चीन ने कब्जाई हमारी जमीन, क्या मोदी यह भी कबूलेंगे और हर इंच छुड़ाएंगे?- कृषि कानून वापस लेने के फैसले पर बोले BJP सांसद

एक ट्वीट में भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने उत्तराखंड के मंदिरों से कब्ज़ा हटाने की भी मांग की। भाजपा सांसद ने ट्वीट करते हुए लिखा कि अब समय आ गया है कि मोदी उत्तराखंड की भाजपा सरकार से कहें वह हिंदू मंदिरों पर बनाए गए अपने घटिया पकड़ से पीछे हटें।

कृषि कानून वापस लेने के ऐलान के बाद दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर जश्न मनाते प्रदर्शनकारी किसान (फोटो: पीटीआई)

शुक्रवार 19 नवंबर की सुबह प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया और साथ ही उन्होंने एमएसपी एवं दूसरे मसलों को लेकर एक कमेटी बनाने का भी आश्वासन दिया। प्रधानमंत्री मोदी के इस ऐलान के बाद भाजपा सांसद ने चीन के द्वारा कब्जाई गई जमीन वापस लेने की भी मांग की है। भाजपा सांसद ने कहा कि चीन ने हमारी जमीन कब्जाई है, क्या मोदी इसे भी कबूलेंगे और हर इंच छुड़ाएंगे।

भाजपा से राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि क्या मोदी अब यह भी कबूलेंगे कि चीन ने हमारी जमीन पर कब्जा कर लिया है और क्या मोदी एवं उनकी सरकार चीन के कब्जे से एक-एक इंच वापस लेने का प्रयास करेगी। उनके इस ट्वीट पर कई यूजर्स ने प्रतिक्रिया भी दी। बीके भारद्वाज नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि संसद में पास हुआ कानून क्या टीवी पर निरस्त किया जा सकता है। तो इसके जवाब में भाजपा सांसद ने भी लिखा कि मोदी ने कहा कि वह इसे वापस लेंगे न कि वापस लिया। संसदीय कार्य मंत्री दोनों सदनों में इसको लेकर प्रस्ताव पेश करेंगे।

वहीं एक और ट्वीट में भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने उत्तराखंड के मंदिरों से कब्ज़ा हटाने की भी मांग की। भाजपा सांसद ने ट्वीट करते हुए लिखा कि अब समय आ गया है कि मोदी उत्तराखंड की भाजपा सरकार से कहें वह हिंदू मंदिरों पर बनाए गए अपने घटिया पकड़ से पीछे हटें। मंदिरों का अधिग्रहण पूरी तरह से अवैध और भाजपा के लिए शर्मनाक था। 

कृषि कानून वापस लेने के ऐलान के बाद भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी ट्वीट कर ख़ुशी जताई। भाजपा सांसद ने एक ट्वीट में लिखा कि मोदी के पीछे हटने के बाद गर्मी और कड़ाके की ठंड की परवाह न करते हुए करीब एक साल से शांतिपूर्ण तरीके से बैठे किसानों की समस्या का समाधान होते देखकर मुझे ख़ुशी हो रही है। लेकिन भाजपा को इस बात के लिए प्रायश्चित करने की जरूरत है कि प्रधानमंत्री से राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद में प्रस्ताव लाने की मांग के बावजूद उन्होंने लोगों की बात नहीं सुनी। 

गौरतलब है कि शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल सितंबर के महीने में दोनों सदनों से पेश हुए तीनों कृषि कानून वापस लेने का निर्णय लिया। इनमें कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) अधिनियम -2020, कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार अधिनियम 2020, आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम 2020 शामिल है।

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