भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन इन दिनों चर्चा में छाए हुए हैं। चर्चा है अध्यक्ष बनने के बाद से वह अपनी नई टीम बनाने पर कार्य कर रहे हैं। खबर आ रही है कि अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में शामिल होने वाले नेताओं को अग्नि परीक्षा यानी ऑडिशन देना होगा। इसमें पास होने के बाद ही उनकी टीम का हिस्सा बना जा सकता है।
अब सवाल उठता है कि यह किस तरह का ऑडिशन होगा, तो इस पर सूत्रों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनावों के लिए देश भर से चुने जा रहे भाजपा नेताओं को उनके प्रदर्शन के आधार पर नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में शामिल किया जाएगा।
असम के लिए बनी टीम
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के करीब एक दर्जन नेताओं की असम विधानसभा चुनाव के लिए जांच-पड़ताल की गई है। इनमें से कुछ नेताओं का राजधानी के बड़े नेताओं के साथ बेहतर संबंध हैं। असम उन राज्यों में से एक हैं जहां चुनाव होने हैं और नितिन नवीन ने अध्यक्ष बनने के लिए राज्य का दौरा किया था। तमिलनाडु , केरल, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के लिए भी आगामी दिनों में इसी तरह की टीमें बनाने की प्रक्रिया चल रही है। इन चारों राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में अगले कुछ माह में चुनाव होने हैं।
कौन-कौन है टीम में?
एक भाजपा नेता ने कहा, “असम के लिए बनाई गई यह टीम युवा और अनुभवी नेताओं को लेकर बनाई गई है, जो राज्य में भाजपा, संघ और राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच पुल का काम करेगी। इसका नेतृत्व राज्य चुनाव प्रभारी बैजयंत जय पंडा कर रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने पिछले सप्ताह इस टीम का गठन किया था।”
एक अन्य नेता ने कहा, “टीम में शामिल होने के लिए चुने गए नेताओं में सांसद बंसुरी स्वराज, परवेश वर्मा, अनिल शर्मा और पवन शर्मा आदि को एक या दो लोकसभा सीटों में चुनाव संबंधी मामलों के लिए प्रबंधन के लिए विशिष्ट राज्यव्यापी कार्य दिए गए हैं।”
एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि इस टीम में राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश और राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर जैसे अनुभवी लोगों के नाम शामिल हैं।
डेमोगेफ्रिक और बूथ-स्तरीय प्रबंधन से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण करने से लेकर वोटरों के बीच धारणा बनाने जैसे विशिष्ट कर्तव्य तक, इन नेताओं के पास कई कार्य होंगे। एक सूत्र ने बताया कि उनके प्रदर्शन के आधार पर ही नितिन नवीन के कार्यकाल के दौरान उन्हें व्यापक संगठनात्मक संरचना में स्थान दिया जाएगा।
भाजपा के नेता ने बताया कि असम से चुने गए नेताओं के संघ से संबंध हैं और वे छात्र संगठन एबीवीपी और भाजपा युवा मोर्चा में काम करते हुए आगे बढ़े हैं। दिल्ली से चुने गए दोनों विधायक दशकों से भाजपा संगठन में सक्रिय हैं, जबकि स्वराज और वर्मा को भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के करीबी माना जाता है।
भाजपा के एक नेता ने कहा, जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, ये नेता चुनाव तैयारियों की निगरानी में अधिक से अधिक समय बिताएंगे और टिकट वितरण से संबंधित निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि ये सभी नेता पहले ही असम का दौरा कर चुके हैं और वहां के मौजूदा संगठनात्मक नेतृत्व से परिचित हो चुके हैं।
आगे कहा, “तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में इसी तरह के कर्तव्यों के लिए और अधिक नेताओं की पहचान की जा रही है। पार्टी अन्य राज्यों में तैनात किए जा रहे ऐसे नेताओं के प्रदर्शन का चुनाव परिणाम के बाद विश्लेषण करने से नई व्यवस्था के तहत उनके संगठनात्मक उन्नति में बढ़ोतरी होने की संभावना है।”
क्यों है यह अलग?
ऐसा नहीं है कि यह पहली बार है कि जब राष्ट्रीय स्तर के भाजपा नेताओं को चुनाव संबंधी कार्यों के लिए विभिन्न राज्यों में तैनात किया गया है। लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, इस बार नए अध्यक्ष के नेतृत्व में संगठनात्मक निरंतरता बनाए रखने का एक और पहलू भी है। एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा कि इसका मतलब है कि यह भी है कि नितिन नवीन की नई टीम और उससे जुड़े संगठनात्मक परिवर्तनों में अभी कुछ समय लगेगा। कहा जा रहा कि 45 वर्षीय नितिन नवीन की टीम में नए चेहरों और अनुभवी नेताओं का मिश्रण रहने की उम्मीद है।
मंत्रिमंडल में भी फेरबदल की संभावना
इसके अलावा, भाजपा के अंदरूनी सूत्रों ने यह भी कहना कि इस साल राज्यसभा से कई प्रमुख नेताओं के रिटायर होने की संभावना है और एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल के आधे पड़ाव पर पहुंचने के साथ ही मंत्रिमंडल में फेरबदल भी हो सकता है। आगे पढ़िए शहरी क्षेत्रों पर फोकस से लेकर टीम कॉम्बिनेशन तक… राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन के शुरुआती फैसले का क्या है संदेश?
