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बेंगलुरु में अमित शाह के इस करीबी विधायक पर है एमपी के बागी कांग्रेस विधायकों की जिम्मेदारी, 20 दिन पहले ही दिल्ली में किया गया था ब्रीफ

इससे पहले भी लिंबावली ने कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस के 17 विधायकों को बचाने में अहम भूमिका निभाई थी, जिससे राज्य में बीजेपी को बहुमत हासिल करने और सरकार बनाने में मदद मिली थी।

इस्तीफा देने वाले मध्य प्रदेश के छह राज्य मंत्रियों सहित 19 कांग्रेस विधायक। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

मध्य प्रदेश की कमल नाथ सरकार को हटाने के लिए कांग्रेस के बागी विधायकों को शरण देने में मुख्य भूमिका कर्नाटक के महादेवपुर से बीजेपी विधायक अरविंद लिंबावली (53) निभा रहे हैं। वह पार्टी से तीसरी बार विधायक बने हैं। बेंगलुरु में रुके कांग्रेसी विधायकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उन्हीं के पास है। वह बीजेपी की राज्य इकाई में महामंत्री हैं। इससे पहले भी लिंबावली ने कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस के 17 विधायकों को बचाने में अहम भूमिका निभाई थी, जिससे राज्य में बीजेपी को बहुमत हासिल करने और सरकार बनाने में मदद मिली थी।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के विश्वासपात्र बीजेपी नेता अरविंद लिंबावली को बीस दिन पहले ही दिल्ली बुलाया गया था। उनसे कांग्रेस के बागी विधायकों को शरण देने की संभावना को लेकर बातचीत की गई थी। बीजेपी के एक सूत्र के मुताबिक, “उन्होंने बेंगलुरु में विधायकों को रखने में एक केंद्रीय भूमिका निभाई है। दिल्ली में ही चर्चा के दौरान उन्हें पूरी रणनीति समझाई गई थी।”

मार्च के पहले सप्ताह में बेंगलुरु पहुंचे तीन विधायकों को पूर्वी बेंगलुरु में लिंबावली के निर्वाचन क्षेत्र के गेटेड कम्युनिटी परिसर में रखा गया था। बताया जा रहा है यह मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के परिवार से जुड़े एक बिल्डर का परिसर है। सोमवार को पहुंचे 19 विधायकों का दूसरा जत्था बेंगलुरु एयरपोर्ट के पास प्रेस्टीज गोल्फशेयर रिसोर्ट में ठहराया गया था। कर्नाटक के बीजेपी नेता इस पर कुछ भी नहीं बोल रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि लिंबावली ने सीएम येदियुरप्पा के साथ केवल जानकारी साझा की है।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता स्व. एचएन अनंत कुमार के निकट सहयोगी और तत्कालीन पार्टी प्रमुख अमित शाह और राज्यसभा सदस्य राजीव चंद्रशेखर जैसे भाजपा के केंद्रीय नेताओं के साथ संबंध की वजह से लिंबावली को पिछले साल राज्य का पार्टी प्रमुख बनाए जाने की पूरी संभावना थी। हालांकि बाद में कुछ विवादित वीडियो जारी होने की वजह से उन्हें यह पोस्ट नहीं मिल सका था। इस वीडियो के चलते उन्हें मंत्रीमंडल में भी जगह नहीं मिल सकी थी। बाद में फॉरेंसिक जांच में वह वीडियो भी नकली साबित हुआ।

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