बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारणी से BJP सांसद मेनका गांधी और वरुण गांधी का नाम गायब

हाल के दिनों में वरुण गांधी के कई बयान पार्टी को असहज महसूस करा रहे थे। वह पार्टी से सांसद हैं, लेकिन उनके बयान विपक्षी सांसद के बयान जैसे लगते हैं।

Lakhimpur Kheri, Bjp Executive Council List
भाजपा सांसद वरुण गांधी और उनकी मां सांसद मेनका गांधी। (फाइल फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने गुरुवार को राष्ट्रीय कार्यसमिति, विशेष आमंत्रित और स्थायी आमंत्रित (पदेन) सदस्यों की सूची जारी कर दी। इस सूची में पार्टी के सभी प्रमुख नेताओं के नाम शामिल हैं, लेकिन मेनका गांधी और वरुण गांधी के नाम नहीं शामिल किए गए हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इस पर कोई बयान नहीं आया है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसको लेकर लोगों ने कमेंट करने शुरू कर दिए। राष्ट्रीय कार्यसमिति में 80 सदस्य हैं, जिनमें प्रमुख रूप से पीएम मोदी, वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी, पीयूष गोयल आदि नेता शामिल हैं। इसके अलावा 50 विशेष आमंत्रित और 179 स्थायी आमंत्रित सदस्य हैं।

इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट करके कहा है कि “वरुण गांधी भाजपा राष्ट्रीय समिति से बाहर। क्यों? क्यों कि वे किसानों का साथ दे रहे हैं।” मेनका गांधी और वरुण गांधी के नाम नहीं होने पर पार्टी के अंदर उनको लेकर विरोध की आवाजें भी उठने लगी हैं।

कुछ लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से वरुण गांधी के बयान और लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में वीडियो जारी करने और उनके एक के बाद एक बयान देने से सरकार के सामने असहज स्थिति बनती जा रही थी। उनका रवैया पार्टी में रहकर भी विपक्ष जैसा बन गया था।

इससे पहले तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को लेकर भी उन्होंने पीएम मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कानून की खिलाफत कर चुके हैं। उनके इस तरह के बयानबाजी और पत्र से सरकार और पार्टी के अंदर उनको लेकर विरोध जताया जा रहा था।

लखीमपुर खीरी मामले को लेकर उन्होंने गुरुवार को 37 सेकेंड का एक और वीडियो जारी करके कहा कि हत्या के माध्यम से प्रदर्शनकारियों को चुप नहीं कराया जा सकता। लखीमपुर के पड़ोसी जिले पीलीभीत के भाजपा सांसद गांधी ने एक ट्वीट किया और कहा, ”वीडियो बिल्कुल स्पष्ट है। प्रदर्शनकारियों को हत्या के माध्यम से चुप नहीं कराया जा सकता है। निर्दोष किसानों का खून बहा है, इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। अहंकार और क्रूरता का संदेश हर किसान के दिमाग में प्रवेश करे उससे पहले न्याय दिया जाना चाहिए।”

वरुण गांधी और उनकी मां मेनका गांधी दोनों भाजपा से सांसद हैं, लेकिन वरुण के हाल के बयान ऐसे लगते हैं, जैसे वे विपक्ष की ओर से बोल रहे हैं। पार्टी के एक अन्य सांसद सुब्रमण्यम स्वामी के बयान भी सरकार को परेशान करने वाले रहते हैं।

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