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असम के मंत्री ने NRC पर जताया असंतोष कहा, “3 से 4 महीने इंतजार करो, बौद्ध, जैन, सिख और पारसियों को दी जाएगी नागरिकता”

असम में बीजेपी नेता हेमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी पार्टी वर्तमान एनआरसी को नहीं मानती। उन्होंने कहा कि 3 से 4 महीने के भीतर नागरिक संशोधन कानून फिर से आएगा और इसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा अफगानिस्तान के पीड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रावधान किया जाएगा।

असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा। (फाइल फोटो सोर्स: द इंडियन एक्सप्रेस)

असम में नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर बीजेपी भी परेशान है। प्रदेश सरकार के मंत्री एवं बीजेपी नेता हेमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि जल्द ही नई एनआरसी असम के लिए लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान एनआरसी में कई गड़बड़ियां हैं, जिन्हें ठीक करने की जरूरत है। असम के वित्त मंत्री सरमा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) एनआरसी को स्वीकार नहीं करती और सुप्रीम कोर्ट से इसे खारिज करने को कहेगी। उन्होंने कहा कि संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान ‘नागरिक संशोधन विधेयक’ दोबारा से पेश किया जाएगा, जिसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक शरणार्थियों के लिए नागरिकता का प्रावधान होगा।

सोमवार को करीमगंज और सिलचर में बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए हेमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “मामले को सुप्रीम कोर्ट में जाने दो और हम कहेंगे कि बीजेपी एनआरसी को खारिज करती है। हम इस एनआरसी में विश्वास नहीं करते। नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में दूसरी एनआरसी लागू होगी। आज जो हंस रहे हैं, वे कल जरूर रोएंगे। एक कानून ऐसा भी पारित कराया जाएगा, ताकि जिन्होंने धार्मिक जोर-जबरदस्ती के चलते भारत शरण लेने आए हैं, उन्हें भी नागरिकता दी जाए।”

सरमा ने कहा, “यदि 2 से 3 लाख हिंदू भारत में शरण चाहते हैं, तो क्या हम उन्हें दुश्मन मानेंगे? बंगाली हिंदू चिंता में है और अपने भविष्य को लेकर दुखी है। जो लोग भारत माता में विश्वास रखते हैं, बौध, जैन, ईसाई, सिख और पारसियों को नागरिकता दी जाएगी। सिर्फ 3 से 4 महीने रुक जाइए।” उन्होंने कहा कि असम चाहता है कि हिंदू बंगलियों को नागरिकता दी जाए। असम की राष्ट्रीयता भाषा आधारित है। असमी लोग बंगालियों के खिलाफ नहीं हैं।

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