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एयर इंडिया को बेचने के खिलाफ भाजपा सांसद, कहा- यह सौदा राष्ट्र विरोधी, सरकार के इस कदम के खिलाफ कोर्ट जाऊंगा

सरकार ने ‘एयर इंडिया’ में 100 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री के लिए आज एक प्रारंभिक सूचना ज्ञापन जारी किया। निविदा दस्तावेज के अनुसार रणनीतिक विनिवेश के तौर पर एयर इंडिया ‘एयर इंडिया एक्सप्रेस’ की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी और संयुक्त उद्यम एआईएसएटीएस की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगा।

राज्यसभा से BJP सांसद सुब्रमण्यम स्वामी। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः गजेंद्र यादव)

राज्यसभा सांसद और भाजपा के दिग्गज नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने केंद्र सरकार द्वारा एयर इंडिया में 100 फीसदी हिस्सेदारी की ब्रिकी की ऐलान पर तीखी आलोचना की है। सोमवार (27 जनवरी, 2020) को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भाजपा सांसद ने कहा कि वो सरकार के इस कदम के खिलाफ कोर्ट जाएंगे। बता दें कि सरकार ने ‘एयर इंडिया’ में 100 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री के लिए आज एक प्रारंभिक सूचना ज्ञापन जारी किया। निविदा दस्तावेज के अनुसार रणनीतिक विनिवेश के तौर पर एयर इंडिया ‘एयर इंडिया एक्सप्रेस’ की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी और संयुक्त उद्यम एआईएसएटीएस की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगा।

निविदा में आगे कहा गया कि एयरलाइन के प्रबंधन पर नियंत्रण सफल बोली लगाने वाले को हस्तांतरित किया जाएगा। सरकार ने रुचि पत्र जमा कराने की समयसीमा 17 मार्च तय की है। सरकार की इसी घोषणा पर स्वामी ने ट्वीट कर कहा, ‘एयर इंडिया के विनिवेश की प्रक्रिया आज फिर से शुरू हो रही है। ये डील पूरी तरह से राष्ट्र विरोधी है और मैं इसके खिलाफ कोर्ट जाने के लिए बाध्य हूं। हम अपने परिवार के रत्न नहीं बेच सकते।’ भाजपा सांसद के ट्वीट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाएं भी आने शुरू हो गई हैं।

ट्विटर यूजर अभय लिखते हैं, ‘मैं एयर इंडिया की बिक्री का समर्थन करता हूं। इसमें करदाताओं का पैसा बर्बाद करने की कोई वजह नहीं है।’ एक यूजर लिखते हैं, ‘सरकार एक एयलाइन चला रही है और करदाताओं का पैसा बर्बाद करना देश विरोधी नहीं है। कृपया प्रस्ताव को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने दें।’

ट्विट यूजर सत्तू लिखते हैं, ‘बड़ी-बड़ी बात करके सरकार में आए थे, क्या हुआ? देश की अर्थव्यवस्था चलाने के लिए दिमाग चाहिए।’ द लाई लामा नाम से यूजर लिखते हैं, ‘एयर इंडिया हमारे खजाने में सेंध लगा रही है। हमारी अर्थव्यवस्था को और अधिक नुकसान से कैसे बचाया जा सकता है, इसे राष्ट्र-विरोधी करार दिया जाता है? इस कल्पना करना बंद करिए।’

आरएससी लिखते हैं, ‘माफ कीजिए सर… मैं आपकी बात से सहमत नहीं हूं। किसी भी पीएसयू को मृत घोड़े को खिलाने के लिए करोड़ों करदाताओं के पैसे बेकार में खर्च करने का अधिकार नहीं है। एयर इंडिया तीस साल पहले ही बिक जानी चाहिए थी।’

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