किसान आंदोलनः लिखा था तुमने ही ये मजमून…ये रंग-ए-सियासत ठीक नहीं, भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने शरद पवार की चिट्ठी के जरिये साधा निशाना

राज्य APMC कानून में संशोधन की अपेक्षा जताते हुए उन्होंने पत्र में लिखा था कि ‘इसके लिए कोल्ड स्टोरेज समेत विपणन ढांचे में बड़े निवेश की जरूरत होगी। इसके लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी जरूरी है जिसके लिए एक उचित नियामक तथा नीतिगत माहौल चाहिए होगा।’

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NCP चीफ शरद पवार। फाइल फोटो

किसानों का आंदोलन 11 दिन से जारी है। 8 दिसंबर को किसानों ने भारत बंद का ऐलान किया है। कई राजनीतिक पार्टियां किसानों के भारत बंद का समर्थन कर रही हैं। एनसीपी ने भी किसानों का समर्थन किया है। लेकिन इस बीच सोशल मीडिया पर एनसीपी प्रमुख शरद पवार द्वारा लिखी गई एक चिट्ठी काफी वायरल हो रही है। यह चिट्ठी उस वक्त लिखी गई थी जब शरद पवार कृषि मंत्री थे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता सुधांशु त्रिवेदी ने इस चिट्ठी को अपने आधिकारी ट्विटर हैंडर से शेयर करते हुए शरद पवार पर निशाना साधा है। सुधांशु त्रिवेदी ने शरद पवार की चिट्ठी शेयर करते हुए लिखा है कि “इस रंग बदलती दुनिया में, इंसान की नीयत ठीक नहीं। लिक्खा था तुम्हीं ने ये मज़मून, ये रंग-ए-सियासत ठीक नहीं।”

दरअसल शरद पवार ने विभिन्न राज्यों को एक चिट्ठी लिखी थी और किसानों के हित के लिए मंडी एक्ट में बदलाव करने का सुझाव दिया था। जो चिट्ठी भाजपा नेता ने शेयर किया है उसमें शरद पवार ने लिखा है कि ‘आप इस बात से निश्चित तौर पर सहमत होंगे कि कृषि क्षेत्र को बेहतर बाजार की जरुरत है ताकि ग्रामीण इलाकों में विकास, रोजगार और आर्थिक संरचना को ठीक किया जा सके। इसके लिए जरुरी है कि मंडी एक्ट में बदलाव, कृषि क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर का आना ताकि किसानों को कहीं भी अपनी फसल बेचने का अवसर मिले।’ इसके लिए मौजूदा APMC एक्ट में बदलाव जरुरी है ताकि निजी क्षेत्र को बाजार में निवेश का मौका मिला जिससे बाजार में कंपटीश्न बढ़ेगा। यह किसानों, उपभोक्ताओं और कृषि उद्योग के हित में होगा।’

 

चिट्ठी में लिखा गया था कि कृषि सेक्टर को फायदा पहुंचाने के लिए अच्छी तरह से संचालित होने वाले बाजारों की जरूरत होगी। राज्य APMC कानून में संशोधन की अपेक्षा जताते हुए उन्होंने पत्र में लिखा था कि ‘इसके लिए कोल्ड स्टोरेज समेत विपणन ढांचे में बड़े निवेश की जरूरत होगी। इसके लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी जरूरी है जिसके लिए एक उचित नियामक तथा नीतिगत माहौल चाहिए होगा।’

हालांकि शरद पवार की इस चिट्ठी को लेकर अब एनसीपी की तरफ से सफाई भी सामने आ गई है। राकांपा के प्रवक्ता महेश तपासे ने एक बयान में कहा, ‘केंद्रीय कृषि मंत्री के तौर पर कार्यभार संभालने के बाद पवार ने राज्यों के कृषि विपणन बोर्डों के साथ व्यापक सहमति बनाने की कोशिश की और कानून को लागू करने के लिए उनसे सुझाव मांगे थे।’ तपासे ने कहा कि एपीएमसी काननू के प्रारूप के अनुसार किसानों को होने वाले फायदे के बारे में पवार ने कई राज्य सरकारों को अवगत कराया, जिसे लागू करने पर वे सहमत हुए।

इधर शरद पवार की चिट्ठी वायरल होने के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘उन्होंने तब राज्यों को पत्र लिखकर चेतावनी भी दी थी कि जो इन्हें लागू नहीं करेगा उनकी आर्थिक सहायता बंद कर दी जाएगी। अब अचानक सारी पार्टियां इन कानूनों से सहमत नहीं है। ये विपक्षी दल का घटिया काम और दोगलापन है इसकी निंदा की जानी चाहिए।’

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