LAC विवाद के बीच भारतीय स्मार्टफोन पर चीनी गैजेट्स का दबदबा? बोले BJP सांसद- हमें महसूस न हुआ कि दुश्मनों के बनाए फोन क्या कर सकते हैं?

एलएसी पर चीन के साथ तनातनी के बीच चीनी मोबाइल कंपनियों के भारत में बढ़ते दबदबे पर बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सवाल उठाया है। बता दें कि स्वामी हालिया दिनों में कई मामलों पर सरकार की आलोचना करते दिखे हैं।

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तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः एक्सप्रेस आर्काइव/अनस्प्लैश)

एलएसी पर चीन के साथ गतिरोध के बीच देश के स्मार्टफोन बाजार पर चाइनीज कंपनियों का कथित कब्जा लगातार बढ़ता जा रहा है। बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने ऐसे ही डाटा आधारित दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है।

उन्होंने मंगलवार (27 जुलाई, 2021) को ट्वीट कर कहा, “क्यों? हमें अभी तक यह महसूस नहीं हुआ है कि हमारे दुश्मनों द्वारा बनाए गए सेलफोन क्या कर सकते हैं?” दरअसल, स्वामी की यह टिप्पणी एक खबर से जुड़े ट्वीट पर आई, जिसे एक यूजर ने किया। “भारत में 29 फीसदी शेयर के साथ श्याओमी (Xiaomi) की भारतीय स्मार्टफोन बाजार में बढ़त” को लेकर @FedSleuth नाम के हैंडल से कहा गया था, “कोरोना वायरस संकट और लद्दाख में कथित घुसपैठ के बाद भी भारतीय स्मार्टफोन बाजार में चीनी मोबाइल्स का दबदबा बरकरार है।” साझा की गई खबर में ‘Canalys’ के हवाले से दावा किया गया कि जून के मध्य से तीन महीनों में, श्याओमी ने देश में 9.5 मिलियन स्मार्टफोन भारत भेजे, जो साल-दर-साल 77% की वृद्धि है।

वैसे, स्वामी की इस मसले पर प्रतिक्रिया के बाद फॉलोअर्स और अन्य यूजर्स ने उनसे विकल्प भी पूछा। किसी ने चीनी कंपनियों के टक्कर में कोई भी देश के ब्रांड का न होना बताया, तो कुछ लोगों ने कम कीमत और बेहतर क्वालिटी में देसी कंपनियों के स्मार्टफोन का न होने का तंज भी कसा।

@bhardwajkanishq ने जवाब में जब ऑप्शन के बारे में पूछा तो उन्होंने जवाब में गुलामों का सामान्य प्रश्न कहा। @aravindbalan01 नाम के यूजर ने कमेंट कर कहा, “सर, ग्राहकों के लिए बड़ी दुविधा…कीमत और गुणवत्ता के मामले में कोई भी Xiaomi के पास नहीं आ सका…।” इसी बीच, @geoguru70 नाम के हैंडल से लिखा गया, सर, ऐसा लगता है कि आप उन मुट्ठी भर भारतीयों में से एक हैं जो चीनी खतरे को दिन के उजाले की तरह स्पष्ट रूप से देख सकते हैं!

वहीं, @gururaja_rao ने ट्वीट कर कहा कि इस मामले में ज्यादा विकल्प नहीं हैं। @AmoghPratap ने ऑप्शन की कमी की बात करते हुए लिखा- क्योंकि कोई भारतीय ब्रांड उपलब्ध नहीं है, वे प्रतिस्पर्धा के लिए अपना 50 प्रतिशत भी नहीं दे रहे हैं। हो सकता है कि सरकार से विशेष रूप से भारतीय तकनीकी कंपनियों के लिए कुछ समर्थन उन्हें प्रेरित कर सके।

जानकारों की मानें तो मोबाइल के जरिए जासूसी, भारत-चीन सीमा विवाद और कोरोना के बीच चीन की मोबाइल कंपनियों का भारत में दबदबा बढ़ना एक नए खतरे की ओर संकेत दे रहा है। यह खतरे की घंटी ऐसे वक्त पर नजर आ रही है, जब देश में सड़क से लेकर संसद तक पेगासस जासूसी कांड का मुद्दा गर्माया हुआ है, जबकि विस्तारवादी चीन भारतीय सीमा में घुसपैठ/अतिक्रमण की कोशिशों में देखा गया है।

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