गुजरात के वडोदरा में बीजेपी के एक नेता से उनके बेटे को निजी मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के नाम पर 55 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि पांच लोगों ने 2019 में मैनेजमेंट कोटा के जरिए मेडिकल सीट दिलाने का भरोसा देकर रकम ली, लेकिन न तो दाखिला कराया और न ही पैसे वापस किए। रकम लौटाने के लिए दिए गए चेक भी कथित तौर पर बाउंस हो गए।

मामले में वडोदरा के बीजेपी नेता मुकेश दीक्षित की शिकायत पर पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। 56 वर्षीय दीक्षित वडोदरा नगर निगम के पूर्व पार्षद रह चुके हैं और शहर बीजेपी की मीडिया विंग का नेतृत्व भी कर चुके हैं। दीक्षित के मुताबिक, उनके बेटे शिवांग ने 12वीं कक्षा साइंस स्ट्रीम से पूरी की थी और डॉक्टर बनना चाहता था, लेकिन NEET में कम रैंक आने के कारण उसे मेरिट के आधार पर मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं मिल सका।

NEET में कम रैंक के बाद मैनेजमेंट कोटा का सहारा

दीक्षित ने बताया कि बेटे को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के लिए उन्होंने निजी कॉलेजों के मैनेजमेंट कोटा में सीट तलाशनी शुरू की। अप्रैल 2019 में उन्हें मेडिकल कॉलेज में एडमिशन में मदद करने वाली एक एजेंसी का विज्ञापन मिला। एक परिचित ने भी इसी एजेंसी से संपर्क करने की सलाह दी थी।

इसके बाद उन्होंने मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे अजितेशकुमार सारंगी से संपर्क किया। दीक्षित के अनुसार, सारंगी ने भरोसा दिलाया कि उसकी एजेंसी उनके बेटे का मैनेजमेंट कोटा के जरिए निजी मेडिकल कॉलेज में दाखिला करा सकती है।

कर्नाटक, महाराष्ट्र या राजस्थान में सीट का दावा

शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने दीक्षित से कहा कि वे कर्नाटक, महाराष्ट्र या राजस्थान के किसी निजी मेडिकल कॉलेज में सीट दिला सकते हैं। इसके लिए करीब 60 लाख रुपये खर्च होने की बात कही गई। दीक्षित ने महाराष्ट्र और राजस्थान को प्राथमिकता दी क्योंकि वह अपने बेटे को कर्नाटक नहीं भेजना चाहते थे।

दीक्षित ने बताया कि उनकी बेटी पहले से ही मेरिट के आधार पर वडोदरा के सरकारी मेडिकल कॉलेज में मेडिकल की पढ़ाई कर रही थी और वह चाहते थे कि उनका बेटा भी मेडिकल क्षेत्र में अपना करियर बनाए।

पहले चेक, फिर 40 लाख रुपये कैश

दीक्षित के मुताबिक, आरोपियों ने शुरुआत में उनके बैंक खाते से करीब 60 लाख रुपये के तीन चेक लिए। इनमें से 15 लाख रुपये एक संस्था के खाते में जमा किए गए, जिसकी शिकायत में पहचान ‘ऑर्बिटल करियर’ के रूप में की गई है। इसके बाद बाकी चेक जमा नहीं किए गए।

जब दीक्षित ने एडमिशन की प्रक्रिया और आगे के भुगतान को लेकर आरोपियों से संपर्क किया तो कथित तौर पर उन्हें बताया गया कि चेक के जरिए भुगतान लेने में परेशानी हो रही है। इसके बाद उनसे 40 लाख रुपये नकद देने को कहा गया।

दीक्षित ने अपने अकाउंटेंट से सलाह लेने के बाद आरोपियों को नकद रकम दे दी। FIR के मुताबिक, इसके बाद आरोपियों ने मोबाइल फोन पर कुछ पत्र दिखाए और दावा किया कि उनके बेटे के दाखिले की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

सीट नहीं मिली तो अगले साल का दिया भरोसा

शिकायत के अनुसार, मई और जून 2019 में आरोपियों ने दीक्षित को बताया कि उस साल की एडमिशन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और मैनेजमेंट कोटे में अब कोई अतिरिक्त सीट उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कथित तौर पर भरोसा दिलाया कि अगले साल उनके बेटे का दाखिला करा दिया जाएगा। हालांकि, अगले साल भी ऐसा नहीं हुआ। दीक्षित के मुताबिक, तब तक वह आरोपियों को कुल 55 लाख रुपये दे चुके थे।

पैसे वापस मांगने पर चेक भी हुए बाउंस

दीक्षित ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपियों ने पैसे लौटाने का भरोसा दिया, लेकिन इसके बाद उन्हें लंबे समय तक परेशान किया गया। उन्होंने आरोपी सारंगी से बार-बार पैसे लौटाने की मांग की।

आरोप है कि बाद में आरोपियों ने रकम लौटाने के लिए कुछ चेक दिए, लेकिन वे भी बाउंस हो गए। इसके बाद आरोपियों ने वडोदरा स्थित अपना कार्यालय बंद कर दिया और कथित तौर पर वहां से चले गए।

2022 में पुलिस से संपर्क, अब दर्ज हुई FIR

दीक्षित ने बताया कि उन्होंने पहली बार 2022 में पुलिस से संपर्क किया था, लेकिन उस समय उन्हें सिविल कोर्ट जाने की सलाह दी गई। इसके अलावा कोविड-19 महामारी के दौरान करीब दो साल का समय भी निकल गया और वह खुद भी गंभीर रूप से बीमार थे। दीक्षित के अनुसार, स्वास्थ्य ठीक होने के बाद उन्होंने दोबारा इस मामले को उठाने और अपने पैसे वापस पाने के लिए कानूनी लड़ाई शुरू करने का फैसला किया।

पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

पुलिस ने 1 सितंबर को दर्ज FIR में पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों में वडोदरा निवासी अजितेशकुमार सारंगी, उनकी पत्नी तेजल, चंद्रेश याग्निक तथा दिल्ली निवासी रंजीत मुखिया और संजीव झा के नाम शामिल हैं।

FIR में आरोप लगाया गया है कि पांचों ने कथित तौर पर पहले से बनाई गई साजिश के तहत दीक्षित को उनके बेटे का मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराने का झांसा दिया और इसी बहाने 55 लाख रुपये लिए।

बेटे ने बाद में फिजियोथेरेपी की पढ़ाई की

मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं मिलने के बाद दीक्षित के बेटे शिवांग ने बाद में फिजियोथेरेपी का कोर्स किया। वहीं, उनकी बेटी फिलहाल अहमदाबाद के एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में पोस्टग्रेजुएट कोर्स कर रही हैं।

गोरवा पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और आरोपियों को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, पैसों के लेन-देन और मेडिकल कॉलेज में दाखिले के कथित वादे से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

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