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बीजेपी सांसद ने मोदी सरकार के बजट को बताया बकवास, कहा- पेट्रोल, डीज़ल की महंगाई से किसान हलकान

राज्यसभा सांसद ने कहा कि तमिलनाडु के मदुरै के किसान पेट्रोल, डीज़ल व केरोसीन की महंगाई के चलते त्रस्त हैं। किसान अपनी फसलों को जला रहे हैं क्योंकि वो उन्हें बाजार तक ले जाने का खर्च वहन नहीं कर पा रहे हैं।

भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी। फोटो क्रेडट ट्विटर हैंडल @dharma2x

बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने नरेंद्र मोदी सरकार के बजट को बकवास बताकर कहा कि पेट्रोल, डीज़ल की महंगाई से किसान हलकान हो रहा है और सरकार अपनी पीठ ठोकने में व्यस्त है।

राज्यसभा सांसद ने कहा कि तमिलनाडु के मदुरै के किसान पेट्रोल, डीज़ल व केरोसीन की महंगाई के चलते त्रस्त हैं। किसान अपनी फसलों को जला रहे हैं क्योंकि वो उन्हें बाजार तक ले जाने का खर्च वहन नहीं कर पा रहे हैं। सांसद ने कहा कि डीएमकी की स्टालिन सरकार को कुछ चीजों पर से टैक्स हटा देने चाहिए। इससे किसानों को राहत मिलेगी और वो अपना काम काज ठीक से कर सकेंगे।

गौरतलब है कि पेट्रोल-डीजल की महंगाई से हर कोई त्रस्त है। केंद्र सरकार ने यह साफ कर दिया है ये जीएसटी के दायरे में फिलहाल नहीं आने वाले। वहीं अंतराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल के दाम एक दिन की भारी गिरावट के बाद फिर उछल गए हैं। इसके बावजूद राहत की बात यह है कि लगातार चौथे दिन पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर हैं।

देश में सबसे महंगा पेट्रोल राजस्थान के श्रीगंगानगर में है। पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा जारी नए रेट के मुताबिक दिल्ली में इंडियन ऑयल के पंप पर पेट्रोल 101.84 रुपये प्रति लीटर है। यहां डीजल भी 89.87 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। खास बात है कि खेती के सारे काम डीजल से होते हैं।

बात चाहे खेत में पानी लगाने की हो या फिर फसलों को बाजार तक ले जाने की। किसान को हर काम के लिए डीजल पर निर्भर रहना पड़ता है। गांवों में वैसे भी बिजली की सप्लाई भगवान भरोसे ही रहती है। ऐसे में किसान के सारे काम डीजल से ही होते हैं।

विदेशी मुद्रा दरों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत के आधार पर रोज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कीमतों की समीक्षा के बाद रोज़ाना पेट्रोल और डीजल के रेट तय करती हैं। इंडियन ऑयल , भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम रोज़ाना सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल की दरों में संशोधन कर जारी करती हैं। सरकार का तर्क है कि तेल का दामों का नियंत्रण उसके हाथ में नहीं है।

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