बीजेपी सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी शनिवार को अमृतसर में अकाल तख्त के सामने पेश हुए। उन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में दोषी ठहराए गए कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार की शोक सभा में शामिल होने के लिए माफी मांगी। बीजेपी के साउथ दिल्ली के सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने इससे पहले 5 सितंबर को अकाल तख्त सेक्रेटेरिएट को लिखकर माफी मांगी थी। शनिवार को वह खुद अकाल तख्त पर गए, मत्था टेका और अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज से मिले, माफी मांगी और अपनी बात बताई।
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि यह अच्छा है कि रामवीर बिधूड़ी को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने माफी मांगी। रामवीर बिधूड़ी सज्जन कुमार की मौत के बाद शोक जताने के लिए उनके घर गए थे।
सज्जन कुमार की शोक सभा में शामिल होना गलती थी- बीजेपी सांसद
अपनी माफी में बीजेपी सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि उन्होंने सिख विरोधी दंगों में शामिल होने के कारण सज्जन कुमार के खिलाफ लगातार बात की थी। उन्होंने माना कि हिंसा में शामिल किसी व्यक्ति की शोक सभा में शामिल होना एक गलती थी।
इस घटना की जांच इसलिए हुई क्योंकि सज्जन कुमार 1984 की हिंसा के इतिहास में एक बहुत ही विवादित व्यक्ति रहे। उन्हें दंगों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया था और उनकी मौत ने उनकी विरासत से जुड़े राजनीतिक जुड़ावों पर फिर से ध्यान खींचा।
जत्थेदार ने क्या कहा?
अकाल तख्त के दखल ने अब इस विवाद में एक धार्मिक और संस्थागत पहलू जोड़ दिया है। जत्थेदार ने कहा कि कई दूसरे राजनीतिक नेता, खासकर कांग्रेस से जुड़े नेता भी सज्जन कुमार के घर गए थे। उन्होंने उनसे रामवीर बिधूड़ी की माफी से गाइडेंस लेने और सिख समुदाय से माफी मांगने का आग्रह किया।
रामवीर बिधूड़ी की माफी 1984 के सिख विरोधी दंगों की हमेशा रहने वाली राजनीतिक और भावनात्मक विरासत के खिलाफ है। यह घटना भारतीय राजनीति में बार-बार सामने आई है, जिसमें जवाबदेही, न्याय और राजनीतिक जिम्मेदारी के सवाल दशकों बाद भी सार्वजनिक बहस को आकार देते रहे हैं।
सज्जन कुमार की शोक सभा को लेकर विवाद पार्टी लाइन को भी पार कर गया है। इससे पहले BJP नेताओं ने कुछ नेताओं के सज्जन कुमार के घर जाने के फैसले की आलोचना की थी, जबकि पार्टी के दिल्ली के सांसद जो इस सभा में शामिल हुए थे, वे जांच के दायरे में आए थे। बीजेपी प्रेसिडेंट नितिन नवीन ने विवाद के बाद तीनों MP को बुलाया था।
यह भी पढ़ें- 1984 के दंगों में सज्जन कुमार की भूमिका पर नानावटी आयोग ने क्या कहा था?
1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में सज्जन कुमार को दिल्ली की एक अदालत ने 1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या के मामले में फरवरी 2025 में दोषी ठहराया था। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
