ताज़ा खबर
 

मुरली मनोहर जोशी की अध्‍यक्षता वाली समिति करना चाहती थी GDP निर्धारण की समीक्षा, बीजेपी सदस्‍यों ने की बगावत

संसदीय समिति की ड्राफ्ट रिपोर्ट में रोजगार और बेरोजगारी को मापने के मानकों, सर्वेक्षण और उससे जुड़े आंकड़ों की शुद्धता पर भी सवाल उठाए गए हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद मुरली मनोहर जोशी। (एक्सप्रेस फोटोः ताशी तोबग्याल)

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ सांसद मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता वाली संसदीय प्राक्कलन समिति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) निर्धारण की प्रक्रिया की समीक्षा करना चाहती थी लेकिन समिति में भाजपा से जुड़े सदस्यों (सांसदों) ने उनकी इस मुहिम के खिलाफ बगावत कर दी। समिति में भाजपा सांसदों ने ड्राफ्ट को न केवल खारिज कर दिया बल्कि गुरुवार (11 अक्टूबर) को बुलाई गई बैठक को भी बाधित कर दिया। सूत्रों के मुताबिक भाजपा सांसदों ने जोशी से कहा कि उनकी इस रिपोर्ट और कोशिश से भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार और जीडीपी अनुमान की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा होगा वर्ल्ड बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष समेत तमाम इंटरनेशनल रेटिंग एजेंसियां भारत को बुरी नजरों से देखेंगी।

संसदीय समिति की ड्राफ्ट रिपोर्ट में रोजगार और बेरोजगारी को मापने के मानकों, सर्वेक्षण और उससे जुड़े आंकड़ों की शुद्धता पर भी सवाल उठाए गए हैं और उसमें शिकायत दर्ज की गई है कि रोजगार और बेरोजगारी मापने के दौरान अद्यतन और वास्तविक स्थितियों को नजरअंदाज किया गया है। इसमें एक विशेष समय पर यथार्थवादी स्थिति मानकों पर उपलब्ध नहीं कराई गई है। समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने ड्राफ्ट रिपोर्ट में विकास, रोजगार और आय मापने के मामले में सामाजिक कारकों और रीयल टाइम डेटा सहित जीडीपी अनुमान के लिए नए उपायों को अपनाने और सरकार द्वारा सांख्यिकीय आंकड़ा तंत्र विकसित करने की अनुशंसा की है। जब बैठक में ड्राफ्ट रिपोर्ट पेश किया गया तो भाजपा सांसद निशिकांत दूबे के नेतृत्व में अन्य भाजपा सांसदों ने विरोध जताना शुरू कर दिया और बैठक बाधित कर दी।

जब भाजपा सांसदों ने ड्राफ्ट नोट पर अपनी असहमति जताई तब समिति अध्यक्ष जोशी और मोहम्मद सलीम जैसे दूसरे सदस्यों ने उनके आचरण का विरोध किया और कहा कि प्राक्कलन समिति के नियम इस तरह की गतिविधि की इजाजत नहीं देता है। इसके बावजूद जब भाजपा सांसदों ने अपना विरोध जताना जारी रखा तब समिति के अध्यक्ष ने एक सप्ताह के अंदर उन्हें ड्राफ्ट में संशोधन पर सुझाव सौंपने को कहा। संसदीय समिति ने अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा है कि मौजूदा जीडीपी अनुमानों के लिए वित्तीय मामलों के विभाग ने मात्र अर्थव्यवस्था के चरों को ही व्याख्यायित करने के लिए इस्तेमाल किया है। समिति को लगता है कि जीडीपी अनुमानों के लिए अपनाए गए आंकड़े रीयल टाइम नहीं हैं, जबकि उसका इस्तेमाल होना चाहिए था।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App