पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को तेजी से कदम उठाते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनाव प्रचार के सबसे बड़े मुद्दों में से एक को बेअसर कर दिया। उन्होंने घोषणा की कि नई बीजेपी सरकार के तहत बंगाल में ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना और अन्य सभी मौजूदा कल्याणकारी कार्यक्रम जारी रहेंगे।

शुभेंदु अधिकारी ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, “लक्ष्मीर भंडार योजना नहीं रुकेगी। बंगाल में चल रही सभी लाभार्थी योजनाएं नहीं रुकेंगी।” लक्ष्मी भंडार ममता बनर्जी की सरकार की एक प्रमुख योजना थी। 2021 में शुरू की गई यह योजना समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की महिलाओं को वित्तीय मदद देती थी।

क्या थी लक्ष्मी भंडार योजना?

अब लक्ष्मी भंडार योजना की बात की जाए तो इसमें पात्र लाभार्थियों में अनुसूचित जाति या जनजाति की 25 से 60 साल की महिलाएं शामिल हैं। इसके तहत एससी और एसटी महिलाओं को हर महीने 1200 रुपये मिलते हैं। वहीं अन्य कैटेगरी की महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये मिलते हैं।

ममता बनर्जी ने इस योजना के इर्द-गिर्द चुनावी खाका खींचा

तृणमूल कांग्रेस और उसकी प्रमुख ममता बनर्जी के लिए , यह योजना महज एक कल्याणकारी कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि एक राजनीतिक कवच थी। इसके इर्द-गिर्द चुनाव अभियान का ज्यादातर हिस्सा तैयार किया गया था। टीएमसी ने महिला मतदाताओं और लाभार्थियों को बार-बार चेतावनी दी कि अगर भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आती है तो वह लक्ष्मी भंडार और अन्य योजनाओं को रद्द कर देगी। बनर्जी ने हर रैली में इस मुद्दे को उठाया और चुनाव को बंगाल के कल्याणकारी मॉडल और बीजेपी सरकार के तहत इसके संभावित विघटन के बीच एक विकल्प के रूप में पेश करने का प्रयास किया।

लक्ष्मी भंडार को बरकरार रखने के अलावा, अधिकारी ने बीएसएफ के लिए बांग्लादेश बॉर्डर के साथ जमीन अधिग्रहण का रास्ता भी साफ कर दिया ताकि अवैध अप्रवासन पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लंबित बाड़ लगाने का काम पूरा किया जा सके। एक और अहम घोषणा केंद्र की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत, को बंगाल में शुरू करने की थी। अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम वाली सभी केंद्रीय कल्याणकारी योजनाएं अब राज्य में लागू की जाएंगी। शुभेंदु सरकार की कैबिनेट के बड़े फैसले पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…