भारत चीन संबंधों पर फिर सामने आई BJP सांसद की नाराजगी, कहा- जब कोई आया ही नहीं तो बातचीत क्यों?

सुब्रमण्यम स्वामी सिर्फ चीन ही नहीं, बल्कि केंद्र के अन्य फैसलों पर भी मोदी सरकार पर निशाना साधते रहते हैं। हाल ही में सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के निजीकरण को लेकर सुब्रमण्यम स्वामी ने इसे पोंजी स्कीम करार दिया था।

PM Modi And Subramanian Swamy
सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा मोदी सरकार पर निशाना साधने का मामला सिर्फ चीन से जुड़े मामलों तक ही सीमित नहीं है(फोटो सोर्स: PTI)।

भारत-चीन सीमा विवाद के चलते आए दिन तनाव की स्थिति बनी रहती है। चीनी सैनिकों के घुसपैठ की खबरों के बीच केंद्र भारतीय सीमा में चीन के कब्जे को नकार चुका है। इसको लेकर भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी ही सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि, आखिर जब कोई आया ही नहीं, तो फिर चीन से बात क्यों?

बता दें कि सोमवार को सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने ट्वीट में कहा कि, जब कोई आया नहीं तो बात क्यों? आमने-सामने 18 बार की बैठक, और पांच बार पीएम मोदी की चीन की यात्राओं के बाद भी, कुछ हासिल नहीं हुआ। हम चीन से बात करने के लिए याचना की मुद्रा में हैं? उन्होंने कहा कि, जो अत्याचारी होते हैं, वो बलवानों के सामने नम्रता से पेश आते हैं, लेकिन निर्बलों के साथ उनका व्यवहार अशिष्ट होता है।

बता दें कि यह पहला मौका नहीं है, जब स्वामी ने अपनी सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। इससे पहले भी चीन को लेकर उन्होंने केंद्र पर ट्वीट के जरिए सवाल खड़ा किया है। सुब्रमण्यम स्वामी का मानना है कि, मोदी सरकार चीन से सीमा विवाद के मुद्दे को ठीक तरीके से निपट नहीं रही है।

एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि, पिछले महीने उत्तराखंड के चमोली से लगे चीनी सीमा इलाके ‘बाड़ाहोती’ में लगभग 100 सैनिक देखे गए थे। इसको लेकर अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स ने खबर भी प्रकाशित की थी। इससे जुड़ी खबर को शेयर करते हुए स्वामी ने तंज कसते हुए लिखा था कि, “कोई आया?”

वैसे केंद्र पर निशाना साधने का मामला सिर्फ चीन से जुड़े मामलों तक ही सीमित नहीं है। स्वामी केंद्र के अन्य फैसले पर भी अपनी राय देते हैं। अभी हाल ही में भारत की सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के निजीकरण को लेकर सुब्रमण्यम स्वामी ने इस कदम को पोंजी स्कीम करार दिया था।

उन्होंने कहा था कि, “एयर इंडिया की खरीद के लिए 15,000 करोड़ रुपये कर्ज के रुप में जुटाने की संभावना है। मतलब जिस एयर इंडिया को भारत सरकार ने बेचा, उसे सरकारी बैंक ही फाइनेंस कर रही है। ये पोंजी स्कीम है।” बता दें कि एयर इंडिया को टाटा ने 18,000 करोड़ रुपये में खरीदा है। जिसमें 15,300 करोड़ रुपये कर्ज के रूप में और बाकी नगद देना है।

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