अफगान संकट पर दोहा बैठक से इंडिया रह गया बाहर- यूजर ने पूछा, बोले BJP के स्वामी- कौन पड़ोसी आज भारत का करता है सम्मान?

एक यूजर ने सुब्रमण्यम स्वामी से दोहा में अफगान संकट को लेकर होने वाली बैठक से भारत के बाहर रहने का सवाल पूछा तो भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि यह तो स्पष्ट है। आप दुनिया में अपनी जगह जानें।

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भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि यदि आप अंतरराष्ट्रीय मुद्दे से लेकर सभी मसले पर गोलमोल बात करेंगे तो आप किसी भी देश से भारत को तवज्जो देने की अपेक्षा क्यों करते हैं। (फोटो- पीटीआई)

विदेश संबंधों सहित आंतरिक मुद्दे पर अपनी ही सरकार को घेरने वाले भाजपा से राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने एक बार फिर से नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोला है। ट्विटर पर एक यूजर ने अफगान संकट को लेकर होने वाली दोहा बैठक में इंडिया के बाहर रहने का सवाल पूछा तो सुब्रमण्यम स्वामी ने जवाब देते हुए कहा कि आज कौन पड़ोसी देश भारत का सम्मान करता है।

दरअसल ट्विटर पर गुरुदत्त शेट्टी नाम के एक यूजर ने सुब्रमण्यम स्वामी से सवाल पूछते हुए कहा कि अमेरिका, रूस, चीन और पाकिस्तान कुछ दिनों में दोहा में अफगान संकट को लेकर बैठक करने वाले हैं। लेकिन भारत इस बैठक से बाहर है। इसके जवाब में भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि यह तो स्पष्ट है। आप दुनिया में अपनी जगह जानें।

भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने यह भी कहा कि यदि आप अंतरराष्ट्रीय मुद्दे से लेकर अपने भूभाग पर कब्ज़ा होने के मुद्दे पर भी गोलमोल बात करेंगे तो आप किसी भी देश से भारत को तवज्जो देने की अपेक्षा क्यों करते हैं। साथ ही सुब्रमण्यम स्वामी ने सवाल पूछने वाले अंदाज में कहा कि आज कौन सा हमारा पड़ोसी देश भारत का सम्मान करता है। 

‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की खबर के अनुसार अमेरिका, रूस, चीन और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने अफगानिस्तान संकट पर चर्चा करने के लिए दोहा में एक बैठक आयोजित करने की योजना बनाई है। इस बैठक का मुख्य मकसद संघर्ष विराम होगा और संवैधानिक सुधार अंतरिम सरकार बनाना साथ ही अधिकतम दो साल के अंदर आम चुनाव कराना होगा।

साल 2001 के बाद पहली बार अफगानिस्तान में तालिबान ने उत्तर, उत्तर-पूर्व और मध्य प्रांतों समेत कई बड़े क्षेत्र पर कब्ज़ा जमा लिया है। इससे पहले कभी भी अफगानिस्तान में तालिबान का कब्ज़ा इतने बड़े इलाकों में नहीं रहा। तालिबान की हिंसा की वजह से सिर्फ 7 महीने में करीब 1600 नागरिक मारे गए हैं और कई लाख लोगों को अपना घर छोड़ कर विस्थापित होना पड़ा है।

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