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जिस इनकम टैक्स कमिश्नर को मोदी सरकार ने जबरन रिटायर किया उसकी मदद करेंगे बीजेपी सांसद, पीएम को लिखेंगे चिट्ठी

स्वामी के अलावा मोदी सरकार द्वारा पिछले साल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के बोर्ड ऑफ डॉयरेक्टर्स में शामिल किए गए अर्थशास्त्री एस गुरुमूर्ति ने भी एस के श्रीवास्तव के जबरिया रिटारमेंट पर उंगली उठाई है।

Author नई दिल्ली | June 13, 2019 3:56 PM
भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी। (एक्सप्रेस फोटो)

पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ अक्सर मोर्चा खोलने वाले बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने अब नई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। सीतारमण के पद संभालने के बाद लिए गए पहले बड़े फैसले, जिसके तहत इनकम टैक्स के 12 वरिष्ठ अधिकारियों को जबरन रिटायरमेंट दे दिया गया, का भी स्वामी ने विरोध किया है। स्वामी ने कहा है कि वह इनकम टैक्स कमिश्नर रहे संजय कुमार श्रीवास्तव के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और मामले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक भी ले जाएंगे। उन्होंने ट्वीट किया, “मैं एस के श्रीवास्तव का मामला उठा रहा हूं… जो एनडीटीवी की जांच कर रहा था, क्योंकि उसके खिलाफ कोई नया ठोस मामला नहीं है और मैडम सीतारमण ने पी चिदंबरम के समय दर्ज किए गए झूठे मुकदमों पर भरोसा करते हुए और संभवत: एनडीटीवी का पक्ष लेने के लिए उन्हें नौकरी से हटाने का फैसला कर लिया है। पहले मैं पीएम को लिखूंगा।”

स्वामी के अलावा मोदी सरकार द्वारा पिछले साल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के बोर्ड ऑफ डॉयरेक्टर्स में शामिल किए गए अर्थशास्त्री एस गुरुमूर्ति ने भी एस के श्रीवास्तव के जबरिया रिटारमेंट पर उंगली उठाई है। उन्होंने ट्वीट किया है, “जैसी कि रिपोर्ट सुनने में आई है और अगर यह सच है कि संजय श्रीवास्तव एक पूरी तरह से ईमानदार, साहसी आईटी कमिश्नर हैं जिन्होंने NDTV धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है और 15 साल तक पी चिदंबरम से लड़ाई लड़ी है, और सभी उत्पीड़न सहे हैं, उन्हें अनिवार्य तौर पर सेवानिवृत्त किया जा रहा है। इसका मतलब यह है कि लुटियन, पीसी और NDTV लॉबी अभी भी सक्रिय हैं इस सरकार में भी काम कर रहे हैं।”

इन दोनों के अलावा स्वदेशी जागरण मंच के सह संयोजक अश्विनी महाजन ने भी श्रीवास्तव के अनिवार्य रिटायरमेंट पर सवाल खड़े किए हैं। महाजन का आरोप है कि श्रीवास्तव को पी चिंदबरम द्वारा झूठे यौन दुराचार मामले में फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि इस वक्त सरकारी तंत्र द्वारा उन्हें मदद किया जाना चाहिए था लेकिन श्रीवास्तव को गलत तरीके से पद से ही हटा दिया गया। बता दें कि इनकम टैक्स द्वारा ऑपरेशन क्लीन (जिसके तहत 12 अफसरों को अनिवार्य सेवानिवृति दी गई) शुरू करने के करीब दो हफ्ते पहले ही नोएडा में पदस्थापित आईटी कमिश्नर (अपील) एस के श्रीवास्तव के खिलाफ कुल सात मामलों में चार्जशीट दायर कर दी गई थी और जांच के आदेश दे दिए गए थे। यह सभी कार्रवाई 23 मई को हुई, जिस दिन लोकसभा चुनावों के नतीजों का ऐलान हो रहा था।

श्रीवास्तव पर एक महिला आयकर अधिकारी के खिलाफ यौन दुष्कर्म से जुड़े “निंदनीय” आरोप शामिल हैं। इनके अलावा केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ भी झूठी पूछताछ करने और एनडीटीवी और 2जी स्पेक्ट्रम मामलों में चल “निराधार और दुर्भावनापूर्ण” कार्रवाई करने के आरोप हैं। सीबीडीटी ने जवाब देने के लिए उन्हें दो हफ्ते का वक्त दिया था लेकिन 11 जून को विभाग ने उन्हें अनिवार्य सेवानिवृति का आदेश थमा दिया, जबकि उनकी सेवा अभी पांच साल बाकी थी। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि वो सरकारी तंत्र और कानून के तहत ही आगे की कोई कार्यवाही चाहेंगे।

उन्होंने कहा, “मेरी मुश्किलें साल 2006 में तब शुरू हुईं, जब मैंने एनडीटीवी के खिलाफ पहला अप्लिकेशन दायर किया था। इस चैनल के समर्थक हर सरकार में रहे हैं। सरकार ने अब तक मेरे खिलाफ 20 बार जांच बैठाई है और ये चार्जशीट भी उनमें से एक है। हताशा में उन लोगों ने मुझे जबरन रिटायर करने की कोशिश की है लेकिन मेरी जंग जारी रहेगी। साल 2015 का कार्मिक एवं पेंशन मंत्रालय का एक आदेश है जिसमें कहा गया है कि विभागीय पूछताछ से बचने के लिए फौरी तौर पर अनिवार्य सेवानिवृति नहीं दी जा सकती है।”

श्रीवास्तव के अलावा सरकार ने जिन अफसरों को जबरन रिटायर किया है उनमें 1985 बैच के आईआरएस अफसर अशोक अग्रवाल, 1985 बैच के आईआरएस अफसर होमी राजवंश, बीबी राजेंद्र प्रसाद, अजोय कुमार सिंह और बी अरुलप्पा भी शामिल हैं। इनके अलावा आलोक कुमार मित्रा, चन्दर सैनी भारती, अंदासु रविन्दर, विवेक बत्रा, श्वेताभ सुमन और रामकुमार भार्गव का भी नाम है। 2016 में भी मोदी सरकार ने इसी तरह का कदम उठाते हुए राजस्व विभाग के 33 अफसरों को प्री मैच्योर रिटायरमेंट दे दिया था।

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