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भाजपा नेता ने जामिया हिंसा पर कहा- कसाब भागकर अगर उस दिन लाइब्रेरी में घुस जाता तो निर्दोष कहलाता

कपिल मिश्रा का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब जामिया हिंसा में रविवार को तीन नए वीडियो सामने आए हैं। जिसके बाद जामिया हिंसा को लेकर नई बहस शुरू हो चुकी है।

जामिया हिंसा के दौरान पथराव और आगजनी की घटनाएं हुई थीं। (एक्सप्रेस फोटो)

अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने फिर कुछ ऐसा कह दिया है, जिसे लेकर हंगामा हो सकता है। दरअसल कपिल मिश्रा ने अपने एक ट्वीट में तंज कसते हुए कहा है कि यदि 26/11 के मुंबई आतंकी हमले का दोषी अजमल कसाब भागकर लाइब्रेरी में घुस जाता तो क्या उसे मासूम कहा जाता।

कपिल मिश्रा का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब जामिया हिंसा में रविवार को तीन नए वीडियो सामने आए हैं। जिसके बाद जामिया हिंसा को लेकर नई बहस शुरू हो चुकी है। कपिल मिश्रा ने सोमवार को ट्वीट कर लिखा कि “अगर उस दिन कसाब भागकर गन समेत लाइब्रेरी में घुस जाता तो इनोसेंट कहलाता…”

बता दें कि बीती 15 दिसंबर को सीएए के विरोध में जामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने विरोध मार्च निकाला था। इस दौरान विरोध प्रदर्शन में स्थानीय लोग भी शामिल हो गए थे, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया और हिंसा भड़क गई। हिंसा के बाद पुलिस ने उग्र भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जामिया के छात्रों पर लाइब्रेरी में घुसकर लाठियां बरसायीं थी। जिसे लेकर काफी विवाद हुआ था।

यूनिवर्सिटी कैंपस में पुलिस के घुसने और लाठियां बरसाने की खूब आलोचना हुई थी। अब उस घटना से जुड़ी तीन वीडियो रविवार को सामने आयी हैं। एक वीडियो रविवार की सुबह जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी द्वारा जारी किया गया, जिसमें पुलिसकर्मी नकाब बांधकर छात्रों पर लाठियां बरसाते नजर आ रहे हैं।

इसके बाद दो अन्य वीडियो भी सामने आए, जिनमें कुछ नकाबपोश युवा हाथों में पत्थर लेकर लाइब्रेरी में घुसते नजर आ रहे हैं। एक अन्य वीडियो में कुछ युवा मेज आदि लगाकर दरवाजा खुलने से रोकने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि कपिल मिश्रा ने इन्हीं वीडियो के आधार पर कसाब वाला बयान दिया है।

कपिल मिश्रा इससे पहले दिल्ली चुनाव को भारत-पाकिस्तान का मुकाबला भी बता चुके हैं। अपने उस बयान में कपिल मिश्रा ने दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में जारी धरने प्रदर्शन को निशाना बनाया था। उस बयान के लिए भी कपिल मिश्रा की काफी आलोचना हुई थी और चुनाव आयोग ने उनके खिलाफ कार्रवाई भी की थी।

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