ताज़ा खबर
 

भाजपा सदस्य ने की स्वच्छता अभियान की तरह ही प्रदूषण मुक्ति के लिए भी अभियान चलाने की मांग की

भाजपा के ही सी एम रमेश ने कम वर्षा होने की वजह से दक्षिण भारत में सूखे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा ‘‘वर्षा की कमी 28 फीसदी दर्ज की गई है और पिछले साल भी मानसून कमजोर रहने की वजह से पर्याप्त बारिश नहीं हुई थी। 44 फीसदी हिस्सा सूखाग्रस्त है। इसमें से 17 फीसदी हिस्से में भीषण सूखा पड़ रहा है।’’

Author नई दिल्ली | July 25, 2019 3:37 PM
शून्यकाल के दौरान भाजपा सदस्य सत्यनारायण जटिया ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा ‘‘प्रकति का संतुलन बिगड़ रहा है और जलवायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं। वर्षा समय पर न होने से कृषि पर असर पड़ता है और अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित होती है। इससे बचने के लिए नदियों को चरणबद्ध तरीके से जोड़ा जाना चाहिए।’’

जलवायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों पर चिंता जताते हुए राज्यसभा में बृहस्पतिवार को भाजपा के एक सदस्य ने मांग की कि स्वच्छता अभियान की तरह ही प्रदूषण मुक्ति के लिए भी चरणबद्ध तरीके से अभियान चलाया जाना चाहिए । शून्यकाल के दौरान भाजपा सदस्य सत्यनारायण जटिया ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा ‘‘प्रकति का संतुलन बिगड़ रहा है और जलवायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं। वर्षा समय पर न होने से कृषि पर असर पड़ता है और अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित होती है। इससे बचने के लिए नदियों को चरणबद्ध तरीके से जोड़ा जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि अस्थमा तथा अन्य बीमारियों का कारण बढ़ता वायु प्रदूषण है। भूजल नीचे जा रहा है और शहर का अपशिष्ट नदियों के पानी को प्रदूषित कर रहा है। ’’ जटिया ने कहा कि स्वच्छता अभियान की तरह ही प्रदूषण मुक्ति के लिए भी चरणबद्ध तरीके से अभियान चलाया जाना चाहिए ताकि इसके दुष्प्रभावों से बचा जा सके। विभिन्न दलों के सदस्यों ने उनके इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया।

भाजपा के ही सी एम रमेश ने कम वर्षा होने की वजह से दक्षिण भारत में सूखे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा ‘‘वर्षा की कमी 28 फीसदी दर्ज की गई है और पिछले साल भी मानसून कमजोर रहने की वजह से पर्याप्त बारिश नहीं हुई थी। 44 फीसदी हिस्सा सूखाग्रस्त है। इसमें से 17 फीसदी हिस्से में भीषण सूखा पड़ रहा है।’’ रमेश ने मांग की कि गोदावरी नदी को कावेरी नदी से जोड़ा जाना चाहिए क्योंकि गोदावरी में पर्याप्त पानी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि इस नदी को कावेरी नदी से जोड़ने पर वह 3000 टीएमसी पानी दक्षिणी राज्यों को उपलब्ध हो जाएगा जो बह कर समुद्र में चला जाता है। द्रमुक और अन्नाद्रमुक सदस्यों ने उनके इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया।

तृणमूल कांग्रेस की शांता क्षेत्री दार्जिलिंग में स्थित लेबॉन्ग सैन्य अस्पताल को असम स्थानांतरित किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इस अस्पताल के स्थानांतरण से सेवानिवृत्त हो चुके गोरखा सैन्य कर्मी को खासी दिक्कत होगी। उन्हें इलाज के लिए बहुत दूर जाना पड़ेगा। शांता ने कहा कि अस्पताल में लंबे समय से विशेषज्ञ डॉक्टर की नियुक्ति नहीं की गई है। उन्होंने मांग की कि सरकार को अपने फैसले पर पुर्निवचार करना चाहिए।

माकपा की झरना दास वैद्य ने अनुबंध पर काम कर रहे शिक्षकों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई कई साल से शिक्षक अनुबंध पर काम कर रहे हैं और उन्हें नियमित नहीं किया जा रहा है। बिहार में नियमित किए जाने की मांग को लेकर 18 जुलाई को शिक्षकों ने आंदोलन किया।
झरना ने कहा कि त्रिपुरा में 10323 शिक्षक अनुबंध पर काम कर रहे हैं। इसी तरह की स्थिति पश्चिम बंगाल, बिहार, दिल्ली, हरियाणा और अन्य राज्यों में भी है।

Next Stories
1 DGP रहे बीजेपी सांसद विष्णु दयाल राम ने जैश-ए-सरगना को संसद में दी इज्जत, आतंकी को कहा ‘मसूद जी’
2 “जब आपको जल्दी होती है तो आधी रात चले आते हो, मैं बुलाऊं तो आते नहीं”, कर्नाटक मुद्दे पर CJI नाराज
3 Kargil Vijay Diwas 2019 Speech, Essay: विजय दिवस के भाषण के लिए ऐसे करेंगे तैयारी तो हर कोई करेगा वाह-वाह
यह पढ़ा क्या?
X