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नई शिक्षा नीति: विदेशी यूनिवर्सिटी की ब्रांच न खुलने दे मंत्रालय, मोदी सरकार का 6 साल पुराना फैसला बता बीजेपी सांसद ने जताई आपत्ति

केंद्रीय कैबिनेट ने 34 साल बाद देश की नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के ड्राफ्ट को मंजूरी दी है, सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने हालिया ट्वीट में इसकी तारीफ भी की थी।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: August 1, 2020 1:59 PM
New Education Policy, NEP-2020, Indiaनई शिक्षा नीति 2020 को इसी हफ्ते कैबिनेट की मंजूरी मिल गई। (फाइल फोटो)

केंद्रीय कैबिनेट ने इसी हफ्ते देश की शिक्षा पद्धति में बदलाव के मकसद से नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी थी। एजुकेशन पॉलिसी-2020 के तहत आए प्रस्तावों में कई बड़े बदलाव शामिल हैं। इसमें एक प्रावधान विदेशी यूनिवर्सिटियों को भारत में ब्रांच खोलने के लिए अनुमति देने से जुड़ा भी है। हालांकि, इस पर अब भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी सरकार के खिलाफ हैं। स्वामी ने शनिवार को ट्वीट कर केंद्र सरकार को 6 साल पुराने रुख की याद दिलाई और देश में विदेशी यूनिवर्सिटियों के प्रवेश को रोकने के लिए आवाज उठाई।

क्या कहा है स्वामी ने ट्वीट में?: भारत के पूर्व वित्त मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट में कहा, “शिक्षा मंत्रालय (मानव संसाधान विकास मंत्रालय का बदला नाम) को विदेशी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई के लिए एडेक्स ऑनलाइन जैसे पोर्टल खोलने चाहिए, पर विदेशी यूनिवर्सिटी को भारत में ब्रांच खोलने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।” स्वामी ने आगे कहा, “मोदी सरकार ने 2014 में ही यूपीए के समय में मिली हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को ब्रांच खोलने की इजाजत को रद्द किया गया था। स्मृति ईरानी यह बात जानती हैं।”

इससे पहले नई शिक्षा नीति को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद स्वामी ने मोदी सरकार के फैसले का स्वागत किया था। उन्होंने कहा था कि मेरी मानव संसाधान विकास मंत्रालय से बात हुई थी। मेरा सुझाव था कि शिक्षा पर जीडीपी का 6 फीसदी खर्च होना चाहिए और न कि 1.7 फीसदी। इसे मान लिया गया है।

विदेशी यूनिवर्सिटी लाने पर क्या रहा है सरकारों का रुख: गौरतलब है कि भारत में विदेशी यूनिवर्सिटी के कैंपस खोलने पर पहले भी कई बार विचार हुआ है। 1995 में इसके लिए एक विधेयक भी ड्राफ्ट किया गया था। लेकिन यह पास नहीं हो पाया। 2005-06 में यूपीए सरकार ने भी इसके लिए बिल तैयार किया, लेकिन तब भी उसे भाजपा के नेतृत्व वाले विपक्ष से समर्थन नहीं मिला। इसके बाद 2010 में कपिल सिब्बल के एचआरडी मंत्री रहने के दौरान एक बार फिर विदेशी यूनिवर्सिटियों को भारत लाने के लिए विधेयक लाया गया। लेकिन इसका भी पहले जैसा ही हश्र हुआ।

RSS से जुड़े संगठन के विरोध के बावजूद शिक्षा नीति में विदेशी यूनिवर्सिटियों पर प्रस्ताव: आरएसएस से जुड़े संगठन स्वदेशी जागरण मंच के कड़े विरोध के बावजूद नई शिक्षा नीति में विदेशी यूनिवर्सिटियों के लिए भारत में कैंपस खोलने का प्रावधान जोड़ा गया है। हालांकि, इसके साथ ही आरएसएस की भारत के प्राचीन ज्ञान पर जोर देने की बात को नई नीति में रखा गया है। ड्राफ्ट में कहा गया है कि इस तरह के तत्व छात्रों को स्कूली पाठ्यक्रम के जरिए सही और वैज्ञानिक जरियों से ही पढ़ाए जाएंगे। नई शिक्षा नीति पर आरएसएस से जुड़े लोगों ने कहा कि उनकी मांगों को माना गया और वे नई नीति से काफी खुश हैं।

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