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BJP नेता कैलाश विजयवर्गीय बोले- निर्भया के क्रूर हत्‍यारे की रिहाई पर मौन क्‍यों है अवॉर्ड वापसी गिरोह

कैलाश विजयवर्गीय ने साहित्यकारों पर निशाना साधते हुए पूछा है कि अब अवार्ड वापसी गिरोह चुप्‍पी क्यों साधे हुए है। साथ ही उन्होंने पूछा है कि क्या साहित्यकारों की आत्मा मर गयी है।
Author नई दिल्‍ली | December 21, 2015 05:45 am

भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने निर्भया गैंगरेप केस में दोषी नाबालिग की रिहाई पर साहित्यकारों की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने साहित्यकारों को सम्मान लौटाने वाले गिरोह करार दिया है। कैलाश विजयवर्गीय ने साहित्यकारों पर निशाना साधते हुए पूछा है कि अब अवार्डवापसी गिरोह चुप्‍पी क्यों साधे हुए है। साथ ही उन्होंने पूछा है कि क्या साहित्यकारों की आत्मा मर गयी है। विजयवर्गीय ने ये बात ट्वीट करके की है।उन्होंने ट्वीट में लिखा है कि अब साहित्यकारों की आत्मा मर गयी है क्या या कोई चुनाव नहीं चल रहा है जो वो लोग चुप्पी साधे हुए हैं। उन्हें देश को जवाब देने की आवश्यकता है।

निर्भया गैंगरेप केस के दोषी नाबालिग को रिहा किया जा रहा है। इस रिहाई के विरोध में प्रदर्शन कर रहे निर्भया के माता-पिता को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था, लेकिन बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। साथ ही पुलिस ने उन्हें में इंडिया गेट के बजाया जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की ‌इजाजत दी है। मामले पर इससे पहले रिहाई रोकने के लिए दिल्ली महिला आयोग ने अर्जी दी थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। वहीं, निर्भया की मां ने अर्जी पर कहा कि आज दोषी छूट जाएगा, तो फिर सुनवाई का क्या मतलब होगा।

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  1. A
    ajay
    Dec 21, 2015 at 6:35 am
    Sir ji aapki sarkar kya kar rhi hai Rapists ko rihariha Aapko majority diya ku a tha Aur ulta aaplog nirbhaya k mata pita ko Hi अरेस्ट करते है वाह रे मोदी सरकार RAPIST बहार aur उसके विरोधी करने वाले अक्रेस्टफ़ क्या बात क्या बात ,,,,, हरिओम
    (0)(0)
    Reply
    1. K
      Kamal K
      Dec 20, 2015 at 3:13 pm
      मैं ईनाम वापसी गिरोह (अगर ऐसा कोई गिरोह वास्तव में है तो) का कोई स्वयंभू प्रतिनिधि तो नहीं हूँ. लेकिन मुझे लगता है कि मौन और चिंता के फर्क को कैलास विजयवर्गीय जैसे आग लगाने वाले नेता कभी नहीं समझ सकते. यह समय सभी के लिए गंभीर चिंता और मनन का है. क्यों कि यह नाबालिग अपराधी उन सभी बलात्कारियों में सबसे ज्यादा हिंसक ठहराया गया है. इतनी कम उम्र में ऐसा हिंसक व्यव्हार क्या हमें अपनी सामाजिक भूमिका पर सोचने को मजबूर नहीं करता ? खासतौर से, तब, जब आप ये मानते हों कि अपराधी माँ के पेट से नहीं पैदा होते!
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      Reply
      1. R
        RKN
        Dec 21, 2015 at 9:22 am
        जब अवार्ड वापश कर रहे थे ,उस समय बिहार का चुनाव था , इसमें तो एक बलात्कारी को छोडा गया है ,इससे साहित्यकारों का क्या लेना देना ,जब चुनाव आयगे तब बचे हुए पुरुस्कार वापिश किये जायेगे ,क्यों की हमें तो केवल बीजेपी & मोदी का विरोध करना है, बाकि देश में क्या हो रहा है उससे लेना देना नहीं है :- अखिल भारतीय कुबुद्धिजीवी संघ
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        Reply
        1. O
          om
          Dec 21, 2015 at 12:55 am
          विजयवर्गियें जी आप ने भी तो भी कुछ नहीं किया गोवेर्मेंट आप की हैं केंद्र में
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          Reply