ताज़ा खबर
 

JK: ‘नरम’ पड़ी हुर्रियत से बात करने पर बीजेपी राजी नहीं, बोली- बातचीत होगी पीछे हटने वाला कदम

भाजपा ने हुर्रियत के साथ बातचीत करने के कदम को प्रतिकूल और प्रतिगामी बताया। वहीं, राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार के साथ बातचीत के लिए हुर्रियत के राजी होने के फैसले का स्वागत किया है।

Author श्रीनगर | June 24, 2019 9:51 PM
हुर्रियत (एम) के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक (Express Photo by Shuaib Masoodi)

जम्मू-कश्मीर में ‘नरम’ पड़ी हुर्रियत से बात करने को लेकर भाजपा राजी नहीं है। भाजपा ने हुर्रियत कांफ्रेंस के साथ बातचीत का विरोध करते हुए सोमवार को दावा किया कि इस समय अलगाववादियों के साथ कोई भी बातचीत प्रतिकूल और प्रतिगामी कदम होगा। वहीं, राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार के साथ बातचीत के लिए हुर्रियत के राजी होने के फैसले का स्वागत किया है। दरअसल, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने जामिया मस्जिद में जुमे (शुक्रवार) को दिए जाने वाले खुतबे (उपदेश) के दौरान बातचीत की जरूरत का जिक्र किया था। फारूक ने कश्मीर समस्या समेत सभी मुद्दों के समाधान के लिये कश्मीरी नेतृत्व, नयी दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच त्रिपक्षीय वार्ता की अपील की थी।

भाजपा की राज्य इकाई के प्रवक्ता अनिल गुप्ता ने एक बयान में कहा, “ज्वाइंट रेजिस्टेंस लीडरशिप (अलगाववादी समूहों का एक धड़ा) को सार्वजनिक रूप से जम्मू-कश्मीर की निर्विवाद स्थिति को स्वीकार करना चाहिये और यह भारत का अभिन्न अंग है। उन्हें भारत के संविधान के प्रति निष्ठा रखनी चाहिए और इसके दायरे में रहकर ही बातचीत की मांग करनी चाहिये।” अनिल ने कहा कि जेआरएल अथवा हुर्रियत से इन पूर्व शर्तों को स्वीकार किये बिना बातचीत करना प्रतिकूल और प्रतिगामी कदम होगा।” जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने शनिवार को कहा था कि हुर्रियत ने अपना रुख नरम किया है और पिछले साल अगस्त में जब उन्होंने राज्य का प्रभार संभाला, उसके बाद से ही वे बातचीत के पक्षधर रहे हैं।

वहीं, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने हुर्रियत के फैसले का स्वागत करते हुए सोमवार को कहा, ‘‘देर आए दुरुस्त आए।’’ पूर्व मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘ देर आए दुरुस्त आए। पीडीपी भाजपा गठबंधन का मकसद भारत सरकार और सभी पक्षकारों के बीच वार्ता कराना था। मैंने मुख्यमंत्री के अपने कार्यकाल के दौरान ऐसा करने की काफी कोशिश की, लेकिन अब चैन मिला है कि हुर्रियत ने आखिरकार अपना रुख नरम किया है।’’

फारुक ने जामिया मस्जिद में जुमे (शुक्रवार) को दिए जाने वाले खुतबे (उपदेश) के दौरान बातचीत की जरूरत का जिक्र किया था। इसके अलावा इस महीने के शुरू में ईद-उल-फित्र के खुतबे के दौरान भी उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच विश्वास बहाली के उपायों की जरूरत बताई जो दोनों मुल्कों के बीच बातचीत को पुनर्जीवित कर सके। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने शनिवार को एक कार्यक्रम में कहा था कि हुर्रियत ने अपना रुख नरम किया है और वह पिछले साल अगस्त में प्रभार संभालने के बाद बातचीत को तैयार थे। मलिक ने कहा, ‘‘हुर्रियत कॉन्फ्रेंस बातचीत के लिए तैयार नहीं थी। रामविलास पासवान (2016 में) उनके दरवाजे पर खड़े थे, लेकिन वे बातचीत के लिए तैयार नहीं थे। आज वे बातचीत को तैयार हैं और वार्ता करना चाहता हैं। सबमें बदलाव आया है।’’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App