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बीजेपी सांसद राजीव चंद्रशेखर ने नहीं दिया 1026 करोड़ की ग्रॉस इनकम वाली कंपनी का ब्‍योरा, पर कानून नहीं तोड़ा

सांसद ने जिन 6 कंपनियों के बारे में अपने हलफनामे में जिक्र किया है, उनमें सैंगुइन न्यू मीडिया में उनकी महज 1.25% शेयर की हिस्सेदारी है।

भाजपा सांसद राजीव चंद्रशेखर। (Photo: Rajeev Chandrasekhar’s website)

बीजेपी सांसद राजीव चंद्रशेखर ने अपने चुनावी हलफनामे में संपत्ति का ब्योरा देते वक्त कुछ प्रॉपर्टीज की जानकारी नहीं दी। हालांकि, ऐसा करके उन्होंने कोई कानून नहीं तोड़ा क्योंकि उनका ऐसा करना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के दायरे में आता था। द स्क्रॉल ने अपनी पड़ताल में यह जानकारी सामने रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 12 मार्च 2018 को चुनाव आयोग के पास दाखिल हलफनामे में कारोबारी से राजनेता बने चंद्रशेखर ने अपनी सालाना आय 28 करोड़ रुपये और कुल पारिवारिक संपत्ति 65 करोड़ रुपये बताई थी।

हलफनामे के मुताबिक, चंद्रशेखर 6 गैर लिस्टेड कंपनियों में इक्विटी शेयर के मालिक हैं। ये कंपनियां हैं- वेक्ट्रा कंसलटेंसी सर्विस, एसपीएल इन्फोटेक पीटीई, जुपिटर ग्लोबल इन्फ्रास्ट्रक्चर, मिंस्क डेवलपर्स, आरसी स्टॉक्स एंड सिक्योरिटीज और सैंगुइन न्यू मीडिया। हालांकि, हलफनामे में जुपिटर कैपिटल का जिक्र नहीं है, जो चंद्रशेखर के नियंत्रण वाली सबसे बड़ी कंपनी है।

पहले यह जानते हैं कि जुपिटर कैपिटल है क्या? कंपनी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, इसकी स्थापना 2005 में चंद्रशेखर ने की थी। पहले साल में, कंपनी की चार सहायक कंपनियां (subsidiaries) थीं और कुल आमदनी 15.08 करोड़ रुपये थी। इसके बाद से जुपिटर कैपिटल तेजी से तरक्की करते गई। कंपनी की ओर से 2018 में मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स के पास दाखिल की गई जानकारी के मुताबिक, उसकी कुल 58 सहायक कंपनियां थीं। इनमें सुवर्ना न्यूज, एशियानेट, इंडिगो 91.9 एफएम और रिपब्लिक जैसी मीडिया कंपनियां भी शामिल थीं। इसके अलावा, तकनीकी फर्म एक्सिसकेड्स और डिफेंस कंपनी इंडियन एयरो वेंचर्स भी इन सहायक कंपनियों में शामिल थीं।

स्क्रॉल की रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रशेखर के कारोबारी गतिविधियों और आमदनी का अधिकतर हिस्सा जुपिटर कैपिटल्स की सहायक कंपनियों से जुड़ा है। इन कंपनियों का व्यापार तकनीक, एरोस्पेस, मीडिया, संगीत, मनोरंजन, हॉस्पिटैलिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर आदि के क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। मार्च 2018 में कंपनी ने 1026 करोड़ रुपये की कुल आमदनी (ग्रॉस इनकम) दिखाई।

वहीं, चंद्रशेखर ने जिन कंपनियों के बारे में अपने चुनावी हलफनामे में जानकारी दी है, वे जुपिटर कैपिटल्स के मुकाबले बेहद छोटी हैं। उदाहरण के तौर पर वेक्ट्रा कंसलटेंसी सर्विस, जिसने 31 मार्च 2018 को खत्म होने वाले साल में सालाना आय 5.07 लाख रुपये दर्ज कराई है। वहीं, बाकी तीन कंपनी आरसी स्टॉक्स ऐंड सिक्योरिटीज, जुपिटर ग्लोबल इन्फ्रास्ट्रक्चर और मिंस्क डेवलेपर्स ने सालाना आय 0 रुपये घोषित की है।

अब जानते हैं कि जुपिटर कैपिटल्स के बारे में चंद्रशेखर ने अपने हलफनामे में जिक्र क्यों नहीं किया? इसका जवाब चंद्रशेखर द्वारा तय कंपनियों की रुपरेखा में निहित है। सांसद ने जिन 6 कंपनियों के बारे में अपने हलफनामे में जिक्र किया है, उनमें सैंगुइन न्यू मीडिया में उनकी महज 1.25% शेयर की हिस्सेदारी है।

एसपीएल इन्फोटेक की स्थापना सिंगापुर में हुई है, इसलिए इसकी शेयरहोल्डिंग संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं है। हालांकि, बाकी 4 कंपनियों पर चंद्रशेखर का सीधा नियंत्रण है। वेक्ट्रा कंसलटेंसी सर्विसेज में उनकी 99.97% हिस्सेदारी है। बाकी 0.03% शेयर्स उनकी पत्नी और मां के नाम हैं। इसका मतलब यह है कि कंपनी पर 100 प्रतिशत अधिकार चंद्रशेखर के परिवार का है। अब बात करते हैं जुपिटर ग्लोबल इन्फ्रास्ट्रक्चर की, जिसमें वह 50.69% शेयरों के मालिक हैं और बाकी 37.43% हिस्सेदारी वेक्ट्रा कंसलटेंसी सर्विसेज के जरिए है। कंपनी के बाकी बचे 11.38% शेयर कुंजी वेंकटराम गौड़ा के पास है। गौड़ा की चंद्रशेखर से जुड़ी अन्य कंपनियों में भी थोड़े शेयर हैं।

मिंस्क में शेयरहोल्डिंग का भी कुछ ऐसा ही पैटर्न है। चंद्रशेखर का कंपनी के 62.84% शेयर पर अधिकार है। बाकी 37.04% शेयरों पर वेक्ट्रा कंसलटेंसी सर्विसेज का अधिकार है और 0.13% शेयर गौड़ा के नाम हैं। तीन कंपनियां- वेक्ट्रा कंसलटेंसी सर्विसेज, जुपिटर ग्लोबल इन्फ्रास्ट्रक्चर और मिंस्क डेवलेपर्स के पास जुपिटर कैपिटल के 99.92% शेयरों पर मालिकाना हक है। बाकी 0.08% गौड़ा के नाम हैं। कंपनियों के शेयरहोल्डिंग की इसी व्यवस्था में हमारे सवाल का जवाब है।

दरअसल, इस व्यवस्था की वजह से ये तीन कंपनियां चंद्रशेखर और जुपिटर कैपिटल के बीच एक ऐसे लेयर की तरह काम करती है, जिसकी वजह से चंद्रशेखर अपने हलफनामे में जुपिटर कैपिटल से 27 करोड़ की सालाना आय बताते हैं। इस कंपनी जुपिटर कैपिटल में उनका सीधे तौर पर कोई शेयर नहीं है। कंपनी में सभी शेयर उन तीन कंपनियों के हैं, जिनका नियंत्रण वह सीधे तौर पर खुद या वेक्ट्रा कंसलटेंसी सर्विसेज के जरिए करते हैं।

दरअसल, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के मुताबिक, चुने हुए प्रतिनिधियों को अपनी, पत्नी,आश्रित बच्चों आदि की संयुक्त तौर पर या स्वतंत्र रूप से चल और अचल संपत्तियों की जानकारी देनी होती है। इसके मुताबिक, चंद्रशेखर को उन कंपनियों की जानकारी देनी है, जिनमें उनके शेयर हैं। हालांकि, यह कानून यह नहीं बताता कि क्या उन्हें सहायक कंपनियों (subsidiaries) की जानकारी देनी चाहिए कि नहीं। चूंकि, जुपिटर कैपिटल में चंद्रशेखर का सीधा नियंत्रण नहीं, बल्कि सहायक कंपनियों के जरिए है, ऐसे में उन्होंने यह जानकारी शेयर नहीं की।

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