बीजेपी नेता ने देश के पहले शिक्षा मंत्री को बताया अनपढ़, कांग्रेस नेता ने कहा- व्हाट्सएप पर पढ़ी चीजें न बताएं, मौलाना अबुल कलाम थे अच्छे खासे पढ़े लिखे

मौलाना अबुल कलाम आजाद कवि, लेखक, पत्रकार, नेता और स्वतंत्रता सेनानी थे। साल 1923 में वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सबसे कम उम्र के प्रेसीडेंट बने थे।

Maulana Abul Kalam
मौलाना अबुल कलाम आजाद देश के पहले शिक्षा मंत्री थे।(Source: Wikipedia)

यूपी के लखीमपुर में हुई हिंसा का मामला इस समय चर्चा में है। इसी मुद्दे को लेकर एक डिबेट में बीजेपी नेता अश्विनी साहनी ने देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम को अनपढ़ बता डाला और कहा कि अगर देश का पहला शिक्षामंत्री अनपढ़ हो सकता है तो गृह मंत्री भी कोई भी हो सकता है। बीजेपी को आज सारे विरोधी नैतिकता का पाठ समझा रहे हैं, ये नहीं होना चाहिए।

ये डिबेट ‘सत्य हिंदी’ पर हो रही थी, जिसमें सीनियर पत्रकार आशुतोष और संजय शर्मा भी मौजूद थे। बीजेपी नेता अश्विनी के बयान के बाद डिबेट में मौजूद कांग्रेस नेता गुरुदीप सप्पल ने पलटवार करते हुए कहा कि व्हाट्सऐप पर पढ़ी चीजें यहां ना बताएं। देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम थे और वह अच्छे खासे पढ़े लिखे थे।

सप्पल ने कहा कि अगर अनपढ़ शिक्षा मंत्री की बात करेंगे तो शायद 8वीं पास शिक्षा मंत्री पीएम मोदी की कैबिनेट में थीं और 24 मंत्री जो बीजेपी ने बनाए हैं, उसमें से 10 मंत्री 10वीं पास हैं और 4 मंत्री 12वीं पास हैं। अनपढ़ लोगों को मंत्री बीजेपी बनाती रही है इसलिए व्हाट्सऐप के मैसेज को पब्लिश प्लेटफॉर्म पर मत लाइए।

इस वीडियो को कई मीडिया हाउस में अहम जिम्मेदारियां निभा चुके विनोद कापड़ी ने ट्विटर पर पोस्ट किया है। इसका कैप्शन उन्होंने लिखा है कि आनंद ना आए तो पैसे वापस।

मौलाना अबुल कलाम कौन थे

मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्म 11 नवंबर, 1888 मक्का (उस्मानी साम्राज्य) को हुआ था। साल 1890 में उनके पिता वापस भारत लौट आए थे।

मौलाना अबुल कलाम आजाद कवि, लेखक, पत्रकार, नेता और स्वतंत्रता सेनानी थे। साल 1923 में वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सबसे कम उम्र के प्रेसीडेंट बने थे।

देश की आजादी के बाद वह यूपी के रामपुर से साल 1952 में सांसद बने थे। उन्होंने देश के पहले शिक्षा मंत्री के पद पर रहकर समाज को नई दिशा दी। वे महात्मा गांधी के सिद्धांतो पर चलते थे।

उन्हें अलग मुस्लिम राष्ट्र (पाकिस्तान) के सिद्धांत का विरोध करने वाले मुस्लिम नेताओ में से एक माना जाता है। मौलाना आजाद को ही आईआईटी और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना का श्रेय जाता है। साल1992 में उन्हें मरणोपरान्त भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

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