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गाय के बछड़े के खून से बनती है वैक्सीन? कांग्रेस के आरोप पर संबित बोले- महापाप कर रहे ये लोग

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान जारी करके कहा कि सोशल मीडिया की कुछ पोस्ट में तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर एवं अनुचित ढंग से पेश किया गया है कि स्वदेश निर्मित कोवैक्सीन में नवजात बछड़े का सीरम है।

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा। (फोटो- यूट्यूब)

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने बुधवार को एक प्रेस कॉफ्रेंस करके कहा कि कांग्रेस पार्टी ने महापाप किया है। कहा कि पूरा हिंदुस्तान जिस प्रकार से कोविड की दूसरी लहर से मुकाबला करते हुए वैक्सीनेशन के माध्यम से आगे बढ़ रहा है, उसके खिलाफ भारत कांग्रेस पार्टी भ्रम फैला रही है। यह महापाप है। कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि कोवैक्सीन में गाय के बछड़े का सीरम/खून होता है। पार्टी यह भ्रम फैला रही है कि गाय के बछड़े को मारकर ये वैक्सीन तैयार की गई है। पात्रा ने कहा कि जब हमने ट्विटर और सोशल मीडिया पर इस आरोप को देखा तो हिंदुस्तान सरकार तुरंत आगे आकर स्पष्ट रूप से बता रही है कि कोवैक्सीन में किसी भी प्रकार के गाय या बछड़े का सीरम नहीं है। यह वैक्सीन पूर्णतः सेफ है और इसमें किसी भी प्रकार का अपभ्रंश नहीं है।

इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान जारी करके कहा कि सोशल मीडिया की कुछ पोस्ट में तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर एवं अनुचित ढंग से पेश किया गया है कि स्वदेश निर्मित कोवैक्सीन में नवजात बछड़े का सीरम है। मंत्रालय ने कहा कि नवजात बछड़े के सीरम का इस्तेमाल केवल वेरो कोशिकाएं तैयार करने और उनके विकास के लिए ही किया जाता है। गोवंश तथा अन्य पशुओं से मिलने वाला सीरम एक मानक संवर्धन संघटक है जिसका इस्तेमाल पूरी दुनिया में वेरो कोशिकाओं के विकास के लिए किया जाता है।

वेरो कोशिकाओं का उपयोग ऐसी कोशिकाएं बनाने में किया जाता है, जो टीका उत्पादन में मददगार होती हैं। पोलियो, रैबीज और इन्फ्लुएंजा के टीके बनाने के लिए इस तकनीक का दशकों से इस्तेमाल होता आ रहा है। मंत्रालय ने कहा कि वेरो कोशिकाओं के विकसित होने के बाद उन्हें पानी और रसायनों से अच्छी तरह से अनेक बार साफ किया जाता है, जिससे कि ये नवजात बछड़े के सीरम से मुक्त हो जाते हैं।

इसके बाद वेरो कोशिकाओं को कोरोना वायरस से संक्रमित किया जाता है ताकि वायरस विकसित हो सके। इस प्रक्रिया में वेरो कोशिकाएं पूरी तरह से नष्ट हो जाती हैं। इसके बाद विकसित वायरस को भी नष्ट (निष्प्रभावी) और साफ किया जाता है।

नष्ट या निष्प्रभावी किए गए वायरस का इस्तेमाल अंतत: टीका बनाने के लिए किया जाता है। बयान के मुताबिक अंतिम रूप से टीका बनाने के लिए बछड़े के सीरम का बिलकुल भी इस्तेमाल नहीं किया जाता। उसने कहा, “अत: अंतिम रूप से जो टीका (कोवैक्सीन) बनता है उसमें नवजात बछड़े का सीरम कतई नहीं होता और यह अंतिम टीका उत्पाद के संघटकों में शामिल नहीं है।”

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