Maharashtra News: बकरीद से पहले महाराष्ट्र के मीरा-भयंदर में बकरा व्यापारियों के खिलाफ की गई कार्रवाइयों को लेकर बीजेपी के ही नेता हाजी अराफात शेख ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने राज्य की देवेंद्र फड़नवीस सरकार से परिवहन नियमों को स्पष्ट करने की मांग भी की और पूछा कि आखिर बकरियों को ले जाने वाले वाहनों को रोका क्यों जा रहा है?
दरअसल, बीजेपी नेता हाजी अराफात ने पीटीआई से बात करते हुए कहा, “मैंने बोला आपके इलाके के अंदर मीरा भयंदर में बकरे की गाड़ियां पकड़ी जा रही हैं। ओवरलोड के नाम पर कुछ संस्था आती है, पकड़ती है और पुलिस उसके ऊपर फाइन मारती है। गाय और बैल, इसका तो लेना देना नहीं, हमारा उससे कोई संबंध ही नहीं।”
गाड़ियों की रुकावट पर उठाए सवाल
बीजेपी नेता ने कहा कि मुस्लिम समाज और व्यापारी राज्य में लागू गौवंश हत्या बंदी कानून का पूरी तरह सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा, “जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि गौवंश को मारना नहीं चाहिए, वह हमारी माता है और धर्म का मामला है, तो 100% हमारा उससे कोई लेना-देना नहीं है। हम उसका पूरा समर्थन करते हैं। लेकिन हमारा सवाल यह है कि जब गाड़ियों में सिर्फ बकरे हैं, न गाय है, न बैल, तो बकरे की गाड़ियों को क्यों रोका जा रहा है?”
पुलिस और NGO की साठगांठ पर उठाए सवाल
हाजी अराफात शेख ने कानूनी प्रक्रियाओं का हवाला देते हुए स्थानीय पुलिस और जीव दया संस्थाओं को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि गाड़ियों में कथित तौर पर ओवरलोडिंग की समस्या है, तो बकरों को गौशाला क्यों भेजा जा रहा है? उन्हें देवनार (सरकारी स्लॉटर हाउस) या फिर स्थानीय कलेक्टर और तहसीलदार की कस्टडी में क्यों नहीं दिया जाता?
बीजेपी नेता ने तंज कसते हुए कहा कि ओवरलोड का मामला आरटीओ (RTO) के अधिकार क्षेत्र में आता है। पुलिस को गाड़ियां जब्त कर गौशाला भेजने का कोई अधिकार नहीं है, वे केवल तयशुदा जुर्माना कर सकती हैं। अरफात शेख ने इस कार्रवाई के मानवीय और आर्थिक पक्ष को सामने रखते हुए कहा कि गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और राजस्थान से गरीब किसान और व्यापारी साल भर की जमा-पूंजी लगाकर बकरे पालते हैं। वे इस उम्मीद में मुंबई आते हैं कि मुनाफा कमाकर बेटियों की शादी करेंगे या मां का इलाज कराएंगे।
कसाई और कुरैशी बिरादरी बर्बाद
उन्होंने आरोप लगाया, “मीरा-भयंदर पट्टी में 25-25 और 50-50 लाख की गाड़ियां उठा ली जाती हैं। कोर्ट बंद होने के कारण गाड़ियां फंसी रहती हैं। गौशालाओं में चारा-पानी न मिलने से बकरों का वजन 3-3 किलो घट जाता है और कई पशु मर जाते हैं। इस तरह कसाई और कुरैशी बिरादरी को बर्बाद किया जा रहा है।”
व्यापारियों की मजबूरी बताते हुए अराफात शेख ने कहा कि अचानक ब्रेक लगने पर बकरे गिरकर न मरें, इसलिए गाड़ियों में उन्हें सटाकर खड़ा करना पड़ता है। उन्होंने परिवहन मंत्रालय को एक निवेदन सौंपते हुए मांग की है कि सरकार खुद एक ‘केज सिस्टम’ की गाइडलाइंस तय कर दे, ताकि व्यापारी उसी के अनुसार गाड़ियां चलाएं और उन्हें ब्लैकमेल न किया जा सके।
खुले में कुर्बानी को लेकर की अपील
बीजेपी नेता ने मुस्लिम समाज से भी अपील की कि वे नियमों का सख्ती से पालन करें। उन्होंने कहा, “हम खुद बिल्डिंगों, सोसायटियों और रास्तों पर बकरे काटने या उन्हें खुले में लाने का विरोध करते हैं, क्योंकि इससे दमा या दिल के मरीजों को तकलीफ हो सकती है। सरकार ने हमें जो स्लॉटर हाउस दिए हैं, हम वहीं नियमों के तहत कुर्बानी करेंगे।”
सीएम से शिकायत करने की कही बात
बीजेपी नेता ने कहा कि वे इस मामले में कल ही मीरा-भयंदर के पुलिस कमिश्नर, स्थानीय विधायक प्रताप सरनाईक और सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस से मिलकर शिकायत सौंपेंगे, जिससे त्योहार के दौरान मुस्लिम समाज और व्यापारियों को अनावश्यक प्रताड़ना से बचाया जा सके।
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