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बीजेपी सांसद ने की राहुल गांधी की तारीफ, बोले- पीएम मोदी केजी के बच्चों जैसा ककहरा न सिखाएं

बीजेपी नेता ने यह भी लिखा है कि चुनाव इस कला से नहीं जीते जाते बल्कि लोगों का दिल जीतकर चुनाव जीते जा सकते हैं।

शत्रुघ्न सिन्हा और पीएम मोदी (एक्सप्रेस फोटो)

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बागी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा ने चौबीस घंटे में दूसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है कि पीएम मोदी देश के 130 करोड़ लोगों के प्रधानमंत्री हैं, उन्हें यह शोभा नहीं देता कि वो मुख्य विपक्षी राजनीतिक पार्टी को छद्म नाम दें। शत्रुघ्न सिन्हा ने लिखा है कि पीएम मोदी ऐसा कर रहे थे मानो वे केजी के बच्चों को ककहरा पढ़ा रहे हों। उन्होंने लिखा है कि पूरा देश बच्चों का स्कूल नहीं है, जिसे आप पीपीपी का मतलब पंजाब, पोंडिचेरी और परिवार समझाकर गंदी राजनीति का नमूना पेश कर रहे हैं। शॉटगन ने लिखा है कि इससे आपका भय और सोच में गिरावट जाहिर होता है। बीजेपी नेता ने यह भी लिखा है कि चुनाव इस कला से नहीं जीते जाते बल्कि लोगों का दिल जीतकर चुनाव जीते जा सकते हैं।

एक के बाद एक कुल सात ट्वीट कर शत्रुघ्न सिन्हा ने लिखा है कि प्रधानमंत्री महोदय देश के करोड़ों लोग आपसे इस तरह के भाषण की जगह परिपक्व और विकास को परिभाषित करने वाला भाषण चाहता है। अगर आप ऐसा नहीं कर सकते हैं तो इसका मतलब हुआ कि आप पीएम जैसे ऊंचे ओहदे पर बैठने वाला सिर्फ एक अधिकृत व्यक्ति हैं। उन्होंने लिखा है कि अगर देश की सबसे पुरानी पार्टी का अध्यक्ष अगर प्रधानमंत्री बनने की संभावना देखता है तो इसमें हर्ज क्या है? अगर वह शख्स आगामी लोकसभा चुनाव जीतता है तो वह पीएम बन सकता है। उन्होंने लिखा है कि वो लोगों के बीच लोकप्रिय है और लोगों का चहेता बन चुका है।

शत्रुघ्न सिन्हा ने लिखा है कि इस देश में कोई भी सपना देख सकता है और सपने तभी सच होते हैं जब कोई सपना देखता है। उन्होंने लिखा है, “जैसा मैंने पहले ही कहा है कि प्रधानमंत्री बनने के लिए कोई योग्यता या विशेष बुद्धिमता की आवश्यकता नहीं होती है। हमारे लोकतंत्र में कोई भी प्रधानमंत्री बन सकता है, चाहे वो नामदार हो, कामदार हो या फिर दमदार हो या औसत समझदार हो। अगर उसके पास संख्या बल है और लोगों का सपोर्ट है तो। हम क्यों इस तरह के करुण क्रंदन में लिप्त हैं?” शॉटगन ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना यह भी लिखा है, “पुरानी पार्टी के अध्यक्ष पिछले कुछ सालों में परिपक्व हुए हैं और बहुत ही गंभीर और ज्वलंत मुद्दों के उठाते रहे हैं लेकिन हमलोग उनके सवालों का जवाब देने से कतराते रहे हैं, यहां तक कि उस पर ध्यान तक देने से भी कतराते रहे हैं। नीरव मोदी, ललित मोदी, विजय माल्या, बैंक घोटाला, राफेल डील एवं अन्य मुद्दों पर जवाब देने के बजाय हमलोग मुद्दों से ध्यान भटकाने की राजनीति करते रहे हैं।” उन्होंने लिखा है कि क्या ऐसा कर हम विकास की राजनीति से दूर नहीं हो गए हैं।

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