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पेट्रोल डीजल के दाम कांग्रेस की देन, हम तो गलतियों को सुधारने की कोशिश कर रहे-बोले बीजेपी सांसद शर्मा

सांसद महेश शर्मा ने कहा, "हमारी सरकार विचार कर रही है कि क्या पेट्रोल और डीजल को भी जीएसटी के अंदर लाया जाए। ये विषय अभी सरकार के संज्ञान में है। जब भी प्रदेश की सरकारें इस पर कहेंगी, इसका निराकरण होगा।"

भाजपा सांसद महेश शर्मा। (फोटो सोर्स- रेणुका पुरी- इंडियन एक्सप्रेस)

देश में बढ़ती महंगाई और और अर्थव्यवस्था में मंदी को लेकर भाजपा सांसद महेश शर्मा ने कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि आज जो भी दिक्कत हो रही है, वह कांग्रेस सरकार की बनाई हुई व्यवस्था की वजह से है। कहा कि भाजपा सरकार व्यवस्था को दुरुस्त करने में लगी है, और जल्द ही इस महंगाई से निजात मिलेगी।

टीवी चैनल न्यूज-24 से बात करते हुए उन्होंने कहा, “पेट्रोल और डीजल के दाम में तेजी हमारी सरकारी की वजह से नहीं है। यह कांग्रेस सरकार की देन है, जब इन्होंने इसकी प्राइस को अंतरराष्ट्रीय प्राइस के साथ लिंक किया था। वह दर अब की सरकार या किसी मंत्री के हाथ में नहीं है। वह व्यवस्था जो कांग्रेस सरकार की बनाई हुई है, उसी के तहत आज इसकी दर बढ़ रही है। हम तो गलतियों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। मैं समझता हूं कि इस पर भी हमारी सरकार कदम उठा रही है कि क्या पेट्रोल और डीजल को भी जीएसटी के अंदर लाया जाए। ये विषय अभी सरकार के संज्ञान में है। जब भी प्रदेश की सरकारें इस पर कहेंगी, इसका निराकरण होगा।”

सांसद महेश शर्मा ने कहा, “अन्य चीजों की महंगाई को मैं समझता हूं कि इस कोरोना काल में हमारी सरकार ने, पीएम मोदी ने, मंत्रियों ने सही समय पर सही फैसला लेकर इतना बचाया है। मैं धन्यवाद देता हूं, अपने नागरिकों को उन्होंने इसको मैनेज किया।”

उधर, व्यापारियों का संगठन कैट ने बृहस्पतिवार को कहा कि एक अच्छी और सरल कर व्यवस्था की घोषित भावना के विपरीत जीएसटी औपनिवेशिक कराधान प्रणाली बन गया है और यह देश में कंपनियों की जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता।

कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने एक बयान में कहा कि पिछले कुछ समय में जीएसटी में कई संशोधन किये गये और नियम लाये गये। इससे अप्रत्यक्ष कर प्रणाली अधिक जटिल बन गयी है और व्यापारियों पर इसका बोझ पड़ रहा है।

कैट के अनुसार जीएसटी (माल एवं सेवा कर) कराधान प्रणाली को विकृत करने और उसमें असमानताओं तथा विसंगतियां लाने के लिए केवल केंद्र ही नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर राज्य सरकारें भी जिम्मेदार हैं, जिसने इसे और अधिक जटिल प्रणाली और व्यापारियों के लिए ‘बड़ा सिरदर्द’ बना दिया है।

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