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बीजेपी सांसद ने कहा- इंदिरा गांधी की इमरजेंसी से सीख लें, आलोक वर्मा को हटाना गलत

एके पटनायक ने शुक्रवार को साफ कहा कि पद से हटाए गए आलोक वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं था। उन्होंने कहा कि सीवीसी का कहा गया अंतिम शब्द नहीं हो सकता।

इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है. (फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा को पद से हटाए जाने पर वरिष्ठ भाजपा नेता और राज्य सभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने फैसले के विरोध में प्रतिक्रिया दी है। स्वामी ने वर्मा को हटाए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इंदिरा गांधी के फैसले से सीख लें। दरअसल इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार लिज मैथ्यू ने आलोक वर्मा को पद से हटाए जाने पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी। पत्रकार ने पूछा कि आलोक वर्मा के खिलाफ स्पष्ट सबूत नहीं थे। इसपर भाजपा सांसद ने कहा, ‘मैंने जस्टिस पटनायक (रिटायर्ड) से पहले कहा था। आप स्पष्ट रूप से टीवी नहीं देखते।’ स्वामी ने आगे कहा कि मैं वकाई बहुत खुश हूं कि इंडियन एक्सप्रेस ने जस्टिस पटनायक का बयान छापा। हमें इंदिरा गांधी के आपातकाल से सीखना होगा। हम भारतीय संविधान को दरकिनार नहीं कर सकते।’ इसपर इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार ने पूछा कि क्या वो पटनायक के बयान से सहमत हैं? स्वामी ने कहा, ‘100 फीसदी।’

बता दें कि एके पटनायक ने शुक्रवार को साफ कहा कि पद से हटाए गए आलोक वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं था। उन्होंने कहा कि सीवीसी का कहा गया अंतिम शब्द नहीं हो सकता। यहां जानना चाहिए कि पटनायक सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज हैं और उनसे एपेक्स कोर्ट ने सेंट्रल विजिलेंस कमिशन (सीवीसी) की निगरानी रखने के लिए कहा था, जिसमें सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को पद हटा दिया गया। गुरुवार को भ्रष्टाचार के आरोप में सीबीआई निदेशक के पद से वर्मा को हटाने के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली चयन समिति के बहुत-बहुत जल्दबाजी में लिए निर्णय के वो कड़े आलोचक थे। आलोक वर्मा को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बहाल करने के दो दिन बाद सीवीसी ने उन्हें पद से हटा दिया।

सीवीसी के तीन सदस्यों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जस्टिस एके सीकरी, आलोक वर्मा के पद पर निरंतर बने रहने के खिलाफ थे। वहीं लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे अन्य दो सदस्यों के फैसले के पक्ष में नहीं गए और सीवीसी रिपोर्ट पर अपनी असहमति दर्ज कराई। मामले में जस्टिस पटनायक ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि भ्रष्टाचार को लेकर आलोक वर्मा के खिलाफ कोई सबूत नहीं था। पूरी जांच (CBI के विशेष निदेशक राकेश) अस्थाना की शिकायत पर की गई थी। मैंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सीवीसी की रिपोर्ट में कोई भी निष्कर्ष मेरा नहीं है।

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