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भाजपा सांसद बोले- UN में भारत नहीं कर पाया वोट, फलस्तीन ने भी लताड़ा, पंचतंत्र के चमगादड़ जैसा हाल

भारत उन 14 देशों में शामिल रहा, जिन्होंने इजराइल के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में जांच बिठाने के प्रस्ताव पर वोटिंग नहीं की। हालांकि, इस पर फलस्तीन के विदेश मंत्री ने अफसोस जताया।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: June 3, 2021 9:09 AM
इजराइल और हमास के बीच हालिया संघर्ष में फलस्तीन के कई नागरिकों की जान चली गई थी, UNHRC में इसी को लेकर इजराइल के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया। (फोटो- AFP)

भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी अब तक कोरोनावायरस से लेकर अर्थव्यवस्था और कृषि कानूनों से लेकर चीन-पाकिस्तान तक के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेर चुके हैं। अब स्वामी ने विदेश नीति को लेकर भी मोदी सरकार की खिंचाई कर दी है। हालांकि, इस बार मुद्दा इजराइल-फलस्तीन से जुड़ा था। स्वामी ने दोनों देशों से जुड़े मानवाधिकार के मुद्दे पर वोटिंग न करने के लिए मोदी सरकार को पंचतंत्र का चमगादड़ करार दे दिया।

क्या बोले सुब्रमण्यम स्वामी?: राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी हाल ही में यूएन मानवाधिकार आयोग (UNHRC) की तरफ से इजराइल-फलस्तीन मुद्दे पर आयोजित कराई गई वोटिंग का जिक्र कर रहे थे। दरअसल, यूएन में लाए गए प्रस्ताव के तहत इजराइल के खिलाफ फलस्तीन में मानवाधिकार का उल्लंघन करने के आरोपों पर जांच आयोग गठित करने की मांग की गई थी। भारत ने इस प्रस्ताव पर वोटिंग में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया था। इसे लेकर ही स्वामी ने निशाना साधा।

उन्होंने कहा, “एक दिन पहले जब यूएन मानवाधिकार आयोग की बैठक हुई, तब भारत ने इंक्वायरी कमीशन के गठन के मुद्दे पर वोट नहीं किया। फलस्तीन के विदेश मंत्री ने इजराइल के खिलाफ अरब के साथ वोट न करने के लिए भारत की आलोचना की। मोदी सरकार इस वक्त पंचतंत्र का चमगादड़ बन गई है।”

क्या बोले फलस्तीन के विदेश मंत्री?: UNHRC बैठक में भारत की ओर से वोट न किए जाने पर फलस्तीन के विदेश मंत्री रियाद मल्की ने निराशा जाहिर की। उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर को लिखी चिट्ठी में कहा कि भारत ने न्याय, शांति और जिम्मेदारी तय करने के इस अहम मोड़ पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ खड़े होने का मौका गंवा दिया है। मल्की ने कहा कि भारत के वोटिंग में शामिल न रहने से मानवाधिकार आयोग के उस उद्देश्य को झटका लगा है, जिसके तहत सभी लोगों के लिए आधारभूत अधिकार सुनिश्चित किए जाने हैं।

यूएन में वोटिंग से गायब रहे 14 देश: बता दें कि भारत उन 14 देशों में शामिल रहा, जिन्होंने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। इजराइल का कहना था कि इस प्रस्ताव के जरिए आतंकी संगठन हमास के अपराधों से नजर हटाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, 24 देशों ने इस प्रस्ताव के समर्थन में वोट किया है।

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