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J&K पर मंथनः कश्मीरी हिंदू-सिख समुदाय के प्रतिनिधियों को शामिल न करने पर भड़के BJP सांसद- PM ने ठीक न किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुरुवार को कश्मीर के राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ हुई बैठक के खिलाफ कश्मीरी पंडितों ने एकजुट होकर प्रदर्शन भी किए थे।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: June 25, 2021 8:06 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य दिए जाने के मुद्दे पर राजनीतिक दल के नेताओं के साथ बैठक की। (फोटो- PTI)

केंद्र सरकार की कई नीतियों पर उसकी जमकर आलोचना करने वाले भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी एक बार फिर पीएम मोदी से नाराज हुए हैं। इस बार मसला है कश्मीर मुद्दे पर राजनीतिक दलों के साथ हुई बैठक का। दरअसल, एक दिन पहले ही पीएम ने गुपकार गठबंधन में शामिल पार्टियों और अन्य दलों के साथ बैठक की थी और कश्मीर को आगे ले जाने की योजना पर चर्चा हुई थी। स्वामी ने इसी को लेकर कहा कि कश्मीर पर हुई बैठक में कश्मीरी हिंदू और सिख समुदाय को शामिल न कर के पीएम ने गलत किया।

क्या रहा सुब्रमण्यम स्वामी का पूरा बयान?: केंद्र सरकार को विदेश के मुद्दों से लेकर आंतरिक मसलों पर घेरने वाले स्वामी ने गुरुवार रात को ट्वीट कर कहा, “कश्मीरी हिंदू और सिख समुदाय जिन्हें मारा गया, जिनके साथ दुष्कर्म हुआ, जिनका जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराया और आखिरकार जिन्हें कश्मीर छोड़ने पर मजबूर किया गया, उनके प्रतिनिधियों को कश्मीर पर हुई मीटिंग से अलग रखकर पीएम ने गलत किया।”

बता दें कि यह पहली बार नहीं है, जब स्वामी ने कश्मीर मुद्दे को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। पिछले महीने ही जब भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार बहाली की संभावनाओं को बल मिल रहा था, तब स्वामी ने परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा था- “कश्मीर पर सरेंडर। गुड बाय PoK। मुझे यकीन है कि मोदी जल्द ही इमरान खान के साथ लंदन में डिनर करेंगे।” इससे कुछ दिन पहले भी स्वामी एक अन्य ट्वीट में लिखा था कि वे कश्मीरी पंडितों के न्याय के लिए भी जोरदार अभियान चला चुके हैं। 

मोदी की बैठक से पहले कश्मीरी पंडितों ने किया था प्रदर्शन: गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुरुवार को कश्मीर के राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ हुई बैठक के खिलाफ कश्मीरी पंडित एकजुट हो गए थे। कश्मीरी पंडितों के संगठन ऑल इंडिया यूथ कश्मीरी समाज के कार्यकर्ताओं ने जम्मू में इस बैठक के खिलाफ प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। कश्मीरी पंडितों का आरोप है कि पिछले 3 दशकों से जम्मू कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक दलों ने उनका तिरस्कार किया है और उन्हें सियासी मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया है।

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