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भाजपा संसदीय बोर्ड करेगा बिहार के मुख्यमंत्री पद के दावेदार पर फैसला

भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने कहा है कि बिहार में मुख्यमंत्री पद के लिए किसी को दावेदार बनाए जाने के मुद्दे पर जल्दी ही भाजपा का संसदीय बोर्ड फैसला करेगा..

Author नई दिल्ली | September 6, 2015 14:57 pm
राजनाथ सिंह ने बताया, ‘‘हमारा संसदीय बोर्ड इस बात पर फैसला करेगा कि किसी को मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में उतारना चाहिए या नहीं।’’ (पीटीआई फाइल फोटो)

भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने आज कहा है कि बिहार में मुख्यमंत्री पद के लिए किसी को दावेदार बनाए जाने के मुद्दे पर जल्दी ही भाजपा का संसदीय बोर्ड फैसला करेगा। सिंह ने बताया, ‘‘हमारा संसदीय बोर्ड इस बात पर फैसला करेगा कि किसी को मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में उतारना चाहिए या नहीं।’’

जब उनसे पूछा गया कि पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी तो गृहमंत्री ने कहा कि गठबंधन के सहयोगियों के साथ चर्चाएं जारी हैं और जल्दी ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

बिहार में संभावनाओं के बारे में गृहमंत्री ने कहा कि जदयू, राजद और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों के एकजुट होकर बनाए गए गठबंधन की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हमारा एक बेहद विश्वसनीय (भाजपा, लोजपा, मांझी और अन्य का) गठबंधन है।’’

हाल ही में सपा यह कहकर महागठबंधन से बाहर हो गई कि सीट बंटवारे के मुद्दे पर बड़े सहयोगियों द्वारा उसके साथ विचार विमर्श न किए जाने पर वह ‘अपमानित’ महसूस कर रही है।

सपा के नेताओं ने कहा था कि मुलायम को बिहार में उस कांग्रेस के साथ खड़ा दिखना सहज नहीं लग रहा था, जो कि उत्तरप्रदेश की राजनीति में उसकी प्रतिद्वंद्वी है। वहीं जदयू और राजद की उत्तरप्रदेश की राजनीति में कोई विशेष भूमिका ही नहीं है। चुनावी रैलियों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ दिखाई देना सपा समर्थकों को अच्छा नहीं लगेगा।

सपा कथित तौर पर इस बात को लेकर नाराज थी कि उसे 243 सदस्यीय विधानसभा में बड़े सहयोगियों द्वारा महज पांच ही सीटें दी गई थीं। सपा, राजद, जद(यू), जद(एस), इनेलो और समाजवादी जनता पार्टी ने इस साल अप्रैल में एक विलय की घोषण की थी उन्होंने कहा था कि बिहार चुनाव के बाद इसे औपचारिक रूप दे दिया जाएगा।

243 सदस्यीय बिहार विधानसभा का कार्यकाल 29 नवंबर को पूरा होगा। निर्वाचन आयोग अगले कुछ दिनों में बिहार विधानसभा के बेहद चर्चित चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है।

10 साल तक राज्य की सत्ता संभाल चुके नीतीश कुमार राजद और कांग्रेस के साथ गठबंधन करते हुए तीसरे कार्यकाल की उम्मीद लगाए हुए हैं। जून 2013 में वह भाजपा के साथ अपने 17 साल पुराने रिश्ते तोड़ते हुए राजग से बाहर हो गए थे।

राम विलास पासवान की लोजपा और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी के साथ गठबंधन करके लोकसभा चुनाव में लगभग सूपड़ा साफ कर देने वाली भाजपा अपने उस प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीद में है। इसके साथ ही वह चारा घोटाले के दोषी लालू प्रसाद यादव के साथ गठबंधन करने के लिए कुमार की आलोचना कर रही है।

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