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अब 29 साल पुराने कानून के खिलाफ SC पहुंचे बीजेपी सांसद, बोले- राम मंदिर का सपना साकार तो दूसरे मौलिक अधिकार पर ताला क्यूं?

स्वामी ने कहा कि "अगर मैं ये कहता हूं कि जहां कृष्णा का जन्म हुआ, या जहां भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग है, वहां के मंदिर के पास अगर मस्जिद बनती है तो मैं अपने ही मौलिक अधिकार का उल्लंघन कर रहा हूं।"

Subramanian Swamy ram mandir place of worship act 1991भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की तस्वीर

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए आगामी 5 अगस्त को भूमि पूजन होना है। इसी बीच भाजपा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। दरअसल भाजपा सांसद ने धार्मिक स्थल एक्ट, 1991 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि इस कानून के कुछ प्रावधान मौलिक अधिकार के खिलाफ हैं।

सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा कि “उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 7 अगस्त को सुनवाई होनी है।” स्वामी ने कहा कि “1991 का एक्ट जो कहता है कि सभी धार्मिक स्थल जैसे 1947 में थे, वो वैसे ही रहेंगे और उनमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इस कानून में राम जन्मभूमि को अपवाद माना गया था। यह कानून संसद द्वारा पास किया गया और मेरे पास इसकी संवैधानिकता को चुनौती देने का अधिकार है।”

स्वामी ने कहा कि “यह अच्छा कानून है लेकिन यह मेरे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकता। जब मेरे विश्वास पर हमला होता है तो तब मेरे मौलिक अधिकार लागू होते हैं। अगर मैं ये कहता हूं कि जहां कृष्णा का जन्म हुआ, या जहां भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग है, वहां के मंदिर के पास अगर मस्जिद बनती है तो मैं अपने ही मौलिक अधिकार का उल्लंघन कर रहा हूं।”

स्वामी ने मांग की “इस कानून में ना सिर्फ राम जन्मभूमि बल्कि काशी और मथुरा को भी अपवाद माना जाए। स्वामी ने कहा कि आरएसएस ने भी कहा है कि माना कि 40 हजार मंदिर तोड़े गए लेकिन हम सिर्फ चाहते हैं कि ये तीन मंदिर मुक्त होने चाहिए।” टाइम्स नाउ के साथ बातचीत में भाजपा सांसद ने ये बातें कहीं।

बता दें कि इस कानून में बदलाव के लिए सुब्रमण्यन स्वामी ने बीते साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा था। दरअसल काशी विश्वनाथ मंदिर और मथुरा में श्री कृष्ण मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इन दोनों मंदिरों का कुछ हिस्सा मुगल शासक औरंगजेब ने तोड़कर वहां मस्जिद का निर्माण कराया था। आरएसएस की मांग रही है कि इन दोनों मंदिरों को भी मुक्त कराया जाना चाहिए।

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