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#MeToo कैंपेन पर बीजेपी सांसद उदित राज ने उठाए सवाल, बोले- गलत प्रथा की शुरुआत है

MeToo campaign: उदित राज ने ट्वीट में लिखा, '#MeTo कैम्पेन जरूरी है लेकिन किसी व्यक्ति पर 10 साल बाद यौन शोषण का आरोप लगाने का क्या मतलब है?'

Author नई दिल्ली | October 9, 2018 1:56 PM
बीजेपी सांसद उदित राज ने मीटू अभियान को सवालों के घेरे में लाने की कोशिश की है।

#MeToo campaign in India: कार्यस्थल पर यौन शोषण के विरोध में #MeToo कैंपेन के जरिए अब भारत में भी महिलाओं ने अपनी आवाज मुखर की है। भारतीय जनता पार्टी के सांसद उदित राज ने मीटू अभियान पर सवाल खड़े किए हैं। उदित राज ने ट्वीट में लिखा, ‘#MeTo कैम्पेन जरूरी है लेकिन किसी व्यक्ति पर 10 साल बाद यौन शोषण का आरोप लगाने का क्या मतलब है ? इतने सालों बाद ऐसे मामले की सत्यता की जांच कैसे हो सकेगा? जिस व्यक्ति पर झूठा आरोप लगा दिया जाएगा उसकी छवि का कितना बड़ा नुकशान होगा ये सोचने वाली बात है। गलत प्रथा की शुरुआत है।’

उन्‍होंने एक और ट्वीट में लिखा, ‘यह कैसे संभव है कि कोई “लिव इन रिलेशन” में रहने वाली लड़की अपने पार्टनर पर कभी भी ‘रेप’ का आरोप लगाकर उस व्यक्ति पर मुकदमा दर्ज करा दे, वो व्यक्ति जेल चला जाए। इस तरह की घटना आए दिन किसी न किसी के साथ हो रहा है। क्या ये अब ब्लैकमेलिंग के लिए नही इस्तेमाल हो रहा है?’

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#MeToo, MeToo campaign in India, bjp mp, udit raj, tanushree dutta, nana patekar, मीटू अभियान, तनुश्री दत्ता, उदित राज लिव इन रिलेशन को लेकर उदित ने यह टिप्पणी की।

समाचार एजेंसी एएनआई ने भी मीटू अभियान पर उदित राज का एक बयान ट्वीट किया। इसके मुताबिक, बीजेपी सांसद ने कहा, ‘आदी महिलाएं दो-चार लाख लेती हैं, पुरुषों पर आरोप लगाती हैं और फिर किसी दूसरे पुरुष को चुन लेती हैं। मैं मानता हूं कि पुरुषों के स्वभाव में ये चीजें हैं, लेकिन क्या महिलाएं पूरी तरह सही हैं? क्या इसका गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता? इसकी वजह से पुरुष की जिंदगी बर्बाद हो जाती है।’

#MeToo, MeToo campaign in India, bjp mp, udit raj, tanushree dutta, nana patekar, मीटू अभियान, तनुश्री दत्ता, उदित राज समाचार एजेंसी एएनआई ने उदित राज का यह बयान ट्वीट किया।

उदित राज के ट्वीट पर कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी। एक यूजर ने कहा कि दलितों के हित में आवाज उठाने का दावा करने वाले नेता बिना जांच एससी-एसटी एक्ट में गिरफ्तारी की मांग तो कर सकते हैं, लेकिन मीटू कैंपेन में 10 साल बाद आवाज उठाने पर उन्हें आरोपी के इमेज की चिंता हो रही है। वहीं, एक यूजर ने कहा कि सच या झूठ का फैसला करने के लिए अदालतें बैठी हैं और इस मुद्दे पर सांसद को जज बनने की आवश्यकता नहीं है। एक अन्य यूजर ने कहा कि अपराध किसी भी तरह से अपराध ही होता है, भले ही वो 10 साल पुराना मामला हो या 50 साल। एक टि्वटर यूजर ने उदित के ट्वीट पर लिखा कि यह कोई गलत प्रथा नहीं है। मुमकिन है कि आरोप लगाने वाले के सामने 10 साल पहले कोई मजबूरी रही हो, जिसकी वजह से उसने उस वक्त आवाज नहीं उठाई।

हालांकि, कुछ कमेंट्स में तनुश्री दत्ता के 10 साल बाद इस मामले पर आवाज उठाने पर भी सवाल खड़े किए। अधिकतर सोशल मीडिया यूजर्स बीजेपी सांसद के इस बयान को नाना-तनुश्री विवाद से ही जोड़कर देख रहे हैं। तनुश्री दत्ता ने हाल ही में एक टीवी इंटरव्यू में आरोप लगाया था कि 2008 में ‘हॉर्न ओके प्लीज’ फिल्म के एक गाने की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने उनके साथ अभद्रता की। नाना पाटेकर ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पाटेकर ने एक्ट्रेस को अपने वकील के जरिए कानूनी नोटिस भी भिजवाया है। वहीं, एक्ट्रेस ने मुंबई पुलिस के पास पाटेकर, कोरियाग्राफर गणेश आचार्य और फिल्म के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। तनुश्री करीब दस साल बाद अमेरिका से भारत लौटी हैं। मीडिया के जरिए उन्‍होंने नाना पोटकर द्वारा यौन शोषण किए जाने का आरोप एक बार फिर सार्वजनिक किया तो कई और महिलाएं धीरे-धीरे सामने आईं और #MeToo हैशटैग के साथ अपने साथ हुई ऐसी कथित घटनाएं सार्वजनिक करने लगीं।

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