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संबित पात्रा: सर्जन जिसने दलितों और एनजीओ को सीढ़ी बनाकर हासिल कर लिया सियासी मुकाम

अरुण जेटली को संबित पात्रा ने अपना राजनीतिक गुरू बनाया। वो कहते हैं कि जेटली ने मुझे सीख दी थी कि डिबेट के दौरान कभी भी कर्कश मत होना और हमेशा शांत रहना। हालांकि, टीवी चैनल्स चिल्लाने को मजबूर करते हैं। पात्रा कहते हैं कि टीवी पर हमेशा फ्रेश दिखना जरूरी है, इसके लिए बेडरूम में ही ट्रेडमिल पर 15 किलोमीटर की दौड़ लगाते हैं, अनुलोम-विलोम करते हैं और लोदी गार्डेन में मॉर्निंग वॉक करते हैं। डिबेट के दौरान वो अक्सर एक बड़े गिलास में मिक्स्ड फ्रूट जूस लेते हैं और मुलेठी चूसते हैं।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा (PTI File Photo)

भारतीय जनता पार्टी के सबसे प्रभावशाली और तेज-तर्रार प्रवक्ताओं में संबित पात्रा का नाम शुमार किया जाता है। अपने दमदार तर्कों से वो टीवी चैनलों पर होने वाले डिबेट में विरोधियों पर हावी रहते हैं। बीते दिनों उन्हें मोदी सरकार ने ओएनजीसी के निदेशक के पद पर उनकी तैनाती की। हालांकि, जून में वो अपनी गलत कारणों से चर्चा में थे। 2 जून को एनडीटीवी की एंकर निधि राजदान ने लाइव शो से पात्रा को भगा दिया था और 11 जून को गलत खबर रिट्वीट कर एनडीटीवी को घेरने की कोशिश में वो खुद फंस गए। पात्रा ने रविवार को टाइम्स ऑफ इस्लामाबाद की एक खबर को रिट्वीट करते हुए एनडीटीवी पर निशाना साधने की कोशिश की थी, जिस पर एनडीटीवी ने उनसे स्पष्टीकरण की मांग की थी।

संबित पात्रा का जन्म झारखंड (तत्कालीन बिहार) के धनबाद में हुआ है। उनकी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा बोकारो के चिन्मया विद्यालय में हुई। स्कूल के दिनों में ही संबित पात्रा स्कूल के संस्थापक और आध्यात्मिक संत स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती से खासे प्रभावित थे। बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक पात्रा ने खुद माना है कि उन्होंने चिन्मयानंद सरस्वती से ही वाक कौशल और वाक पटुता सीखी है। उन्होंने कहा कि उस संत के बोलने की शैली, उनके शब्दों का चयन और उसके प्रभाव से ही मुझमें बोलने की शक्ति पनप सकी। जब पात्रा ओडिशा के वीर सुरेन्द्र साई मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे थे, तभी उन्हें एक वाद-विवाद प्रतियोगिता में ऑल इंडिया मेडिकल साइंसेस (एम्स) नई दिल्ली में सबसे उम्दा वक्ता का खिताब मिला था।

कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज से साल 2002 में एमएस करने के बाद पात्रा ने नई दिल्ली के एक अस्पताल में नौकरी शुरू कर दी। इसके एक साल बाद ही उन्होंने यूपीएससी की मेडिकल परीक्षा पास कर साल 2003 में हिन्दूराव हॉस्पिटल में बतौर डॉक्टर की तैनाती पाई लेकिन बचपन में ही अध्यात्म का पाठ पढ़ने वाले पात्रा ने डॉक्टरी से हटकर राजनीति का ककहरा पढ़ना शुरू कर दिया था। उन्होंने साल 2006 में स्वराज नाम का एक एनजीओ बनाया, जो छत्तीसगढ़ और ओडिशा में गरीबों और दलितों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर काम करता था। जब पात्रा हिन्दूराव अस्पताल में शिफ्ट पूरी कर बाहर आते थे, तब भी कुछ अन्य डॉक्टरों के साथ मिलकर बगल की मलिन बस्ती में जाकर दलितों के बीच फ्री हेल्थ कैम्प चलाया करते थे और उन्हें मुफ्त दवाएं भी देते थे। इसके बाद वो दलितों को अन्य सामाजिक उत्सवों में शामिल करने की योजना पर भी काम करने लगे।

चूंकि पात्रा को राजनीति में आना था, इसलिए वो दलितों के साथ यह कार्य सेवा कम साधन के रूप में ज्यादा करते थे। वो दलितों की सेवा को राजनीति का प्रवेश द्वार मानते थे। इसी क्रम में पात्रा अपने एनजीओ के कार्यों में भाजपा के नेताओं को बुलाने लगे थे। धीरे-धीरे वो भाजपा के नेताओं से अपनी नजदीकियां बढ़ाने लगे। साल 2011 में उन्होंने हिन्दूराव हॉस्पिटल की सर्विस से इस्तीफा दे दिया और सालभर बाद यानी साल 2012 में भाजपा उम्मीदवार के तौर पर कश्मीरी गेट से दिल्ली नगर निगम का चुनाव लड़ा लेकिन, वो चुनाव हार गए। हालांकि, तब तक पार्टी उनकी खूबियों को समझ चुकी थी। उन्हें पार्टी ने दिल्ली प्रदेश का प्रवक्ता बना दिया। 2014 के लोकसभा चुनाव में पात्रा सभी टीवी चैनलों पर भाजपा की बुलंद आवाज बनकर उभरे। इसके बाद वो राष्ट्रीय प्रवक्ता बना दिए गए। बिजनेस स्टैंडर्ड को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “मैंने भी सोचा था कि राजनीति में आने के लिए आपके पास या तो खूब पैसा होना चाहिए या फिर ताकत, लेकिन मेरे पास दोनों में से कुछ भी नहीं है।”

भाजपा के पूर्व प्रवक्ता और मौजूदा केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को संबित पात्रा ने अपना राजनीतिक गुरू बनाया। वो कहते हैं कि जेटली ने मुझे सीख दी थी कि डिबेट के दौरान कभी भी कर्कश मत होना और हमेशा शांत रहना। हालांकि, वो कहते हैं कि वो बहुत शांत नहीं है, उन्हें टीवी चैनल्स चिल्लाने को कहते हैं और मजबूर करते हैं। पात्रा कहते हैं कि मुझे ऐसा करना बुरा लगता है। पात्रा कहते हैं कि टीवी पर हमेशा फ्रेश दिखना जरूरी है, इसके लिए वो अपने बेडरूम में ही ट्रेडमिल पर 15 किलोमीटर की दौड़ लगाते हैं, अनुलोम-विलोम करते हैं और सुबह-सुबह दिल्ली के लोदी गार्डेन में मॉर्निंग वॉक करते हैं। डिबेट के दौरान वो अक्सर एक बड़े गिलास में मिक्स्ड फ्रूट जूस लेते हैं।

पात्रा टीवी चैनलों पर भाग लेने से पहले करीब एक घंटे तक उस बारे में तैयारी करते हैं। लाइव के दौरान उनके कमरे में लगा 22 इंच का एलईडी टीवी म्यूट रहता है। वो कहते हैं कि डिबेट के दौरान बोले जाने वाले वन लाइनर वो खुद तैयार करते हैं ताकि पब्लिक के दिलो-दिमाग पर उसका असर लंबे समय तक रहे।

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