआर के दौरान शिकायत दर्ज कराना असमिया समुदाय का राष्ट्रीय दायित्व है। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ भाजपा की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि हर राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है लेकिन दुर्भाग्य से अन्य दलों ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई। वे यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि कोई बांग्लादेशी नहीं है। भाजपा विदेशियों के खिलाफ है और वह अपने कहे अनुसार काम करती है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “इसलिए, हमारे कार्यकर्ताओं ने पांच लाख से अधिक शिकायतें दर्ज कराई हैं वरना हर कोई हमारा नागरिक बन जाता। कम से कम भाजपा ने असम की रक्षा करने और यह दिखाने की कोशिश की है कि असमिया लोगों ने अभी तक आत्मसमर्पण नहीं किया है।”

बांग्लादेशी मियां अपर असम के विभिन्न जिलों में प्रवेश कर चुके- हिमंता बिस्वा

असम में विधानसभा चुनावों से पहले किए गए विशेष पुनरीक्षण के बाद पिछले साल 30 दिसंबर को प्रकाशित ड्राफ्ट लिस्ट में राज्य में मतदाताओं की संख्या में 1.35 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। हिमंता ने दावा किया कि हाल के सालों में बांग्लादेशी मियां अपर असम के विभिन्न जिलों में प्रवेश कर चुके हैं। उन्होंने कहा, “दुलियाजान के लोगों ने मुझसे शिकायत की है कि बांग्लादेशी मियां वहां घुस आए हैं। मार्गेरिटा में भी यही हाल है। आपने गोलाघाट के सरूपथर में हमारा बेदखली अभियान देखा है। लगभग पांच साल पहले तक अपर असम सुरक्षित था। लेकिन अब धीरे-धीरे यह सुरक्षा नदारद होती जा रही है।”

सीएम सरमा ने दावा किया कि तिनसुखिया जिले में अज्ञात लोग अधिक जमीन खरीद रहे हैं और हिंदू अधिक जमीन बेच रहे हैं। उन्होंने कहा, “एक समय था जब हम सोचते थे कि तिनसुखिया में हिंदी और बांग्ला भाषी लोग रहते हैं लेकिन वहां भी ये अज्ञात बांग्लादेशी मियां आ गए हैं। ऐसे में आज के समय में असम का कोई भी स्थान और कोई भी जिला सुरक्षित नहीं है।”

(भाषा के इनपुट के साथ)