मणिपुर के भाजपा विधायक वुंगजागिन वाल्टे को उनकी मौत के चार महीने से ज्यादा वक्त बाद आज उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंतिम संस्कार के सभी रीति-रिवाज चुराचांदपुर में स्थिति उनके पैतृक पर होगा। राज्य में जातीय हिंसा के दौरान लगी चोटों के कारण उनका निधन हो गया था।

63 वर्षीय भाजपा के नेता वाल्टे पूर्व मंत्री और तीन बार विधायक रह चुके थे। वे थानलोन विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे। मणिपुर में जातीय हिंसा शुरू होने के समय वे राज्य के 10 कुकी-जोमी विधायकों में शामिल थे।

4 मई 2023 को जब राज्य में हिंसा जारी थी, तब इम्फाल में भीड़ ने उन पर हमला कर दिया था। जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उस समय वे तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के सलाहकार भी थे।

इस हमले में उनके शरीर की कई हड्डियां टूट गईं और उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी। वे अपनी चोटों से पूरी तरह उबर नहीं पाए और इस साल 21 फरवरी को गुड़गांव के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया।

जब उनका शव चुराचंदपुर वापस लाया गया, तो उनके परिवार और चुराचंदपुर स्थित ज़ोमी परिषद (जोमी समुदाय के अंतर्गत आने वाली आठ जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाली सर्वोच्च संस्था) ने अंतिम संस्कार स्थगित करने और उनके पार्थिव शरीर को चुराचंदपुर मेडिकल कॉलेज के मुर्दाघर में रखने का फैसला लिया। उनका शव तब से वहीं रखा हुआ है।

उनकी मांगों में से एक यह भी थी कि 2023 में हुए उन पर हमले की जांच को एक केंद्रीय एजेंसी आगे बढ़ाए, जिसमें अब तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया था। ज़ोमी परिषद ने इम्फाल स्थित राज्य सरकार से अलग प्रशासनिक ढांचे की ज़ो समूहों की व्यापक मांग के प्रति “भारत सरकार द्वारा समयबद्ध कार्रवाई” की भी मांग की थी।

जोमी परिषद के एक नेता ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि वाल्टे को शनिवार को दफनाने का निर्णय परिवार की इच्छा के अनुरूप लिया गया था। नेता ने कहा कि यह निजी कारणों से है। उनकी पत्नी काफी अस्वस्थ हैं, और उनके शव को दफनाए बिना छोड़ने से उन पर मनोवैज्ञानिक रूप से बुरा असर पड़ेगा। यही मुख्य कारण है।

एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि चुराचंदपुर के अधिकारियों को मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के शनिवार को वाल्टे के अंतिम संस्कार के लिए चुराचंदपुर आने की संभावना की जानकारी दी गई है। संघर्ष शुरू होने के बाद से न तो उन्होंने और न ही उनके पूर्ववर्ती एन बीरेन सिंह ने कुकी-जोमी बहुल जिले का दौरा किया था। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय के सदस्यों ने कहा है कि इस दौरे की अभी पुष्टि नहीं हुई है और इस पर शनिवार सुबह फैसला लिया जाएगा।

मणिपुर में फिर तनाव: नागा नाकाबंदी के खिलाफ सड़क पर उतरे कुकी-जो, सुरक्षाबलों ने दागे आंसू गैस के गोले

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में 1 जुलाई को तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। इसकी वजह यह रही कि कुकी-जो प्रदर्शनकारियों ने कांगपोकपी और इम्फाल पश्चिम जिलों की सीमा पर प्रदर्शन किया और कांगपोकपी में राष्ट्रीय राजमार्ग-2 के रास्ते आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बहाल करने की मांग की। पढ़ें पूरी खबर।