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मस्जिद मुसलमानों के लिए मक्का-मदीना नहीं: ज्ञानवापी मामले पर बोलीं उमा भारती, कांग्रेस और ओवैसी को भी घेरा

ज्ञानवापी मसले पर उमा भारती ने कहा कि वाराणसी में आस्था का टकराव नहीं है। वाराणसी में तो सर्वे की भी जरूरत नहीं थी, दीवारों पर प्रमाण मौजूद हैं।

Uma Bharti
उमा भारती (सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में कहा था कि ज्ञानवापी मस्जिद थी है और रहेगी। उनके इस बयान पर अपने विचार प्रकट करते हुए मध्य प्रदेश की पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि मस्जिद मुसलमानों के लिए मक्का-मदीना नहीं है।

AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के बयान, “तुमने मक्कारी से बाबरी मस्जिद को छिना, लेकिन अब ज्ञानवापी को नहीं छीन पाओगे। ज्ञानवापी मस्जिद थी है और रहेगी।” पर जवाब देते हुए उमा भारती ने कहा, “कई अरब देशों और पाकिस्तान में मस्जिद तोड़कर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाए गए हैं। ज्ञानवापी मस्जिद मुसलमानों के लिए कोई मक्का-मदीना या अजमेर शरीफ की दरगाह नहीं।”

बीजेपी नेत्री ने आगे कहा, “ओवैसी साहब बहुत पढ़े-लिखे आदमी हैं लेकिन कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति के चलते उदारवादी मुस्लिम नेताओं को अपमानित किया और चरमपंथियों को सर पर बैठाया। इसका नतीजा है कि हर चरमपंथी मुस्लिम नेता को लगता है कि वो कट्टर मुसलमानों का साथ नहीं देगा तो चुनाव नहीं जीत पाएगा।”

1947 के हालात अब नहीं बन सकते: जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने हाल ही में कहा था कि देश में धीरे-धीरे 1947 जैसे हालात बनते जा रहे हैं। इस पर उमा भारती ने कहा कि भारत में 1947 की स्थिति का कारण कांग्रेस की सरकार थी। नेहरू जी ने उस समय महात्मा गांधी की भी बात नहीं मानी थी और नेहरू और जिन्ना की आकांक्षा के कारण भारत के दो टुकड़े हो गए। उमा भारती ने कहा, “आज सत्ता में बीजेपी है ऐसे में 1947 के हालात न बन सकते हैं ना बनाने के बारे में कोई सोच सकता है, हां इसका उल्टा जरूर हो सकता है।”

उन्होंने कहा, “ऐसा जरूर हो सकता है कि पीओके भी हमारा हो जाए। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भी हम लेकर रहेंगे।” बीजेपी नेता ने कहा कि हम धारा 370 को हटा चुके हैं, सीएए भी ला चुके हैं तो अब 1947 को उलटने की तैयारी है। हाल ही में उठाए गए नारे ‘अयोध्या तो झांकी है, मथुरा-काशी अभी बाकि है’ पर जवाब देते हुए भाजपा नेत्री ने कहा कि अयोध्या, मथुरा और काशी हिंदुओं की आस्था के केंद्र हैं।

उमा भारती ने कहा , “आज भी करोड़ों हिंदू जब इन स्थानों पर माथा टेकने जाते हैं और देखते हैं कि हम अपने आराध्य के मूल स्थान पर माथा नहीं टेक सकते तो बेहद अपमानित महसूस करते हैं।” उन्होंने कहा कि बहुसंख्यक समाज की तिलमिलाहट के बीच आप सामाजिक सद्भाव की कल्पना नहीं कर सकते।

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