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बीजेपी सांसद ने कहा- सीबीआई चीफ को गलत तरीके से हटाया, सीवीसी खुद दागदार

गुरुवार को स्वामी ने कहा कि सरकार आलोक वर्मा का पक्ष जाने बगैर सिर्फ सीवीसी की रिपोर्ट का आधार बनाकर उन्हें नहीं हटा सकती। वर्मा को भी उनके बचाव के लिए एक मौका दिया जाना चाहिए था।

बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी( फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने आलोक वर्मा को सीबीआई के निदेशक पद से हटाए जाने पर केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि सीबीआई प्रमुख को गलत तरीके से हटाया गया है। स्वामी ने सीवीसी को भी आरोपों के घेरे में लिया और कहा कि सीवीसी (केंद्रीय सतर्कता आयोग) की रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई निदेशक को नहीं हटाया जा सकता है। सीवीसी की हैसियत आरबीआई गवर्नर से ज्यादा कुछ भी नहीं है। गुरुवार को टाइम्स नाऊ के साथ बातचीत में स्वामी ने कहा, “सरकार आलोक वर्मा का पक्ष जाने बगैर सिर्फ सीवीसी की रिपोर्ट को आधार बनाकर उन्हें नहीं हटा सकती। वर्मा को भी उनके बचाव के लिए एक मौका दिया जाना चाहिए था। कायदे से होना यह चाहिए था कि सीवीसी की रिपोर्ट पर वर्मा एक-एक बात की सफाई तथ्यात्मक रूप से देते। अगर उनकी बातें सटिक नहीं बैठतीं तो वाजिब तौर पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती। तब हम लोग भी इस कदम का समर्थन करते। लेकिन, सरकार का यह तरीका बिल्कुल ही अलोकतांत्रिक है।”

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फर्जी कानूनी जानकारों ने गलत सुझाव दिया है। जिन लोगों ने गलत सुझाव दिया है उन्होंने ही सरकार को इस हालत में पहुंचाया है। स्वामी ने सीवीसी की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “सीवीसी की सत्यता जगजाहिर है। भ्रष्टाचार के कई आरोप पहले सीवीसी पर लग चुके हैं।”

बुधवार को आलोक वर्मा ने कोर्ट से राहत मिलने के बाद निदेशक का कार्यभार संभाला था। लेकिन, जब उन्हें उनके पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई तो उसी दौरान स्वामी ने कहा कि सीवीसी (केंद्रीय सतर्कता आयोग) की रिपोर्ट एक अन्य अधिकारी के दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसने ‘‘गलत रिपोर्ट’’ दी है। उन्होंने कहा, “इसकी जांच होनी चाहिए। मुझे नहीं लगता है कि यह (वर्मा को हटाया जाना) हो सकता है। अगर वर्मा को हटाया जाएगा तो समस्या सुलझने की बजाय और बदतर हो जाएगी। मैं चाहूंगा कि प्रधानमंत्री ऐसे कदम उठाएं जो इतिहास बने।’

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने 77 दिन बाद अपना कार्यभार बुधवार को संभाला था। वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच की लड़ाई सार्वजनिक होने के बाद केन्द्र सरकार ने 23 अक्टूबर 2018 की देर रात आदेश जारी कर वर्मा के अधिकार वापस लेकर उन्हें जबरन छुट्टी पर भेज दिया था। सरकार के आदेश को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था जिसके बाद वर्मा ने कार्यभार संभाल लिया। हालांकि, इसके बाद पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्ययी कमेटी ने वर्मा की निदेशक पद से छुट्टी कर दी और उन्हें डीजी फायर नियुक्त किया गया है।

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